नई दिल्ली | वेब वार्ता
एमसीडी बजट 2026-27: दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के वित्तीय वर्ष 2025-26 के संशोधित बजट अनुमान एवं 2026-27 के बजट अनुमानों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सोमवार को स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक में सदस्यों ने निगम को वित्तीय घाटे से उबारने, राजस्व बढ़ाने और जनसुविधाओं को मजबूत करने के ठोस सुझाव पेश किए। बैठक की अध्यक्षता स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने की, जिन्होंने सभी सदस्यों को नववर्ष 2026 की शुभकामनाएं देते हुए बैठक की शुरुआत की। यह बैठक एमसीडी की जन-केंद्रित और समावेशी बजट निर्माण प्रक्रिया का उदाहरण है, जो सीमित संसाधनों से अधिकतम जनहित सुनिश्चित करने पर जोर देती है।
बैठक में सदस्यों के सुझाव: घाटे पर नियंत्रण और विकास पर फोकस
बैठक में शिखा भारद्वाज, राफिया, सतपाल, इंद्रजीत सहरावत, रमिंद्र कौर और अंजू अमन डबास सहित सदस्यों ने बजट से जुड़े विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए। चर्चा के दौरान प्रदूषण, आवारा पशुओं और कुत्तों के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप हुए, लेकिन अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कुशलता से स्थिति संभाली और सदस्यों को शांत कराया।
सदस्यों ने निगम की संपत्तियों जैसे स्कूलों, सामुदायिक भवनों और पार्कों के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया, ताकि राजस्व में वृद्धि हो। स्वच्छता व्यवस्था मजबूत करने, आधारभूत ढांचे के विकास, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं के विस्तार, पर्यावरण संरक्षण और वित्तीय अनुशासन जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। अध्यक्ष सत्या शर्मा ने इन सुझावों पर सहमति जताते हुए कहा कि बजट में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त प्रावधान होंगे, लेकिन आम नागरिक पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
प्रमुख सुझावों की झलक
बैठक में रखे गए प्रमुख सुझाव निम्न हैं:
- स्वच्छता और सफाई: व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधन और नवीन तकनीकों का उपयोग।
- नागरिक सुविधाएं: पार्किंग, सड़कें और सार्वजनिक शौचालयों का रखरखाव बढ़ाना।
- स्वास्थ्य और शिक्षा: सेवाओं का विस्तार, नए केंद्र और स्कूलों का अपग्रेडेशन।
- राजस्व वृद्धि: निगम संपत्तियों का अधिकतम उपयोग, नए स्रोतों की खोज।
- पर्यावरण संरक्षण: हरित क्षेत्र बढ़ाने और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय।
- वित्तीय अनुशासन: घाटे को कम करने के लिए व्यय पर नियंत्रण और पारदर्शिता।
ये सुझाव एमसीडी को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने और जनता को बेहतर सेवाएं प्रदान करने में मदद करेंगे।
बजट निर्माण: सहभागी और जन-केंद्रित दृष्टिकोण
अध्यक्ष सत्या शर्मा ने 강조 किया कि बजट निर्माण की प्रक्रिया पूरी तरह सहभागी और समावेशी है। सभी पक्षों के सुझावों को समेकित कर एक संतुलित, व्यावहारिक और जन-केंद्रित बजट तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा, “बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि शहर के विकास का रोडमैप है।” बैठक में यह भी तय हुआ कि शेष सदस्य मंगलवार को अपने सुझाव पेश करेंगे।
एमसीडी लगातार जनसुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत है। हाल के बजटों में स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता पर विशेष जोर दिया गया है, साथ ही कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया। इन सुझावों से निगम का राजस्व बढ़ेगा और घाटा कम होगा, जिससे दिल्लीवासियों को सीधा लाभ मिलेगा। यह प्रक्रिया एमसीडी की पारदर्शी और जन-केंद्रित कार्यशैली को दर्शाती है।
प्रमुख बिंदु एक नजर में
| विषय | प्रमुख सुझाव |
|---|---|
| स्वच्छता व्यवस्था | मजबूती और नवीन संसाधन |
| राजस्व वृद्धि | संपत्तियों का प्रभावी उपयोग |
| स्वास्थ्य-शिक्षा | सेवाओं का विस्तार |
| पर्यावरण संरक्षण | हरित क्षेत्र और प्रदूषण नियंत्रण |
| वित्तीय अनुशासन | घाटा कम करना, पारदर्शिता |
| विकास कार्य | पर्याप्त प्रावधान, बिना अतिरिक्त बोझ |
यह तालिका बैठक के मुख्य फोकस क्षेत्रों को संक्षेप में दर्शाती है।
निष्कर्ष: जनता के हित में मजबूत बजट का निर्माण
एमसीडी की यह बैठक बजट 2026-27 को जन-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सदस्यों के सुझावों से निगम वित्तीय घाटे से उबरेगा और दिल्ली में स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा आधारभूत सुविधाओं में सुधार होगा। अध्यक्ष सत्या शर्मा के कुशल नेतृत्व में तैयार होने वाला यह बजट दिल्लीवासियों के लिए विकास और समृद्धि का नया अध्याय लिखेगा। सभी सुझावों को शामिल कर एमसीडी एक संतुलित और प्रभावी बजट प्रस्तुत करेगी, जो जनता के हितों की रक्षा करते हुए शहर को आगे ले जाएगा।








