ट्रंप ने पुतिन पर कसा शिकंजा: रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकॉइल पर बैन, यूक्रेन युद्ध के बीच दबाव बढ़ा

वाशिंगटन (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। बुधवार को उन्होंने रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों रोसनेफ्ट (Rosneft) और लुकॉइल (Lukoil) पर बैन लगा दिया, जो यूक्रेन युद्ध को लेकर पुतिन पर दबाव बढ़ाने का कदम है। ट्रंप ने कहा, “पुतिन शांति के प्रति गंभीर नहीं हैं। हमने इंतजार किया, अब समय आ गया है।”

यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में रूस पर पहला बड़ा वित्तीय प्रतिबंध है। ट्रेजरी विभाग ने कंपनियों और उनकी सहायक इकाइयों को ब्लैकलिस्ट किया।

प्रतिबंध का विवरण: रूस की तेल अर्थव्यवस्था पर चोट

ट्रेजरी विभाग ने कहा, “रूस की यूक्रेन युद्ध में गंभीर प्रतिबद्धता की कमी के कारण रोसनेफ्ट और लुकॉइल पर प्रतिबंध।” दोनों कंपनियां रूस की 3.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल निर्यात करती हैं। प्रतिबंध अमेरिकी व्यापार को प्रतिबंधित करता है, और आगे विदेशी व्यापारियों पर भी असर हो सकता है।

  • रोसनेफ्ट: सरकारी स्वामित्व वाली, रूस की सबसे बड़ी तेल कंपनी।
  • लुकॉइल: निजी, लेकिन रूस की दूसरी सबसे बड़ी तेल कंपनी।

ब्रिटेन ने पिछले सप्ताह इन्हीं कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया था। EU ने 19वें पैकेज में रूसी LNG आयात पर बैन लगाया।

ट्रंप का बयान: “पुतिन से बातचीत अच्छी, लेकिन आगे नहीं बढ़ती”

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा, “मैं पुतिन से हर बार बात करता हूं, बातचीत अच्छी होती है, लेकिन आगे नहीं बढ़ती।” उन्होंने कहा, “प्रतिबंध शांति प्रक्रिया को बढ़ावा देंगे।”

ट्रंप ने PM मोदी को “शानदार व्यक्ति और अच्छा दोस्त” बताया।

भारत पर असर: रूसी तेल आयात पर दबाव

भारत रूस से 40% तेल आयात करता है, जिसमें रोसनेफ्ट और लुकॉइल का बड़ा हिस्सा है। जनवरी-जुलाई 2025 में भारत ने 1.73 मिलियन बैरल प्रतिदिन रूसी तेल आयात किया। प्रतिबंध से भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

विदेश मंत्रालय ने कहा, “हमारी नीति राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। सस्ती ऊर्जा प्राथमिकता है।”

यूक्रेन युद्ध संदर्भ: ट्रंप का पहला बड़ा कदम

यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में रूस पर पहला बड़ा प्रतिबंध है। यूक्रेन युद्ध के बाद से अमेरिका ने रूस पर सैकड़ों प्रतिबंध लगाए हैं। ट्रंप ने कहा, “हम आगे कार्रवाई करने को तैयार हैं।”

विशेषज्ञ एडवर्ड फिशमैन ने कहा, “यह केवल शुरुआत है। आगे रूस के तेल व्यापारियों पर प्रतिबंध संभव।”

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