Wednesday, January 14, 2026
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कुशीनगर: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी विशाल कुशवाहा को 20 साल सश्रम कारावास और 3.25 लाख जुर्माना, पीड़िता को मिलेगा पूरा प्रतिकर

कुशीनगर, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता

कुशीनगर में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के सनसनीखेज मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट दिनेश कुमार की अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य आरोपी विशाल कुशवाहा को 20 वर्ष का सश्रम कारावास और 2.35 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। सहआरोपी अरमान उर्फ अजहरुद्दीन को 3 वर्ष कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना। कुल 3.25 लाख जुर्माना पीड़िता के नैसर्गिक अभिभावक को प्रतिकर के रूप में दिया जाएगा। अदालत ने टिप्पणी की कि अपरिपक्व उम्र की लड़कियों पर ऐसे अपराध जीवन भर आघात छोड़ते हैं। यह फैसला पीड़िता को न्याय और अपराधियों को सजा देकर समाज में संदेश देता है। योगी सरकार की सख्ती से पॉक्सो मामलों में तेज सुनवाई और कड़ी सजा हो रही है।

मामले का विवरण: बहला-फुसलाकर दुष्कर्म

8 अप्रैल 2024 को 14 वर्षीय पीड़िता को आरोपी विशाल कुशवाहा और अरमान उर्फ अजहरुद्दीन मोटरसाइकिल पर बहला-फुसलाकर ले गए। ढाबे पर पानी में नशीला पदार्थ पिलाकर अचेत किया। फिर विशाल ने जंगल में ले जाकर दुष्कर्म किया। अरमान ने अपहरण में मदद की। पीड़िता की मां ने खड्डा थाने में FIR दर्ज कराई। विवेचना पूरी कर पॉक्सो एक्ट, अपहरण और दुष्कर्म की धाराओं में चार्जशीट दाखिल हुई।

अदालत का फैसला: साक्ष्यों के आधार पर सजा

सुनवाई में अभियोजन पक्ष से विशेष शासकीय अधिवक्ता संजय तिवारी और सुनील कुमार मिश्र ने 6 गवाह पेश किए। अदालत ने पाया कि अरमान ने पीड़िता को विशाल तक पहुंचाया और हट गया। उसे 3 वर्ष कारावास और 10 हजार जुर्माना। विशाल को नशीला पदार्थ पिलाने और दुष्कर्म का दोषी मानकर अधिकतम 20 वर्ष सश्रम कारावास और 2.35 लाख जुर्माना। पूरा जुर्माना पीड़िता के पुनर्वास और चिकित्सा के लिए दिया जाएगा।

प्रमुख तथ्य एक नजर में

विवरणजानकारी
मुख्य आरोपीविशाल कुशवाहा
सजा20 वर्ष सश्रम कारावास + 2.35 लाख जुर्माना
सहआरोपीअरमान उर्फ अजहरुद्दीन
सजा3 वर्ष कारावास + 10 हजार जुर्माना
कुल जुर्माना3.25 लाख (पीड़िता को प्रतिकर)
घटना तिथि8 अप्रैल 2024
अदालतविशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट दिनेश कुमार

यह तालिका फैसले के मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट करती है।

अदालत की टिप्पणी: अपराध का गंभीर प्रभाव

अदालत ने कहा कि अपरिपक्व उम्र की लड़कियों पर ऐसे अपराध जीवन भर आघात छोड़ते हैं। यह टिप्पणी समाज को जागरूक करने और अपराधियों को सख्त सजा की जरूरत को रेखांकित करती है।

निष्कर्ष: पीड़िता को न्याय, अपराधियों को सजा

यह फैसला पीड़िता और परिवार के लिए बड़ी राहत है। पॉक्सो एक्ट के तहत तेज सुनवाई और कड़ी सजा से अपराधियों में दहशत बढ़ रही है। सरकार के प्रयासों से बच्चियों की सुरक्षा मजबूत हो रही है। पूरा जुर्माना पीड़िता को मिलना न्याय की मिसाल है। ऐसे फैसले समाज में सुरक्षा की भावना बढ़ाएंगे।

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