प्रयागराज, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता
प्रयागराज में माघ मेले के पहले दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और पुलिस प्रशासन के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया। शंकराचार्य रथ–पालकी के साथ संगम नोज पर स्नान के लिए पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने VIP स्नान पर प्रतिबंध का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। इस पर शंकराचार्य नाराज हो गए और शिविर लौटकर धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि जब तक सम्मानपूर्वक उन्हें नहीं बुलाया जाएगा, वे गंगा स्नान नहीं करेंगे।
रथ रोकने पर विवाद, शिष्यों ने पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप लगाया
घटना शनिवार सुबह करीब 8 बजे की है जब शंकराचार्य अपने 200 शिष्यों के साथ रथ–पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए रवाना हुए। सुबह 9:30 बजे के करीब पुलिस ने संगम नोज के पास बेरिकेड्स लगाकर रथ को रोक दिया। शिष्यों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और शिष्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। आरोप है कि पुलिस ने कुछ शिष्यों पर लाठीचार्ज किया और धक्का-मुक्की की।
इसके बाद लगभग तीन घंटे तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा। दोपहर करीब 2 बजे शंकराचार्य बिना स्नान किए अपने शिविर लौट आए और धरना शुरू कर दिया। शाम को उन्होंने स्पष्ट कहा – “सम्मानपूर्वक बुलाए बिना स्नान नहीं करेंगे।”
पुलिस कमिश्नर का बयान: VIP स्नान पर प्रतिबंध, भीड़ के कारण सुरक्षा कदम
पुलिस कमिश्नर प्रयागराज ने बताया कि माघ मेले के पहले दिन VIP स्नान पर प्रतिबंध लगाया गया था। बावजूद इसके शंकराचार्य करीब 200 शिष्यों के साथ रथ–पालकी लेकर बेरिकेड्स तोड़ते हुए आगे बढ़े। कमिश्नर ने कहा, “संगम नोज पर पैर रखने तक की जगह नहीं थी। अगर रथ आगे जाता तो भीड़ में भगदड़ मच सकती थी। इस कारण पुलिस ने उन्हें रोकना जरूरी समझा।”
उन्होंने बताया कि इस घटनाक्रम से लगभग तीन घंटे तक अव्यवस्था बनी रही, लेकिन अब स्थिति सामान्य है। पुलिस पूरे मामले में वैधानिक कार्रवाई कर रही है।
शंकराचार्य का पक्ष: ‘पुलिस ने शिष्यों को पीटा, हमारा सम्मान नहीं किया’
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर में मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारा अधिकार है कि हमें सम्मानपूर्वक स्नान करने दिया जाए। पुलिस ने न केवल रथ को रोका बल्कि हमारे शिष्यों को भी पीटा। जब तक प्रशासन हमें सम्मानपूर्वक संगम स्नान के लिए नहीं ले जाएगा, हम धरने पर बैठे रहेंगे।”
उन्होंने कहा कि धर्माचार्यों के साथ इस तरह का व्यवहार अनुचित है और इससे आस्था को ठेस पहुंचती है।
माघ मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
माघ मेले के पहले ही दिन शंकराचार्य और पुलिस के बीच यह विवाद प्रशासनिक प्रबंधन पर सवाल खड़े कर रहा है। लाखों श्रद्धालुओं के बीच इस तरह की स्थिति से अराजकता फैलने का खतरा बढ़ गया। प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था की दृष्टि से VIP स्नान पर रोक लगाई थी, लेकिन विवाद ने माहौल को गरमा दिया है। फिलहाल अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और हालात पर नजर रखी जा रही है।
- शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद संगम स्नान के लिए पहुंचे थे।
- पुलिस ने VIP स्नान प्रतिबंध का हवाला देकर रथ को रोक दिया।
- शिष्यों ने पुलिस पर लाठीचार्ज और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया।
- शंकराचार्य ने सम्मानपूर्वक बुलाए जाने तक स्नान से इंकार किया।
- पुलिस ने कहा – अव्यवस्था रोकने के लिए उठाया गया कदम आवश्यक था।
माघ मेले में इस विवाद ने प्रशासन और धर्माचार्यों के बीच समन्वय की कमी उजागर की है। दोनों पक्षों की ओर से बयान जारी किए गए हैं, लेकिन विवाद के शांत होने के आसार फिलहाल कम दिख रहे हैं। प्रशासन अब स्थिति को सामान्य करने के लिए उच्चस्तरीय बैठक करने की तैयारी में है।








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