Saturday, January 17, 2026
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NASA बार-बार क्यों फेल हो रहा? अंतरिक्ष संकट में Elon Musk कैसे बने ‘संकटमोचक’

वाशिंगटन, साइंस डेस्क | वेब वार्ता

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA लंबे समय से तकनीकी देरी, महंगे प्रोजेक्ट और असफलताओं से जूझ रही है। ऐसे समय में अरबपति उद्यमी एलन मस्क की कंपनी SpaceX अंतरिक्ष मिशनों में एक तरह से ‘संकटमोचक’ बनकर उभरी है। सुनीता विलियम्स जैसे अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी से लेकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से पहली मेडिकल इवैक्यूएशन तक, कई अहम मौकों पर SpaceX ने NASA को बड़ी राहत दी है।

SpaceX की शुरुआत और NASA के लिए नया सहारा

एलन मस्क ने वर्ष 2002 में SpaceX की स्थापना इस उद्देश्य से की थी कि अंतरिक्ष यात्रा को सस्ता, सुरक्षित और दोबारा इस्तेमाल योग्य बनाया जा सके। वर्ष 2011 में जब अमेरिका का स्पेस शटल प्रोग्राम बंद हुआ, तब NASA को रूसी सोयुज रॉकेट पर निर्भर होना पड़ा। इसी दौर में SpaceX का ड्रैगन कैप्सूल सामने आया, जिसने 2020 से अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को ISS तक पहुंचाना शुरू किया और अमेरिका की स्वतंत्र अंतरिक्ष क्षमता को फिर से मजबूत किया।

सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर का ऐतिहासिक रेस्क्यू

वर्ष 2024 में भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से केवल आठ दिन के मिशन पर ISS पहुंचे थे। लेकिन तकनीकी खामियों, थ्रस्टर फेलियर और हीलियम लीक के कारण वे करीब नौ महीने तक अंतरिक्ष में फंसे रहे। आखिरकार NASA ने स्टारलाइनर को खाली लौटाने का फैसला किया और SpaceX के क्रू-9 मिशन के जरिए दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को मार्च 2025 में सुरक्षित धरती पर वापस लाया गया।

  • स्टारलाइनर में थ्रस्टर और हीलियम लीक की गंभीर समस्या
  • स्पेसएक्स ने विशेष योजना बनाकर क्रू-9 मिशन भेजा
  • लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से स्वास्थ्य जोखिम टले

क्रू-11 और अंतरिक्ष से पहली मेडिकल इवैक्यूएशन

अगस्त 2025 में लॉन्च हुए SpaceX के क्रू-11 मिशन ने इतिहास रच दिया। छह महीने के इस मिशन के दौरान जनवरी 2026 में एक अंतरिक्ष यात्री को मेडिकल समस्या हो गई। NASA ने पहली बार अंतरिक्ष स्टेशन से मेडिकल इवैक्यूएशन का निर्णय लिया। ड्रैगन कैप्सूल ने 14 जनवरी 2026 को ISS से अलग होकर 15 जनवरी को कैलिफोर्निया तट के पास सुरक्षित स्प्लैशडाउन किया। यह ISS के 25 साल के इतिहास का पहला मेडिकल रेस्क्यू माना गया।

NASA खुद क्यों नहीं कर पा रहा ऐसे मिशन?

सवाल उठता है कि NASA खुद ये रेस्क्यू मिशन क्यों नहीं कर पा रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह बोइंग का स्टारलाइनर प्रोजेक्ट है, जो बार-बार तकनीकी खामियों, देरी और लागत बढ़ने की समस्या से जूझता रहा। 2014 में NASA ने बोइंग और SpaceX दोनों को क्रू स्पेसक्राफ्ट विकसित करने का जिम्मा दिया था, लेकिन बोइंग तय समयसीमा पर खरा नहीं उतर पाया।

स्टारलाइनर की नाकामी: तकनीकी और प्रशासनिक कारण

स्टारलाइनर के साथ सॉफ्टवेयर बग, थ्रस्टर फेलियर, ओवरहीटिंग और हीलियम लीक जैसी समस्याएं सामने आईं। वहीं NASA की अपनी प्रशासनिक चुनौतियां, बजट कटौती, सरकारी शटडाउन और बदलती राजनीतिक प्राथमिकताओं ने भी अंतरिक्ष परियोजनाओं में देरी बढ़ाई। GAO की कई रिपोर्ट्स में NASA की ‘ओवर ऑप्टिमिज्म’ संस्कृति और कमजोर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहराया गया है।

मस्क की सफलता का फॉर्मूला

एलन मस्क की SpaceX इंजीनियरिंग-केंद्रित सोच, रीयूजेबल रॉकेट टेक्नोलॉजी और तेज निर्णय लेने की क्षमता के कारण आगे निकली। क्रू ड्रैगन ने 2020 के बाद से 10 से ज्यादा सफल मिशन पूरे किए। जहां NASA की ब्यूरोक्रेसी और बोइंग की कॉरपोरेट संस्कृति प्रोजेक्ट्स को धीमा कर रही थी, वहीं SpaceX जोखिम लेकर भी तेजी से समाधान दे रही थी।

निष्कर्ष: NASA की मजबूरी, SpaceX की ताकत

आज NASA कई अहम मिशनों के लिए SpaceX पर निर्भर है। हालांकि भविष्य के लिए बैकअप सिस्टम जरूरी है, लेकिन मौजूदा दौर में SpaceX ने यह साबित कर दिया है कि संकट की घड़ी में निजी कंपनियां भी अंतरिक्ष मिशनों में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। एलन मस्क की रणनीति ने उन्हें अंतरिक्ष का नया ‘संकटमोचक’ बना दिया है।

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