Saturday, January 17, 2026
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यूपी में माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा, गोरखपुर और संतकबीर नगर में बन रहीं पायलट परियोजनाएं

लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं और जल उपयोग दक्षता को बढ़ाने के लिए उल्लेखनीय कदम उठा रहा है। विभाग ने मॉडर्नाइजेशन ऑफ कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट (MCADWM) परियोजना के तहत गोरखपुर और संतकबीर नगर जिलों में माइक्रो इरिगेशन की पायलट परियोजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य है — जल संरक्षण के साथ किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादकता का लाभ देना।

गोरखपुर व संतकबीर नगर में माइक्रो इरिगेशन का विकास

ये पायलट परियोजनाएं गोरखपुर के कलपईचा/रामगढ़ ताल व राप्ती नदी क्षेत्र और संतकबीर नगर के कुवानो नदी क्षेत्र में बनाई जा रही हैं। इनमें इस्तेमाल की जा रही प्रेशराइज्ड पाइप्ड इरिगेशन नेटवर्क (PPIN) तकनीक जल उपयोग की दक्षता में लगभग 75 प्रतिशत वृद्धि सुनिश्चित करेगी। इन योजनाओं की सफलता के बाद इसी मॉडल को प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा, जिससे राज्य में कृषि क्षेत्र में सतत विकास को गति मिलेगी।

गोरखपुर और संतकबीर नगर में निर्माणाधीन छह परियोजनाएं

सिंचाई विभाग कुल छह माइक्रो इरिगेशन पायलट परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है। इनमें से चार की फाइनल डिटेल डिजाइन रिपोर्ट (DDR) तैयार हो चुकी है, जबकि शेष दो परियोजनाओं पर विचार चल रहा है। इन सभी परियोजनाओं का कुल सीसीए (कल्चरेबल कमांड एरिया) 2149 हेक्टेयर है।

इन क्लस्टरों में गोरखपुर के बांसगांव, मलांव व मझगवां, राजधनी, बरगदवां, जंगल गौरी-1 और संतकबीर नगर के प्रजापतिपुर क्लस्टर शामिल हैं। गोरखपुर के बांसगांव और जंगल गौरी-1 क्लस्टरों को स्वीकृति मिलते ही फरवरी 2026 के अंत तक सभी क्लस्टरों में परियोजनाएं क्रियान्वित हो जाएंगी। इससे हजारों किसानों को रबी और खरीफ दोनों मौसमों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी।

पीपीआईएन तकनीक से बढ़ेगी जल उपयोग दक्षता

पीपीआईएन तकनीक के माध्यम से पानी को सीधे जलस्रोत से खेतों तक पहुंचाया जाएगा। इससे पानी की बर्बादी में भारी कमी आएगी और जल उपयोग दक्षता में 75 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी। इसके अंतर्गत सभी जलस्रोतों का एकीकरण कर स्मार्ट जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की जा रही है।

  • किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने में सहायता मिलेगी।
  • हर क्लस्टर में वाटर यूजर सोसाइटी गठित कर संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी।
  • परियोजना से किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन का लाभ मिलेगा।

पीडीएमसी अवधारणा को देगा बल

परियोजना से प्रदेश में “Per Drop More Crop (PDMC)” की अवधारणा को बल मिलेगा। यह योजना किसानों के लिए जल-संरक्षण के साथ दीर्घकालिक जल-सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। पायलट परियोजनाओं की सफलता के बाद इन्हें पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहेगा।

निष्कर्ष: सतत कृषि विकास की दिशा में बड़ा कदम

माइक्रो इरिगेशन की ये योजनाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सतत कृषि विकास के विजन को साकार करेंगी। इससे किसानों को न केवल लागत में कमी का लाभ मिलेगा, बल्कि जल संसाधनों के संरक्षण के साथ उत्तर प्रदेश ‘हर खेत को पानी’ के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर होगा।

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