Saturday, January 17, 2026
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ऊंटनी को बना दिया चलता-फिरता ड्राइंग बुक, बाल काट उकेर दी बेमिसाल नक्काशी, सोशल मीडिया पर मचा तहलका

राजस्थान, वायरल डेस्क | वेब वार्ता

सोशल मीडिया पर इन दिनों राजस्थान की लोक-संस्कृति से जुड़ा एक अनोखा वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक ऊंटनी को चलता-फिरता कैनवास बना दिया गया है। एक राजस्थानी कलाकार ने ऊंटनी के बालों को बेहद बारीकी से काटकर ऐसी कलात्मक नक्काशी उकेरी है कि देखने वालों के मुंह से अपने आप “वाह!” निकल रहा है। यह वीडियो न केवल कलाकार की मेहनत और हुनर को दिखाता है, बल्कि राजस्थान की सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा को भी जीवंत करता है।

ऊंट सिर्फ सवारी नहीं, संस्कृति की पहचान

राजस्थान की रेतीली धरती पर ऊंट को केवल सवारी का साधन नहीं माना जाता, बल्कि यह सम्मान, धैर्य और संस्कृति का प्रतीक है। रायका और रबारी जैसे घुमंतू समुदाय पीढ़ियों से ऊंटों की देखभाल और सजावट की परंपरा निभाते आ रहे हैं। खास मौकों, मेलों और उत्सवों में ऊंटों को इस तरह सजाया जाता है कि वे किसी चलते-फिरते आर्ट गैलरी से कम नहीं लगते।

कैमल फर कटिंग: जब ऊंट बन जाता है कैनवास

वायरल वीडियो में दिखाई गई यह कला “कैमल फर कटिंग” या “कैमल हेयर आर्ट” के नाम से जानी जाती है। इस तकनीक में ऊंट या ऊंटनी के बालों को कैंची और ब्लेड की मदद से बेहद सावधानीपूर्वक काटकर उन पर डिजाइन उकेरी जाती है। बीकानेर कैमल फेस्टिवल जैसे आयोजनों में यह कला खास आकर्षण का केंद्र रहती है और देश-विदेश से आए पर्यटक इसे देखने के लिए उमड़ पड़ते हैं।

  • ज्यामितीय पैटर्न, फूल-पत्तियां और जालीदार डिजाइन
  • मोर, मंदिर, मुगल गार्डन और राजस्थानी योद्धाओं की आकृतियां
  • राम-सीता, हनुमान जैसे धार्मिक प्रतीक और हिंदी शब्दों की नक्काशी

सालों की मेहनत से तैयार होती है एक कृति

इस कला को देखना जितना आसान लगता है, इसे बनाना उतना ही कठिन है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक परफेक्ट कैमल हेयर आर्ट तैयार करने में कई साल लग जाते हैं। पहले चरण में बालों को सही लंबाई और मोटाई तक बढ़ाया जाता है, फिर उन्हें ट्रिम कर शेप दी जाती है। अंतिम चरण में महीन नक्काशी की जाती है और कभी-कभी प्राकृतिक रंगों से डिजाइन को और उभार दिया जाता है। यह प्रक्रिया कलाकार के धैर्य और कौशल की असली परीक्षा होती है।

सोशल मीडिया पर क्यों हो रही है तारीफ

वायरल वीडियो पर लोग लगातार कमेंट कर रहे हैं और इसे “लाइव आर्ट”, “चलता-फिरता ड्राइंग बुक” और “राजस्थान की शान” जैसे शब्दों से नवाज रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि ऐसी लोक कलाएं आधुनिक दौर में भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं और इन्हें वैश्विक मंच मिलना चाहिए। यह वीडियो युवाओं को अपनी जड़ों और पारंपरिक हुनर पर गर्व करना भी सिखा रहा है।

निष्कर्ष: परंपरा और कला का अनोखा संगम

ऊंटनी पर उकेरी गई यह नक्काशी सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि राजस्थान की जीवंत संस्कृति, मेहनत और रचनात्मकता की कहानी है। कैमल हेयर आर्ट यह साबित करती है कि लोक कलाएं समय के साथ भी प्रासंगिक रह सकती हैं और सोशल मीडिया के जरिए दुनिया तक अपनी पहचान बना सकती हैं।

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