कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता
बिहार के पश्चिमी चंपारण और उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिलों को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित गंडक पुल सह सड़क परियोजना को निरस्त कर दिया गया है। यह जानकारी जद (यू) पार्टी के प्रवक्ता राकेश सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि शास्त्रीनगर (बगहा) से कुशीनगर के बेलवनिया को जोड़ने वाली यह परियोजना दोनों राज्यों के लोगों की वर्षों की मांग थी। इस परियोजना के निरस्त होने से क्षेत्र में निराशा और आक्रोश दोनों की स्थिति है।
दशकभर से चल रहा था प्रयास
राकेश सिंह ने बताया कि पिछले एक दशक से उत्तर प्रदेश के जटहां क्षेत्र और बिहार के बगहा क्षेत्र के लोगों ने इस पुल निर्माण के लिए निरंतर प्रयास किए। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों के संयुक्त प्रयास से यह परियोजना पहले ही स्वीकृत हो चुकी थी। यहां तक कि इसका डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) भी तैयार कर लिया गया था और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ होने वाली थी। लेकिन अब यह परियोजना निरस्त कर दी गई है।
एनएच प्राधिकरण ने दी निरस्तीकरण की जानकारी
राकेश सिंह के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के कार्यपालक अभियंता ने इस बहुप्रतीक्षित पुल प्रस्ताव के निरस्त होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा। सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में जनप्रतिनिधियों की ओर से आने वाली आधिकारिक जानकारी को ही अंतिम माना जाएगा।
- गंडक पुल सह सड़क मार्ग परियोजना की डीपीआर पहले ही तैयार की जा चुकी थी।
- भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने ही वाली थी।
- अब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस परियोजना को निरस्त कर दिया है।
क्षेत्र के विकास पर पड़ेगा असर
राकेश सिंह ने कहा कि यह पुल केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली जीवनरेखा थी। इसके रद्द होने से व्यापार, आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से न केवल दोनों राज्यों के बीच संपर्क मजबूत होता, बल्कि यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देता। अब लोगों की निगाहें अपने जनप्रतिनिधियों पर हैं कि वे इस महत्वपूर्ण परियोजना को पुनः प्रारंभ कराने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
निष्कर्ष: पुनः स्वीकृति की उम्मीद में क्षेत्रवासी
शास्त्रीनगर-बेलवनिया गंडक पुल सह सड़क परियोजना का निरस्तीकरण कुशीनगर और बगहा क्षेत्र के लोगों के लिए गहरी निराशा का कारण बना है। क्षेत्रवासी अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को फिर से उठाएँगे और विकास की इस अहम कड़ी को पुनः शुरू करवाने का प्रयास करेंगे। यह पुल न केवल भौगोलिक रूप से, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी दोनों राज्यों को जोड़ने वाला सेतु था।
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