कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में धर्म और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। तमिलनाडु के महाबलीपुरम से बिहार के चंपारण तक जा रहा विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग जनपद के बॉर्डर सुकरौली से गुजरा। नेशनल हाईवे पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया। लोग जगह-जगह रोककर फूल मालाओं से स्वागत कर रहे थे।
यह एकल पाषाण (सिंगल स्टोन) से निर्मित शिवलिंग इतना विशाल है कि इसे ले जाने के लिए 111 पहियों वाले विशेष ट्राले का उपयोग किया जा रहा है। चालक दल के सदस्य आलोक सिंह ने बताया कि शिवलिंग की ऊंचाई 33 फीट और गोलाई भी 33 फीट है। इसका वजन लगभग 180 टन है। यह कश्मीर से कन्याकुमारी को जोड़ने वाले देश के सबसे लंबे नेशनल हाईवे के रास्ते ले जाया जा रहा है।
शिवलिंग को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कई लोग हाथ जोड़कर प्रणाम कर रहे थे। यह दृश्य आस्था की अनुपम मिसाल बन गया।
शिवलिंग की विशेषताएं
- निर्माण स्थान: तमिलनाडु का महाबलीपुरम।
- गंतव्य: बिहार का चंपारण।
- वजन: 180 टन।
- ऊंचाई और गोलाई: 33 फीट।
- ट्राला: 111 पहियों वाला विशेष वाहन।
- विशेषता: विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जा रहा है।
यह शिवलिंग बिहार में स्थापित किया जाएगा। रास्ते में कई राज्यों से गुजरते हुए श्रद्धालुओं का उत्साह देखते बन रहा है।
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