संभल सीजेएम विभांशु सुधीर का सुल्तानपुर तबादला, अनुज चौधरी पर FIR के आदेश के बाद बड़ा बदलाव

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संभल, ब्यूरो | वेब वार्ता

उत्तर प्रदेश के संभल जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर का तबादला कर दिया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से जारी 14 न्यायिक अधिकारियों की स्थानांतरण सूची में उनका नाम प्रमुख रूप से शामिल है। सुधीर ने नवंबर 2024 में हुई संभल हिंसा के मामले में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। उन्हें अब सुल्तानपुर में सीनियर सिविल डिवीजन जज के पद पर भेजा गया है, जबकि चंदौसी कोर्ट के जज आदित्य सिंह को संभल का नया CJM नियुक्त किया गया है।

संभल हिंसा की पृष्ठभूमि: मस्जिद सर्वे के बाद भड़की झड़प

नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर संभल में सांप्रदायिक तनाव फैल गया था। 24 नवंबर को सर्वे के अगले ही दिन प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक भिड़ंत हुई। भीड़ ने पथराव किया, जबकि पुलिस ने कथित तौर पर फायरिंग की, हालांकि यूपी पुलिस ने इसे “हल्का बल प्रयोग” बताया था।

इस हिंसा में 5 लोगों की मौत और 50 से अधिक घायल हुए थे। घटना के दौरान मस्जिद के आसपास आगजनी और तोड़फोड़ की भी खबरें आईं। सर्वे का आदेश स्थानीय अदालत ने दिया था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को कार्यवाही रोकने के निर्देश दिए। हिंसा के बाद कई एफआईआर दर्ज हुईं, जिनमें प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे।

एफआईआर आदेश और तबादले का विवाद

9 जनवरी 2025 को CJM विभांशु सुधीर की अदालत ने याचिकाकर्ता यामीन की याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, कोतवाली इंचार्ज अनुज तोमर और 10-20 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि गोलीबारी के पर्याप्त साक्ष्य हैं, इसलिए प्रारंभिक जांच आवश्यक है।

इस आदेश के बाद यूपी पुलिस ने इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही थी। इसी बीच 20 जनवरी 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों के तबादले की सूची जारी की, जिसमें विभांशु सुधीर का स्थानांतरण भी शामिल था। उन्हें सुल्तानपुर में भेजा गया, जबकि चंदौसी कोर्ट के सीनियर डिवीजन सिविल जज आदित्य सिंह को संभल का नया CJM नियुक्त किया गया।

क्या न्यायपालिका पर पड़ा दबाव?

इस तबादले ने न्यायिक स्वतंत्रता पर बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर इसे “दबाव में तबादला” कहा जा रहा है, जबकि न्यायिक सूत्रों का कहना है कि यह वार्षिक स्थानांतरण प्रक्रिया का हिस्सा है।

जानकारों के अनुसार, यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि धार्मिक संवेदनशीलता और न्यायपालिका की निष्पक्षता की भी परीक्षा है। CJM विभांशु सुधीर के आदेश ने जहां पीड़ित पक्ष में उम्मीद जगाई थी, वहीं पुलिस विभाग में हलचल मचा दी थी। अब हाईकोर्ट में सुनवाई तय करेगी कि FIR आदेश को लेकर आगे की कार्रवाई क्या होगी।

  • मुख्य आरोपी: तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, एसएचओ अनुज तोमर और अन्य 18 पुलिसकर्मी।
  • हिंसा में 5 लोगों की मौत, 50 से अधिक घायल; सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे पर रोक लगाई।
  • तबादले की सूची में 14 न्यायिक अधिकारी, जिनमें संभल CJM का मामला सबसे चर्चित।
  • सरकार ने इसे नियमित प्रक्रिया बताया, जबकि विपक्ष ने न्यायपालिका पर दबाव का आरोप लगाया।

कुल मिलाकर, यह मामला उत्तर प्रदेश की न्यायिक और प्रशासनिक प्रणाली के संतुलन की एक अहम मिसाल बन गया है। एक ओर पुलिस पर कार्रवाई की मांग है, तो दूसरी ओर न्यायिक हस्तक्षेप पर राजनीतिक प्रतिक्रिया। आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की सुनवाई इस विवाद का अगला अध्याय तय करेगी।

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