Wednesday, January 14, 2026
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गो सेवा से लखपति बन गईं झांसी की प्रवेश कुमारी

लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता
-सौर ऊर्जा से हाई क्वॉलिटी चारा बनाकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं
-नए स्टार्टअप से गांवों में शुरू हुई सामूहिक भागीदारी की प्रथा
-सीएम योगी के आत्मनिर्भर विजन को मिल रही रफ्तार

बुंदेलखंड की धरती अब न केवल शौर्य के लिए, बल्कि महिला उद्यमिता के रूप में भी पहचानी जा रही है। झांसी की प्रवेश कुमारी ने चारा बनाने की यूनिट के जरिए वह मुकाम हासिल किया है, जो आज प्रदेश की लाखों महिलाओं के लिए उदाहरण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के सपने को धरातल पर उतारते हुए प्रवेश ने सौर ऊर्जा की मदद से उच्च गुणवत्ता वाले पशु चारे की यूनिट स्थापित कर न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त किया, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा है।

बिजली खर्चा शून्य, मिल रहा सस्ता और पोषक चारा

इस उद्यम की सबसे बड़ी विशेषता इसका ईको-फ्रेंडली होना है। योगी सरकार और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स (DA) के सहयोग से स्थापित यह यूनिट पूरी तरह 18 kW सौर ऊर्जा प्रणाली पर संचालित होती है। इससे बिजली का खर्च शून्य के बराबर है, जिससे चारे की उत्पादन लागत कम आती है। सस्ता और पोषक चारा मिलने से स्थानीय डेयरी किसानों के पशुओं का स्वास्थ्य सुधरा है और दूध उत्पादन क्षमता में भी इजाफा हुआ है।

jhansi woman success solar fodder innovation11

रोजगार और सामूहिक भागीदारी की नई प्रथा

प्रवेश कुमारी आज करीब 25,000 रुपये प्रति माह कमा रही हैं। उनके इस स्टार्टअप ने गांव की सामाजिक संरचना को भी बदला है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ा है। गांव की अन्य महिलाओं को स्थायी आय और आर्थिक स्वतंत्रता मिली है, जिससे वे भी अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

खरीद से लेकर गुणवत्ता नियंत्रण तक की जिम्मेदारी खुद संभालती हैं

यहां आधुनिक मशीनरी और मानकीकृत तकनीकों से पौष्टिक चारा तैयार किया जाता है। साथ ही स्थानीय बाजार की मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। प्रवेश केवल उद्यमी नहीं, बल्कि एक कुशल मैनेजर भी हैं। वे कच्चे माल की खरीद से लेकर वित्तीय खातों, उत्पादन योजना और गुणवत्ता नियंत्रण तक की जिम्मेदारी खुद संभालती हैं। उनकी इस सक्रिय शैली और वित्तीय अनुशासन के कारण उनके ‘गोमाता कैटल फीड’ को पुरस्कृत और सम्मानित किया जा चुका है।

झांसी की प्रवेश कुमारी सौर ऊर्जा से चारा यूनिट चलाती हुईं
प्रवेश कुमारी अपनी सौर ऊर्जा चारा यूनिट में

छोटे प्रयास से बड़ी शुरुआत

शुरुआत एक छोटे प्रयास से हुई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के मार्गदर्शन ने इसे व्यवसाय बना दिया। आज गांव की महिलाएं साथ मिलकर काम कर रही हैं।

प्रवेश कुमारी ने कहा, “यह सिर्फ मेरा उद्यम नहीं, बल्कि पूरे गांव की महिलाओं की सामूहिक ताकत है। मुख्यमंत्री योगी जी के आत्मनिर्भर विजन ने हमें यह रास्ता दिखाया।”

प्रमुख बिंदु एक नजर में

विवरणजानकारी
उद्यमीप्रवेश कुमारी (झांसी)
यूनिट का नामगोमाता कैटल फीड
ऊर्जा स्रोत18 kW सौर ऊर्जा प्रणाली (बिजली खर्च शून्य)
मासिक आयकरीब 25,000 रुपये
सहयोगी संस्थाएंउत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स
मुख्य लाभसस्ता-पोषक चारा, डेयरी किसानों को फायदा, महिलाओं को रोजगार
विशेषताईको-फ्रेंडली, सामूहिक भागीदारी, आत्मनिर्भरता
आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

प्रवेश कुमारी की यह सफलता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के विजन को धरातल पर उतारने की जीती-जागती मिसाल है। सौर ऊर्जा से चलने वाली यह यूनिट न केवल पर्यावरण के लिए अनुकूल है, बल्कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामूहिक भागीदारी की नई प्रथा भी शुरू कर रही है। बुंदेलखंड की यह बेटी अब प्रदेश की लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

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