लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता
बीरबल साहनी मार्ग स्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत सांस्कृतिक उपवन में जारी 15 दिवसीय उत्तरायणी कौथिग-2026 के तीसरे दिन लोक संस्कृति, रंगारंग कार्यक्रमों और पारंपरिक लोक नृत्यों की अद्भुत छटा देखने को मिली। पर्वतीय महापरिषद की रजत जयंती वर्ष के इस अवसर पर मंच पर उत्तराखंडी लोकनृत्य, छोलिया दलों की प्रस्तुतियां और पारंपरिक संगीत ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
नृत्य प्रतियोगिताओं में बच्चों ने बिखेरे हुनर के रंग
कौथिग के तीसरे दिन का शुभारंभ एकल नृत्य और सामूहिक नृत्य प्रतियोगिताओं से हुआ। प्रतियोगिताओं में 3 से 8 वर्ष, 9 से 13 वर्ष और 14 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 53 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। निर्णायक मंडल में आकांक्षा आनंद और मेनका सक्सेना रहीं, जबकि संचालन संरक्षक जे.पी. डिमरी और साहित्य प्रकोष्ठ प्रभारी ज्ञान पंत ने किया।
प्रतियोगिता के विजेताओं में 3 से 8 वर्ष वर्ग में कृषिका भाकुनी (प्रथम), सान्वी बिष्ट (द्वितीय), भाव्या (तृतीय) और पतिष्ना पांडे (सांत्वना) रहीं। 9 से 13 वर्ष वर्ग में तनिष्का आर्या (प्रथम), आदित्य पांडे (द्वितीय), लतिका बिष्ट (तृतीय) और यषिका नेगी (सांत्वना) को सम्मानित किया गया। 13 वर्ष से अधिक वर्ग में वंदना सिंह, शीतल धामी, मंशिका कनौजिया और गरिमा मेहरा विजेता रहीं। सामूहिक नृत्य में जोहार सांस्कृतिक संस्था, मोनिका मेहरा ग्रुप, पल्लवी दल और किरण चौबे की टीमों ने पुरस्कार हासिल किए।
उत्तराखंडी गीत “चम्म मुखड़ी” की लॉन्चिंग बनी आकर्षण का केंद्र
प्रतियोगिताओं के बाद विकास नगर के कलाकारों ने पारंपरिक परिधान में गीत, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान म्यूजिकल उत्तराखंड स्टूडियो द्वारा राकेश रमौला और नीरू बोरा अभिनीत नया उत्तराखंडी गीत “चम्म मुखड़ी” रिलीज़ किया गया, जिसने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
वहीं मैदान में लगे गर्म कपड़ों के स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे। मीडिया प्रभारी भुवन पांडे ने बताया कि सुबह की ठंड के चलते बड़ी संख्या में लोग जैकेट, वास्केट और लेडीज ऊनी वस्त्रों की खरीदारी करते नजर आए।
सांयकालीन सत्र में गीत “उत्तरैनी कौथिग मा सभन को सत्कार छ” से हुई शुरुआत
सांयकालीन सत्र की शुरुआत पर्वतीय महापरिषद के उपाध्यक्ष और सांस्कृतिक प्रभारी महेन्द्र पंत के रचित गीत “उत्तरैनी कौथिग मा सभन को सत्कार छ…” से हुई।
अति विशिष्ट अतिथि पुष्पिला बिष्ट ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। अध्यक्ष गणेश जोशी और महासचिव महेन्द्र रावत ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया, जबकि मुख्य संयोजक ठाकुर सिंह मनराल और संरक्षक लाबीर सिंह बिष्ट ने प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इस अवसर पर के.एस. रावत, एम.एस. मेहता, हरिश काण्डपाल, पी.सी. पंत, चंचल सिंह बोरा, मंजू शर्मा सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
लोक कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों से गूंजा मंच
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में उत्तराखंड से आईं ईशा मर्तोलिया के लोकनृत्य और चन्द्रकला के गीत “तेरी मेरी प्रीत…” तथा “यू डाना का पार…” ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
वहीं राकेश जोशी ने “हिट दे शाली म्यार दगाड़…”, “राम सीता लखना…” जैसे गीतों से माहौल को जोशीला बनाया। लखनऊ के लोकगायक आनंद कपकोटी ने अपनी सुरीली आवाज़ से कौथिग में समां बांध दिया।
कल के कार्यक्रम
- उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक कलाकार संजय पाटनी और विनोद सामंत के लोकगीतों की प्रस्तुतियां
- स्थानीय कलाकारों द्वारा पारंपरिक संगीत व नृत्य कार्यक्रम
उत्तरायणी कौथिग-2026 का तीसरा दिन उत्तराखंडी लोक संस्कृति और संगीत का जीवंत प्रतीक साबित हुआ। हर उम्र के दर्शकों ने इस पर्व को पर्वतीय परंपरा, लोककला और सामूहिक उत्सव के रूप में मनाया।




