वाराणसी, अजय कुमार | वेब वार्ता
काशी की आध्यात्मिक नगरी में पर्यटन सुरक्षा के दावों को एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर पर्यटक ने चुनौती दे दी है। मुंबई की अंकिता गुप्ता ने अपने छिने हुए दो लाख रुपये के आईफोन को ट्रेस कर न केवल अपना फोन बरामद कराया, बल्कि अस्सी घाट पर सक्रिय मोबाइल चोर गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस की उदासीनता के बीच अंकिता के साहस, तकनीकी दक्षता और जिद ने 20 महंगे मोबाइल बरामद कराए। यह घटना पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिंग की पोल खोल रही है।
घटना का पूरा विवरण: पुलिस रात में सुस्त, अंकिता ने सुबह खोला पर्दा
सोमवार सायंकाल अस्सी घाट की भीड़ में अंकिता का आईफोन उचक्के ने छीन लिया। भेलूपुर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई, लेकिन कार्रवाई ठप पड़ गई। अंकिता ने खुद IMEI नंबर से लोकेशन ट्रेस की। रात 2 बजे लोकेशन पर पहुंचीं और डटी रहीं। पत्रकार सुरेश गांधी के हस्तक्षेप के बाद पुलिस पहुंची, लेकिन तलाशी नहीं ली और औपचारिकता पूरी कर लौट गई।
मंगलवार सुबह 5 बजे अंकिता दोबारा लोकेशन (चांदपुर चौराहा, जीटी रोड) पर पहुंचीं। स्थानीय लोगों की मदद से मकान मालिक राजेंद्र पटेल के किराए के कमरे का ताला खुलवाया। चोर फरार था, लेकिन कमरे में 15-20 महंगे मोबाइल पड़े थे। अंकिता ने अपना आईफोन पहचान लिया। पुलिस को सूचना पर मोबाइल कब्जे में लिए गए।
स्थानीय लोगों ने बताया कि अस्सी घाट, दशाश्वमेध और आसपास रोज 4-6 मोबाइल चोरी होते हैं। यह संगठित गिरोह का काम था।
पुलिस पर सवाल: उदासीनता या लापरवाही?
काशी पत्रकार संघ के महामंत्री जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा, “पीड़ित ने सटीक लोकेशन और साक्ष्य दिए, फिर भी रात में कार्रवाई नहीं हुई। इससे अपराधियों का मनोबल बढ़ता है और नागरिक का भरोसा टूटता है।”
पुलिस का कहना है कि बरामद मोबाइल कब्जे में हैं। फरार आरोपी की तलाश जारी है। अन्य पीड़ितों की पहचान की जाएगी।
अंकिता का साहस: सिस्टम को आईना दिखाया
सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकिता ने तकनीक का इस्तेमाल कर गिरोह का भंडाफोड़ किया। यह घटना दिखाती है कि जब सिस्टम सुस्त हो, तो जागरूक नागरिक अपराधियों पर भारी पड़ सकते हैं। अस्सी घाट जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल पर यदि पर्यटकों को खुद लड़ना पड़े, तो यह प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
काशी की छवि सुरक्षित रखने के लिए कानून अपराधियों से तेज और पीड़ितों के साथ खड़ा होना चाहिए।




