हरदोई, लक्ष्मीकांत पाठक | वेब वार्ता
UP SIR ड्राफ्ट सूची:
हरदोई जिले की आठों विधानसभाओं में SIR ड्राफ्ट सूची से एक साथ लाखों नामों की कमी ने सभी को चौंका दिया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की ड्राफ्ट सूची में हर विधानसभा से हजारों-हजार मतदाता ‘गायब’ हो गए हैं। क्या यह कृषि प्रधान जिले से महानगरों की ओर हो रहे पलायन का प्रमाण है? या निर्वाचन विभाग की मेहनत से फर्जी और डुप्लीकेट नाम हटने की सफलता? यह गिरावट न केवल आगामी चुनावों के समीकरण बदल सकती है, बल्कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और शुद्धता पर भी नई बहस छेड़ रही है। चुनाव आयोग के इस अभियान से लोकतंत्र मजबूत हो रहा है, जो जनता के हित में सराहनीय कदम है। लेकिन सवाल तो बनते हैं – इन ‘गायब’ वोटरों की असल कहानी क्या है?
विधानसभा-वार गिरावट: आंकड़े खुद बोल रहे हैं
हरदोई की सभी आठ विधानसभाओं में मतदाता संख्या में औसतन 18% की कमी दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा प्रभाव सदर और बिलग्राम-मल्लावां क्षेत्रों में दिखा। निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के अनुसार यह कमी मृतक नाम हटाने, लंबे समय से बाहर रहने वाले मतदाताओं के नाम विलोपन और स्थायी पलायन के कारण आई है। निम्न तालिका में विधानसभा-वार विस्तृत आंकड़े दिए गए हैं, जो स्थिति की गंभीरता को उजागर करते हैं।
| विधानसभा क्षेत्र | पहले मतदाता संख्या | वर्तमान मतदाता संख्या | कमी (मतदाता) | कमी प्रतिशत (लगभग) |
|---|---|---|---|---|
| हरदोई सदर | 4,24,432 | 3,13,441 | 1,10,991 | 26% |
| सवायजपुर | 4,17,380 | 3,51,052 | 66,328 | 16% |
| संडिला | 3,53,165 | 2,81,555 | 71,610 | 20% |
| बिलग्राम-मल्लावां | 3,98,496 | 3,22,239 | 76,257 | 19% |
| बालामऊ (SC) | 3,58,970 | 2,93,503 | 65,467 | 18% |
| गोपामऊ (SC) | 3,55,422 | 2,98,551 | 56,871 | 16% |
| शाहाबाद | 3,68,429 | 3,12,987 | 55,442 | 15% |
| सांडी | 3,43,011 | 2,90,664 | 52,347 | 15% |
यह तालिका दर्शाती है कि कुल मिलाकर जिले में लगभग 5.5 लाख मतदाताओं के नाम कम हुए हैं। सदर क्षेत्र में सबसे ज्यादा 1.10 लाख की गिरावट चौंकाने वाली है।
कमी के प्रमुख कारण: पलायन या शुद्धिकरण?
जानकारों का मानना है कि हरदोई जैसे कृषि प्रधान जिले से दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, नोएडा और मुंबई की ओर रोजगार की तलाश में पलायन पुरानी समस्या है। लंबे समय से बाहर रहने वाले मतदाताओं के नाम अब पैतृक गांवों में शिफ्ट हो रहे हैं या हटाए जा रहे हैं। SIR अभियान में BLO ने घर-घर जाकर सत्यापन किया, जिससे मृतक और डुप्लीकेट नाम हटे। यह चुनाव आयोग और जिला प्रशासन की मेहनत का नतीजा है, जो फर्जी वोटिंग रोककर निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कर रहा है।
लेकिन सवाल उठते हैं – क्या सभी नाम सही कारणों से हटे? क्या पलायन करने वाले युवाओं को सूचना मिली? दावा-आपत्ति की प्रक्रिया में कितने नाम वापस जुड़ेंगे? यह प्रक्रिया जनता को सशक्त बनाती है, क्योंकि शुद्ध सूची से हर वोट की कीमत बढ़ेगी।
राजनीतिक असर: चुनावी समीकरण पर सवाल
यह गिरावट आगामी चुनावों में मतदान प्रतिशत, बूथ प्रबंधन और दलों की रणनीति को प्रभावित करेगी। हरदोई में भाजपा और सपा का सीधा मुकाबला रहा है। शहरी-ग्रामीण मिश्रित क्षेत्रों में कमी से दोनों दलों को नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ेगी। बसपा और अन्य दल भी प्रभावित होंगे। लेकिन सकारात्मक पक्ष यह है कि शुद्ध सूची से वोट की सच्ची ताकत सामने आएगी, जो लोकतंत्र के लिए लाभकारी है।
सरकार और चुनाव आयोग के प्रयास: सराहनीय कदम
योगी सरकार और चुनाव आयोग के संयुक्त प्रयासों से SIR अभियान पूरे प्रदेश में सफलतापूर्वक चल रहा है। BLO की मेहनत, डिजिटल टूल्स और जागरूकता अभियान से सूची शुद्ध हो रही है। हरदोई में भी प्रशासन ने व्यापक सत्यापन किया, जो जनहित में है। दावा-आपत्ति की सुविधा से कोई पात्र मतदाता वंचित नहीं रहेगा।
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निष्कर्ष: शुद्ध लोकतंत्र की नई शुरुआत
हरदोई में मतदाता सूची की यह गिरावट गंभीर सवाल तो खड़े करती है, लेकिन यह लोकतंत्र की शुद्धता और मजबूती का भी प्रमाण है। सरकार के प्रयासों से फर्जी नाम हट रहे हैं, पलायन करने वाले मतदाता अपने मूल स्थान पर जुड़ रहे हैं। यह बदलाव चुनावों को निष्पक्ष बनाएगा और जनता के हित में साबित होगा। अंतिम सूची आने तक सभी को दावा-आपत्ति का उपयोग करना चाहिए, ताकि हर पात्र वोटर की आवाज मजबूत हो। यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश को विकसित और पारदर्शी लोकतंत्र की दिशा में आगे ले जाएगी।








