कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता
कुशीनगर जिले के पडरौना उपनिबंधन कार्यालय में शुक्रवार सुबह करीब 11:30 बजे आयकर विभाग की टीम ने औचक सर्वे शुरू किया। यह कार्रवाई मुख्य रूप से कर चोरी, काले धन के सफेदीकरण और 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य वाली संपत्तियों की रजिस्ट्री में पैन कार्ड की जानकारी छिपाने या गलत तरीके से उपयोग करने के संदेह पर आधारित है। सर्वे से पूरे कार्यालय में हड़कंप मच गया है।
सर्वे का मुख्य उद्देश्य
आयकर विभाग की इंटेलीजेंस और क्रिमिनल इंटेलिजेंस यूनिट की टीम ने कार्यालय पहुंचकर पिछले कुछ वर्षों के रजिस्ट्री रिकॉर्ड की बारीकी से जांच शुरू की। टीम ने कंप्यूटर डेटा, पेपर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड का अवलोकन किया। विशेष रूप से 30 लाख रुपये से ऊपर कीमत वाली जमीनों की रजिस्ट्री पर फोकस है, जहां पैन कार्ड का उपयोग अनिवार्य है।
इन्कम टैक्स ऑफिसर विनीत श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि यदि पैन कार्ड का उपयोग सही नहीं पाया गया या जानकारी छिपाई गई तो संबंधित पक्षों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। टीम ने कार्यालय के स्टाफ से भी पूछताछ की और आवश्यक दस्तावेज जब्त किए जाने की संभावना है।
सर्वे में शामिल अधिकारी
सर्वे में इन्कम टैक्स ऑफिसर विनीत श्रीवास्तव, इंस्पेक्टर अमित गुप्ता, वशिष्ठि गिरी, अवनीश सिंह, रुपेश कुमार सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे। टीम ने पूरे दिन कार्यालय में डेरा डाला और रिकॉर्ड की जांच की।
पिछले दिनों हुई रेड से जुड़ा संदेह
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह सर्वे पिछले महीने कुशीनगर में एक जमीन कारोबारी के ठिकानों पर हुई आयकर विभाग की रेड से जुड़ा माना जा रहा है। उस रेड में दो दिनों तक छापेमारी चली थी और कई दस्तावेज जब्त किए गए थे। अब उसी जांच के सिलसिले में पडरौना उपनिबंधन कार्यालय पर सर्वे किया जा रहा है।
पैन कार्ड नियम की अनदेखी का खतरा
भारतीय आयकर अधिनियम की धारा 139A के अनुसार, 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य वाली संपत्ति की रजिस्ट्री में पैन कार्ड देना अनिवार्य है। यदि पैन नहीं दिया जाता या गलत जानकारी दी जाती है तो यह कर चोरी का मामला बनता है। विभाग का मानना है कि पडरौना जैसे क्षेत्रों में कई मामलों में यह नियम तोड़ा गया है, जिससे काले धन की सफेदीकरण की आशंका है।
निष्कर्ष: कर चोरी पर लगाम लगाने की मुहिम तेज
यह सर्वे आयकर विभाग की उत्तर प्रदेश में कर चोरी और काले धन के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे सर्वे और जांच से न केवल कर चोरी रोकी जाएगी, बल्कि पारदर्शी प्रणाली भी मजबूत होगी। जांच के नतीजे आने के बाद कई बड़े खुलासे होने की संभावना है। स्थानीय लोगों में इस कार्रवाई को लेकर सनसनी है और उम्मीद है कि इससे भविष्य में रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।
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