काठमांडू, अंतरराष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
नेपाल में आगामी 5 मार्च 2026 को होने वाले आम चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कार्यवाहक प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली सरकार को बड़ा झटका लगा है, जब उनके चार मंत्रियों ने चुनाव मैदान में उतरने के लिए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इन सभी ने मंगलवार को विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों से नामांकन दाखिल कर दिया है।
महाबीर पुन, जगदीश खरेल और बबलू गुप्ता चुनावी मैदान में
विज्ञान और शिक्षा मंत्री महाबीर पुन ने मंगलवार को इस्तीफा देकर म्याग्दी जिले से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। इससे पहले सोमवार को संचार मंत्री जगदीश खरेल और खेल मंत्री बबलू गुप्ता ने भी अपने पद छोड़कर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।
जगदीश खरेल ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के टिकट पर ललितपुर-2 से नामांकन किया है, जबकि बबलू गुप्ता ने सिराहा-1 सीट से पर्चा भरा है। वहीं, ऊर्जा और जल संसाधन मंत्री कुलमान घिसिंग पहले ही इस्तीफा देकर उज्यालो नेपाल पार्टी के अध्यक्ष के रूप में राजनीतिक पारी शुरू कर चुके हैं। उन्होंने मंगलवार को काठमांडू निर्वाचन क्षेत्र संख्या-3 से नामांकन किया।
1.89 करोड़ से अधिक मतदाता डालेंगे वोट
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में इस बार के आम चुनाव में 1 करोड़ 89 लाख 3 हजार 689 मतदाता मतदान के पात्र हैं, जिनमें से 92 लाख 40 हजार 131 महिलाएं शामिल हैं।
निर्वाचन आयोग ने बताया कि देशभर में सुरक्षा व्यवस्था को सख्त किया गया है और चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विशेष मॉनिटरिंग टीम गठित की गई है। राजनीतिक दलों ने प्रचार अभियान शुरू कर दिया है, वहीं स्वतंत्र उम्मीदवार युवाओं और शहरी मतदाताओं के बीच नई उम्मीद जगा रहे हैं।
जेन जी आंदोलन के बाद ओली को देना पड़ा था इस्तीफा
नेपाल में मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य की जड़ें पिछले साल सितंबर में हुए “जेन जी आंदोलन” से जुड़ी हैं। इस आंदोलन के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ देशव्यापी विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा था।
आंदोलन के बाद 12 सितंबर 2025 को 73 वर्षीय सुशीला कार्की ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला। उनकी सिफारिश पर राष्ट्रपति ने प्रतिनिधि सभा को भंग करते हुए नए चुनाव की तारीख घोषित की थी। अब चार मंत्रियों के इस्तीफे के साथ यह स्पष्ट है कि नेपाल की राजनीति में अगले कुछ सप्ताह बेहद निर्णायक होने वाले हैं।
- चार मंत्रियों ने चुनाव लड़ने के लिए दिया इस्तीफा — महाबीर पुन, जगदीश खरेल, बबलू गुप्ता और कुलमान घिसिंग।
- नेपाल में 5 मार्च को होंगे आम चुनाव, 1.89 करोड़ से अधिक मतदाता करेंगे मतदान।
- पूर्व पीएम केपी ओली को “जेन जी आंदोलन” के बाद देना पड़ा था इस्तीफा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नेपाल में यह चुनाव पारंपरिक दलों और नए स्वतंत्र नेताओं के बीच विचारधारात्मक टकराव का प्रतीक बन सकता है। प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है — स्थिरता बनाए रखना और प्रशासनिक संतुलन को चुनाव तक कायम रखना। आने वाले दिनों में नेपाल का राजनीतिक परिदृश्य और भी रोचक होने की संभावना है।
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