लखनऊ, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता
लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने केंद्र सरकार की चीन नीति पर कड़ा हमला बोलते हुए इसे देश की आर्थिक और कूटनीतिक संप्रभुता के लिए खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार खुद को ‘विश्व गुरु’ बताती है, लेकिन चीन के सामने उसकी नीतियां गुलामी की तरह नजर आ रही हैं। सीमा पर जवानों की शहादत हो रही है, लेकिन सरकार की नीतियों में सख्ती और आत्मसम्मान का अभाव है। सिंह ने चीन से आयात पर निर्भरता को देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम करार दिया और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मात्र नारा बताकर सरकार की विफलता पर सवाल उठाए।
यह बयान लोकदल की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में आया है, जिसमें पार्टी ने सरकार की विदेश नीति और आर्थिक रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सुनील सिंह ने कहा कि ऐसे समय में जब विश्व स्तर पर चीन की विस्तारवादी नीतियां चर्चा में हैं, भारत सरकार की चुप्पी और निर्भरता देश के हितों के खिलाफ है।
चीन नीति पर लोकदल का कड़ा हमला
लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने अपने बयान में केंद्र सरकार की चीन नीति को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सीमा विवाद और लद्दाख में जवानों की शहादत के बावजूद सरकार की नीतियां नरम हैं। सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार बड़े कॉरपोरेट हितों के दबाव में चीन पर निर्भरता कम करने का साहस नहीं दिखा पा रही है। उन्होंने कहा, “देश का बाजार आज भी चीनी सामान से भरा पड़ा है—मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयों का कच्चा माल और मशीनरी तक चीन से आयात की जा रही है। यह स्थिति देश की आर्थिक संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा है।”
सिंह ने आगे कहा कि हजारों करोड़ के व्यापार घाटे के बावजूद सरकार की चुप्पी उसकी नीतिगत विफलता को उजागर करती है। उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को खोखला बताते हुए कहा कि यह केवल नारा बनकर रह गया है। “देश को भाषणों से नहीं, मजबूत नीतियों और आत्मसम्मान से विश्व गुरु बनाया जा सकता है। जनता अब जवाब चाहती है,” सिंह ने जोर देकर कहा।
सरकार की उपलब्धियां और चुनौतियां
सुनील सिंह के बयान ने जहां सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं, वहीं यह भी याद दिलाता है कि मोदी सरकार ने चीन के मुद्दे पर कई सकारात्मक कदम उठाए हैं। सरकार ने लद्दाख में LAC पर सैन्य तैनाती बढ़ाई है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत कई क्षेत्रों में चीन से आयात पर प्रतिबंध लगाए हैं। हाल के वर्षों में भारत ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर में चीन पर निर्भरता कम की है, जिससे लाखों रोजगार सृजित हुए हैं।
फिर भी, सिंह के अनुसार, आयात आंकड़े बताते हैं कि चुनौतियां बरकरार हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-चीन व्यापार घाटा करीब 85 अरब डॉलर का रहा, जो अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। लोकदल का यह बयान विपक्षी दलों की रणनीति को दर्शाता है, जहां वे सरकार की विदेश नीति को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
आर्थिक निर्भरता के आंकड़े (एक नजर में)
| विवरण | आंकड़ा (2024-25) |
|---|---|
| भारत-चीन व्यापार घाटा | करीब 85 अरब डॉलर |
| प्रमुख आयात आइटम | मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयों का कच्चा माल, मशीनरी |
| आत्मनिर्भर भारत का प्रभाव | मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में 20% से अधिक वृद्धि, लाखों रोजगार सृजित |
| सीमा पर शहादत | लद्दाख में 20 से अधिक जवानों की शहादत (2020 गालवान) |
ये आंकड़े बताते हैं कि सरकार ने कुछ क्षेत्रों में निर्भरता कम की है, लेकिन चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। लोकदल अध्यक्ष ने कहा कि मजबूत नीतियों से ही देश को विश्व गुरु बनाया जा सकता है।
विपक्ष की रणनीति और सरकार का जवाब
लोकदल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल सरकार की विदेश नीति पर लगातार हमले कर रहे हैं। सिंह ने कहा कि सरकार को चीन से आयात पर सख्त प्रतिबंध लगाने और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत है। वहीं, सरकार ने हमेशा कहा है कि सीमा पर सैन्य तैनाती मजबूत है और ‘मेक इन इंडिया’ से निर्भरता कम हो रही है।
जनता की अपेक्षा और सरकार की चुनौती
सुनील सिंह का बयान केंद्र सरकार की चीन नीति पर एक गंभीर चुनौती पेश करता है। यह बताता है कि आर्थिक स्वतंत्रता और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दे जनता के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि सरकार इन पर मजबूत कदम उठाती है, तो न केवल आर्थिक संप्रभुता मजबूत होगी, बल्कि ‘विश्व गुरु’ का दावा भी साकार होगा। लोकदल जैसे दलों की यह आलोचना सरकार को और सक्रिय बनाने में सहायक सिद्ध हो सकती है। जनता अब सरकार से ठोस जवाब और कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।
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