Tuesday, January 13, 2026
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सिरदर्द हो सकता है ब्रेन ट्यूमर का संकेत: डॉ. आदित्य गुप्ता ने दी चेतावनी, समय पर जांच जरूरी

सोनीपत, राजेश आहूजा/रजनीकांत | वेब वार्ता

आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम के न्यूरोसर्जरी एंड साइबरनाइफ विभाग के डायरेक्टर डॉ. आदित्य गुप्ता ने एक पब्लिक अवेयरनेस सेशन में लोगों को सतर्क किया कि लगातार रहने वाला सिरदर्द कभी-कभी ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि सिरदर्द एक बहुत आम शिकायत है, लेकिन अगर यह दवाओं से ठीक न हो, सुबह के समय ज्यादा तेज हो, धीरे-धीरे बढ़ता जाए या इसके साथ उल्टी, धुंधला दिखना, दौरे पड़ना, हाथ-पैरों में कमजोरी, संतुलन बिगड़ना या बोलने-व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।

सिरदर्द के चेतावनी संकेत – डॉ. आदित्य गुप्ता की सलाह

डॉ. आदित्य गुप्ता ने बताया कि ज्यादातर सिरदर्द स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन, आंखों पर जोर, साइनस या माइग्रेन के कारण होते हैं। लेकिन कुछ सिरदर्द चिंता का कारण बन सकते हैं। उन्होंने कहा, “समय पर जांच बेहद अहम होती है। अगर पर्याप्त दवा या लाइफस्टाइल में बदलाव के बावजूद सिरदर्द बना रहता है, तो डिटेल्ड क्लिनिकल असेसमेंट कराना चाहिए। इसकी शुरुआत न्यूरोलॉजिकल एग्जामिनेशन से होती है, जिसके बाद MRI या CT स्कैन जैसी ब्रेन इमेजिंग जांच की जाती है। इनसे ब्रेन में किसी असामान्य ग्रोथ, प्रेशर या स्ट्रक्चरल समस्या का पता चलता है।”

डॉ. गुप्ता ने जोर दिया कि ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है और शुरुआत में इसके लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं। चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज करना या जांच में देरी करना बीमारी को आगे बढ़ने का मौका देता है, जिससे इलाज ज्यादा जटिल हो जाता है।

साइबरनाइफ रेडियोसर्जरी की बढ़ती भूमिका

डॉ. आदित्य गुप्ता ने बताया कि साइबरनाइफ एक बेहद एडवांस, नॉन-इनवेसिव रेडिएशन टेक्नोलॉजी है, जो बिना ओपन सर्जरी के ट्यूमर पर हाई-डोज और पिनपॉइंट एक्यूरेट रेडिएशन देती है। यह खास तौर पर उन ट्यूमर के लिए फायदेमंद है जो ब्रेन के गहरे हिस्सों में या महत्वपूर्ण स्ट्रक्चर्स के पास होते हैं। इलाज पूरी तरह दर्दरहित है, इसमें न चीरा लगता है और न ही एनेस्थीसिया की जरूरत होती है। मरीज जल्दी अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकता है।

नेविगेशन-गाइडेड और एंडोस्कोपिक न्यूरोसर्जरी पर भी प्रकाश

डॉ. गुप्ता ने नेविगेशन-गाइडेड न्यूरोसर्जरी और एंडोस्कोपिक न्यूरोसर्जरी की भूमिका पर भी बात की। नेविगेशन-गाइडेड सर्जरी में रियल-टाइम इमेजिंग और कंप्यूटर-असिस्टेड गाइडेंस से ट्यूमर को सटीक तरीके से निकाला जाता है, जिससे आसपास के महत्वपूर्ण ब्रेन स्ट्रक्चर्स सुरक्षित रहते हैं। एंडोस्कोपिक न्यूरोसर्जरी छोटे चीरे या ट्रांस नेजल रूट से की जाती है, जो गहराई में स्थित ट्यूमर तक कम टिशू डैमेज के साथ पहुंचने में मदद करती है। ये मिनिमली इनवेसिव तकनीकें सर्जिकल ट्रॉमा, ब्लड लॉस, हॉस्पिटल स्टे और रिकवरी टाइम को काफी कम करती हैं।

डॉक्टरों की अपील: लक्षणों को गंभीरता से लें

सेशन के अंत में डॉक्टरों ने लोगों से अपील की कि वे अपने शरीर के संकेतों को गंभीरता से लें, लंबे समय तक रहने वाले लक्षणों में सेल्फ-मेडिकेशन से बचें और सिरदर्द अगर लगातार या असामान्य हो जाए तो विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह जरूर लें। आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम ने कम्युनिटी एजुकेशन, अर्ली डायग्नोसिस और एडवांस टेक्नोलॉजी के जरिए बेहतर न्यूरोलॉजिकल केयर और मरीजों के बेहतर नतीजों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रमुख चेतावनी संकेत एक नजर में

लक्षणसंभावित गंभीर समस्या
लगातार सिरदर्द जो दवाओं से ठीक न होब्रेन ट्यूमर या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्या
सुबह के समय ज्यादा तेज सिरदर्दइंट्राक्रेनियल प्रेशर बढ़ना
सिरदर्द के साथ उल्टीब्रेन में दबाव या ट्यूमर
धुंधला दिखना, दौरे, कमजोरीएन्सेफलाइटिस या ट्यूमर का असर
संतुलन बिगड़ना, बोलने में बदलावगंभीर ब्रेन समस्या
निष्कर्ष: समय पर जांच से बच सकती है जान

डॉ. आदित्य गुप्ता का यह सेशन लोगों को सिरदर्द को हल्के में न लेने की महत्वपूर्ण सीख देता है। ब्रेन ट्यूमर या अन्य गंभीर समस्याओं में शुरुआती जांच और इलाज से रिकवरी की संभावना बहुत अधिक होती है। अगर सिरदर्द असामान्य या लगातार हो, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें – देरी जानलेवा हो सकती है।

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