इंदिरा गांधी की वेनेजुएला यात्रा: जब 18 घंटों में बन गए प्यार के पुल, राष्ट्रपति लियोनी ने किया भव्य स्वागत

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता

वेनेजुएला इन दिनों वैश्विक सुर्खियों में है, लेकिन भारत और इस लातिन अमेरिकी देश के संबंधों की जड़ें बहुत गहरी हैं। 58 साल पुराना एक किस्सा आज भी याद किया जाता है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की वेनेजुएला यात्रा ने दोनों देशों के बीच भावनात्मक और राजनयिक पुल बना दिए। 10 अक्टूबर 1968 को सिर्फ 18 घंटे की इस यात्रा में इंदिरा को इतना स्नेह और सम्मान मिला कि वेनेजुएला के लोग नतमस्तक हो गए। यह यात्रा इंदिरा के लंबे लैटिन अमेरिकी दौरे का हिस्सा थी, लेकिन वेनेजुएला में मिला स्वागत सबसे यादगार रहा। आज जब वेनेजुएला संकट में है, यह पुराना किस्सा दोनों देशों के मजबूत संबंधों की याद दिलाता है।

एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत: भावुक पलों की शुरुआत

10 अक्टूबर 1968 को दोपहर 12:45 बजे इंदिरा गांधी का विमान सिमोन बोलीवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरा। एयरपोर्ट लोगों से खचाखच भरा था। वेनेजुएला के राष्ट्रपति राउल लियोनी और उनके कैबिनेट मंत्री स्वागत के लिए खड़े थे। सैन्य बैंड ने पहले भारतीय राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ बजाया, फिर वेनेजुएला का गान। दोनों देशों के झंडे लहरा रहे थे। इंदिरा काले चेक वाली हरी साड़ी में बेहद आकर्षक लग रही थीं। जैसे ही वे सीढ़ियों से उतरीं, भीड़ ने तालियां बजानी शुरू कर दीं।

इंदिरा ने प्रोटोकॉल तोड़कर भीड़ के पास जाकर फूलों के गुलदस्ते स्वीकार किए। एक छोटी भारतीय लड़की एम. राव ने गुलदस्ता भेंट किया, तो इंदिरा ने उसे गले लगा लिया। कार रवाना होने पर भारतीय प्रवासियों ने सहज ही राष्ट्रीय गान गाना शुरू कर दिया। यह पल भावुकता से भरा था।

यात्रा का उद्देश्य: दक्षिण-दक्षिण सहयोग की नींव

यह यात्रा इंदिरा के 23 सितंबर से शुरू हुए लैटिन अमेरिकी दौरे का हिस्सा थी, जिसमें कोलंबिया, ब्राजील, चिली, उरुग्वे और अर्जेंटीना शामिल थे। वेनेजुएला में सिर्फ 18 घंटे रुकना था, लेकिन ये घंटे गर्मजोशी से भरे थे। काराकास में पहला पड़ाव नेशनल पैंथियन था, जहां इंदिरा ने सिमोन बोलीवर की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। बोलीवर ने स्पेनिश उपनिवेशवाद से वेनेजुएला को मुक्त कराया था। यहां भी भीड़ उमड़ी, लोग तालियां बजा रहे थे और ऑटोग्राफ मांग रहे थे।

संयुक्त घोषणा: संबंधों की मजबूती

इंदिरा ने भाषण में कहा, “मैं लैटिन अमेरिका और भारत के बीच प्यार के पुल बनाने आई हूं।” राष्ट्रपति लियोनी ने जवाब में दोनों देशों की समानताएं गिनाईं – गरीबी से लड़ाई, असमानता का मुकाबला और विदेशी हस्तक्षेप से मुक्ति। संयुक्त घोषणापत्र जारी हुआ, जिसमें काराकास में भारतीय दूतावास खोलना, व्यापार, संस्कृति, तकनीक और विज्ञान में सहयोग की घोषणा की गई। विकसित देशों में धन के ध्रुवीकरण पर चिंता जताई गई।

भारत लौटकर इंदिरा का बयान: भावुक अनुभव

भारत लौटकर लोकसभा में इंदिरा ने कहा, “यह भावुक अनुभव था कि भारत को इतना सम्मान और स्नेह मिल रहा है। दक्षिण अमेरिका हमें हमसे ज्यादा जानता है। गांधीजी, टैगोर और नेहरूजी के नाम वहां हर जगह जाने-पहचाने हैं।” उन्होंने दक्षिण अमेरिकी देशों से घनिष्ठ संबंध बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

प्रमुख बिंदु एक नजर में

विवरणजानकारी
यात्रा तिथि10 अक्टूबर 1968
अवधि18 घंटे
स्वागतकर्ताराष्ट्रपति राउल लियोनी
मुख्य पड़ावसिमोन बोलीवर की समाधि
घोषणादूतावास, व्यापार-सांस्कृतिक सहयोग
इंदिरा का बयानप्यार के पुल बनाने आई हूं

यह तालिका यात्रा के मुख्य पहलुओं को स्पष्ट करती है।

पुराने संबंधों की मजबूती

इंदिरा गांधी की वेनेजुएला यात्रा भारत-लैटिन अमेरिका संबंधों की नींव थी। आज वेनेजुएला संकट में है, लेकिन ये पुराने बंधन याद दिलाते हैं कि सहयोग और सम्मान से रिश्ते मजबूत होते हैं। यह किस्सा दक्षिण-दक्षिण सहयोग की मिसाल है, जो आज भी प्रासंगिक है।

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