नई दिल्ली, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता
नई दिल्ली: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) एक बार फिर भारत के खिलाफ आतंकी साजिश रचने में जुटी हुई है। सुरक्षा एजेंसियों को मिली जानकारी के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रांत (ISKP) ने मिलकर भारत में बड़े आतंकी हमले की योजना बनाई है। इस साजिश का मास्टरमाइंड पाकिस्तान की ISI को बताया जा रहा है, जिसने अफगानिस्तान की सीमा से सटे खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की तिराह घाटी में एक ज्वाइंट टेरर हेडक्वार्टर स्थापित कर दिया है। यह हेडक्वार्टर दोनों आतंकी संगठनों के लिए एक साझा संचालन केंद्र के रूप में काम करेगा, जहाँ से भारत के खिलाफ आतंकी योजनाओं को अंजाम देने की तैयारी की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर में फिदायीन हमले की तैयारी, 12 आतंकियों की टुकड़ी तैयार
सूत्रों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा और ISKP ने जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर हमले की साजिश के तहत 12 आत्मघाती आतंकियों की एक टीम तैयार की है। इन आतंकियों को तीन अलग-अलग ग्रुपों में बांटा गया है, जिनकी कमान क्रमशः अबू हुरैरा, मोहम्मद उमर उर्फ ‘खरगोश’ और मोहम्मद रिजवान उर्फ अबू दुजाना को दी गई है। प्रत्येक ग्रुप में चार आतंकियों को रखा गया है और इन्हें आत्मघाती मिशन के लिए खास प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पूरे नेटवर्क की निगरानी लश्कर के टॉप कमांडर हुजैफा बक्करवाल कर रहे हैं, जो रावलपिंडी में ISI के संपर्क में हैं।
तिराह घाटी में तैयार हुआ आतंकियों का नया ठिकाना
पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर स्थित खैबर जिले की तिराह घाटी पहले से ही आतंकियों की गतिविधियों का अड्डा रही है। अब ISI ने यहीं पर लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट खोरासान (ISKP) का संयुक्त हेडक्वार्टर स्थापित किया है। इस ज्वाइंट कैंप की कमान हाफिज ज़ुबैर मुजाहिद के हाथों में दी गई है, जो पहले लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तानी मिलिट्री इंटेलिजेंस के बीच संपर्क सूत्र का काम करता था। वर्ष 2019 में उसे ISKP में भेजा गया था, जहाँ उसने बलूचिस्तान में कई आतंकी हमलों को संचालित किया। अब वही आतंकी इस नए ज्वाइंट मिशन का प्रमुख बन गया है।
भारत में घुसपैठ कराने की योजना, अफगानी आतंकियों की भर्ती
ISI की इस नई रणनीति के तहत अफगानी नागरिकता वाले आतंकियों को भारत की सीमा में घुसपैठ कराना शामिल है। इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में पहले से सक्रिय लश्कर-ISKP नेटवर्क को और मजबूत करना है। जानकारी के अनुसार, ISI ने अगले छह महीनों में 45 से 60 अफगानी आतंकियों की भर्ती करने का लक्ष्य तय किया है। ये सभी आतंकी तिराह घाटी में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे और बाद में उन्हें जम्मू-कश्मीर में सक्रिय मॉड्यूल से जोड़ा जाएगा। इस पूरी भर्ती प्रक्रिया की निगरानी लेफ्टिनेंट जनरल एमर एहसान नवाज और ब्रिगेडियर फैक अयूब कर रहे हैं, जो ISI के शीर्ष अधिकारी हैं।
रावलपिंडी से मिलेंगे आदेश, सैटेलाइट फोन से होगा संपर्क
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, इस ज्वाइंट नेटवर्क का संचालन मुख्य रूप से रावलपिंडी से होगा, जहाँ ISI का मुख्यालय स्थित है। लश्कर के कमांडर हुजैफा बक्करवाल और ISKP के प्रतिनिधि सैटेलाइट फोन के माध्यम से ग्राउंड ऑपरेटिव्स से संपर्क में रहेंगे। वहीं, रफीक नाई और शमशेर नाई जैसे अनुभवी तस्कर आतंकियों को सीमा पार भारत में घुसाने का कार्य करेंगे। ये दोनों बीते दो दशकों से जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर के लिए इसी तरह का काम करते रहे हैं।
