इंदौर, ब्यूरो | वेब वार्ता
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में प्रदूषित पानी की आपूर्ति से उत्पन्न गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने मामले की विस्तृत जांच के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति पूरे प्रकरण की तकनीकी, प्रशासनिक और स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं की जांच करेगी और एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।
जनस्वास्थ्य से जुड़ा मामला, सरकार ने लिया संज्ञान
भागीरथपुरा इलाके में लंबे समय से नलों के माध्यम से दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायतें सामने आ रही थीं। स्थानीय नागरिकों ने पानी से दुर्गंध आने, रंग बदलने और पीने योग्य न होने की शिकायतें की थीं। कई लोगों के बीमार पड़ने की आशंका के बाद मामला जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बन गया, जिसके बाद राज्य सरकार ने तत्काल संज्ञान लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए।
राज्य स्तरीय समिति करेगी बहुआयामी जांच
गठित की गई राज्य स्तरीय समिति में जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञ अधिकारियों को शामिल किया गया है। समिति यह जांच करेगी कि पानी के स्रोत से लेकर वितरण प्रणाली तक कहां और कैसे प्रदूषण हुआ, साथ ही यह भी देखा जाएगा कि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या तकनीकी खामी तो नहीं रही।
पानी की गुणवत्ता और पाइपलाइन सिस्टम की होगी जांच
जांच के दौरान समिति जल शोधन संयंत्र, पाइपलाइन नेटवर्क, टंकियों और सप्लाई प्वाइंट्स का भौतिक निरीक्षण करेगी। इसके साथ ही पानी के सैंपल लेकर प्रयोगशाला जांच कराई जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पानी किस स्तर तक दूषित है और उसमें कौन-कौन से हानिकारक तत्व मौजूद हैं।
एक माह में सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
राज्य सरकार ने समिति को निर्देश दिए हैं कि वह एक माह के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इस रिपोर्ट में दोषियों की पहचान, जिम्मेदार अधिकारियों या एजेंसियों की भूमिका और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुझाव शामिल किए जाएंगे।
- भागीरथपुरा में प्रदूषित पानी आपूर्ति की शिकायतें लंबे समय से
- जनस्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार सक्रिय
- जल स्रोत, पाइपलाइन और शोधन संयंत्र की होगी जांच
- दोषियों पर कार्रवाई की सिफारिश संभव
- एक माह में जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
स्थानीय लोगों को राहत के अस्थायी इंतजाम
प्रशासन की ओर से फिलहाल प्रभावित क्षेत्र में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत टैंकरों से साफ पानी की आपूर्ति की जा रही है। साथ ही नागरिकों को सलाह दी गई है कि जांच पूरी होने तक नलों के पानी को पीने में उपयोग न करें और केवल उबला हुआ या सुरक्षित स्रोतों से प्राप्त पानी का ही इस्तेमाल करें।
अधिकारियों का कहना है कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा न उत्पन्न हो और लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
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