Monday, January 26, 2026
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नोएडा हादसा: दलदल में फंसा इंजीनियर 80 मिनट तक चिल्लाता रहा, पिता से कहा – “पापा, मुझे बचा लो… मैं मरना नहीं चाहता”

नोएडा, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता

नोएडा में एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया। घने कोहरे के बीच एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार 30 फीट गहरे दलदल में जा गिरी। युवक करीब 80 मिनट तक मदद के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन कोई उसे बचा नहीं सका। मरने से पहले उसने अपने पिता को फोन कर कहा – “पापा, मुझे बचा लो… मैं मरना नहीं चाहता।”

रात 12 बजे हुआ हादसा, दलदल में समा गई ग्रैंड विटारा

मृतक की पहचान युवराज मेहता (27) के रूप में हुई है, जो गुरुग्राम के सेक्टर-54 स्थित डनहम्बी इंडिया कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। शुक्रवार देर रात वह अपनी ग्रैंड विटारा कार से गुरुग्राम से नोएडा के सेक्टर-150 टाटा यूरेका पार्क जा रहे थे।

कोहरे की वजह से उन्हें सड़क का यूटर्न नजर नहीं आया और कार एटीएस ले ग्रांड के पास नाले की दीवार तोड़ते हुए सीधे 30 फीट गहरे पानी से भरे दलदल में गिर गई। कार कुछ ही सेकंड में धंसने लगी। युवराज किसी तरह बाहर निकलकर कार की छत पर चढ़ गए और अपने पिता को फोन किया।

“पापा, मेरी कार डूब रही है…” — बेटे की आखिरी पुकार

रात 12:20 बजे युवराज ने अपने पिता राजकुमार मेहता को फोन कर बताया कि उनकी कार दलदल में फंस गई है। पिता ने तुरंत डायल-112 पर कॉल कर सूचना दी और खुद मौके पर पहुंचे।

वहां पहुंचने पर वे बेटे की आवाज तो सुन पा रहे थे, लेकिन घने कोहरे के कारण उसे देख नहीं पा रहे थे। युवराज मोबाइल की टॉर्च जलाकर चिल्ला रहा था — “पापा, मुझे बचा लो… मेरी कार डूब रही है!”

लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी आवाजें बंद हो गईं। वह दलदल में कार समेत समा गया। पुलिस, दमकल और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। करीब 4:30 बजे युवराज का शव निकाला गया।

घने कोहरे और लापरवाही ने छीनी एक जान

चश्मदीद मुनेन्द्र (डिलीवरी बॉय) ने बताया — “मैंने देखा कि एक लड़का मोबाइल की लाइट जलाकर मदद के लिए चिल्ला रहा था, लेकिन कोई भी पानी में उतरने की हिम्मत नहीं कर सका। पुलिसकर्मी भी ठंड और पानी की गहराई का हवाला देकर रेस्क्यू शुरू नहीं कर पाए।”

उन्होंने बताया कि उन्होंने रस्सी बांधकर खुद पानी में उतरने की कोशिश की, लेकिन कोहरा और अंधेरा होने की वजह से कुछ नजर नहीं आया।

रिटायर्ड पिता के सामने खत्म हो गई उम्मीद

युवराज के पिता राजकुमार मेहता भारतीय स्टेट बैंक से निदेशक पद से सेवानिवृत्त हैं। उनकी पत्नी का कुछ साल पहले निधन हो चुका है। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है और वह यूके में रहती हैं।

युवराज उनका एकमात्र बेटा था। पिता मौके पर मौजूद थे और पूरे समय अपने बेटे की आवाज सुनते रहे, लेकिन उसे बचाने में असहाय रहे। यह दृश्य हर किसी की आंखें नम कर गया।

प्राधिकरण की लापरवाही पर फूटा लोगों का गुस्सा

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। लोगों का कहना था कि इस कट पर पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। बार-बार शिकायत के बावजूद यहां बैरिकेडिंग और रिफ्लेक्टर नहीं लगाए गए।

विरोध के बाद प्राधिकरण ने घटनास्थल पर मलबा गिरा दिया ताकि गड्ढे को ढंका जा सके। लेकिन तब तक एक युवा इंजीनियर की जान जा चुकी थी।

रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी और अव्यवस्था

हादसे के समय रात 12 बजे के करीब का था। घने कोहरे की वजह से पुलिस और रेस्क्यू टीमें समय पर सही जगह नहीं पहुंच सकीं।

स्थानीय लोगों ने बताया कि युवराज करीब 80 मिनट तक चिल्लाता रहा, लेकिन किसी के पास उसे बचाने के साधन नहीं थे। एनडीआरएफ की टीम करीब 1:55 बजे पहुंची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

यह हादसा एक सवाल छोड़ गया…

यह घटना सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और रेस्क्यू की सुस्ती की दुखद मिसाल है। अगर समय रहते दलदल वाले प्लॉट को ढंका गया होता, या रिफ्लेक्टर और बैरिकेडिंग होती, तो शायद युवराज की जान बचाई जा सकती थी।

उसकी आखिरी पुकार – “मैं मरना नहीं चाहता” – अब नोएडा प्रशासन से जवाब मांग रही है।

  • 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत।
  • पिता के सामने 80 मिनट तक दलदल में फंसा रहा बेटा।
  • रेस्क्यू टीम समय पर पहुंची, लेकिन बचाया नहीं जा सका।
  • स्थानीय लोगों ने प्राधिकरण पर लापरवाही का आरोप लगाया।

— रिपोर्ट: वेब वार्ता टीम, नोएडा

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