ISI का ‘दोहरा खेल’ — आतंकवाद और एंटी-टेरर दोनों
एक तरफ पाकिस्तान सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को आतंकवाद विरोधी देश बताने की कोशिश करती है, वहीं दूसरी तरफ उसी की सेना और खुफिया एजेंसी आतंकी संगठनों को संरक्षण देती है। हाल के महीनों में पाकिस्तान की सेना ने खैबर जिले में तथाकथित “एंटी-टेरर ऑपरेशन” के नाम पर 60 से अधिक आम नागरिकों की जान ले ली। इनमें 22 सितंबर 2025 को हुई बमबारी में 30 नागरिक मारे गए, जिनमें 9 बच्चे शामिल थे। पाकिस्तान सेना ने दावा किया कि उसने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार अधिकांश मृतक निर्दोष नागरिक थे।
ISI की रणनीति — एक तीर से दो निशाने
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ISI अब एक नई नीति पर काम कर रही है — “एक तीर से दो शिकार”। जहां एक ओर वह भारत के खिलाफ ISKP और लश्कर के मॉड्यूल का इस्तेमाल करेगी, वहीं दूसरी ओर ISKP को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के खिलाफ भी इस्तेमाल करेगी। इस रणनीति का उद्देश्य है कि ISKP और लश्कर दोनों पाकिस्तान की जमीन से संचालित हों, लेकिन उनके हमले भारत और TTP पर केंद्रित रहें। इस तरह पाकिस्तान खुद को ‘विक्टिम ऑफ टेररिज्म’ बताने की कोशिश करेगा, जबकि असल में वह आतंकवाद का संरक्षक बना रहेगा।
भारत की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, सीमा पर बढ़ाई गई निगरानी
इस खतरनाक साजिश के मद्देनज़र भारत की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर और सीमा क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। सुरक्षा बलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और कंट्रोल लाइन (LoC) पर ड्रोन व निगरानी उपकरणों की तैनाती बढ़ाई गई है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि भारत को पाकिस्तान के इस नए “हाइब्रिड टेरर नेटवर्क” पर लगातार नजर रखनी होगी, क्योंकि यह पारंपरिक आतंकवाद से कहीं अधिक खतरनाक है। इसमें कई देशों के नागरिक शामिल हैं और यह संगठन साइबर नेटवर्क, सोशल मीडिया और डार्क वेब का भी उपयोग कर रहा है।
- ISI ने तिराह घाटी में लश्कर-ए-तैयबा और ISKP का संयुक्त हेडक्वार्टर बनाया।
- जम्मू-कश्मीर में 12 फिदायीन आतंकियों की टीम तैयार की गई है।
- हाफिज ज़ुबैर मुजाहिद को इस नेटवर्क की कमान सौंपी गई है।
- ISI अगले छह महीनों में 60 अफगानी आतंकियों की भर्ती करने की योजना बना रही है।
- भारत के खिलाफ हमले के साथ-साथ TTP पर भी ISKP से कार्रवाई कराई जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान की इस नई चाल से यह साफ है कि वह आतंकवाद के जरिये भारत के खिलाफ अपनी पुरानी नीति पर कायम है। हालांकि भारत की सुरक्षा एजेंसियां पहले से ऐसी किसी भी साजिश को नाकाम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त कर दी गई है और खुफिया विभाग लगातार इस ज्वाइंट नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रख रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है। जिस पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, वही देश अब दो खतरनाक आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और ISKP के लिए साझा ठिकाना बन गया है। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि विश्व समुदाय ने इस पर समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो यह वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
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