हरदोई, लक्ष्मीकांत पाठक (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के बेनीगंज क्षेत्र की सेमरा कला निवासी नीलम तिवारी को न्याय दिलाने में पुलिस प्रशासन को 41 दिनों का लंबा समय लग गया। पीड़िता नीलम का आरोप है कि उनके देवर मोनू तिवारी और देवरानी शिवांशी तिवारी शराब के नशे में गाली-गलौज, पत्थरबाजी, और कांच के बल्ब फेंककर लगातार उन्हें परेशान करते रहे। दिसंबर 2022 से अगस्त 2025 के बीच नीलम ने बेनीगंज कोतवाली में पांच बार शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन हर बार पुलिस ने सुलह-समझौते का प्रयास किया। अंततः एसपी नीरज जादौन के हस्तक्षेप पर मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ।
पीड़िता की शिकायत: लगातार उत्पीड़न
नीलम तिवारी ने बताया कि दिसंबर 2022 से उनके देवर-देवरानी शराब के नशे में घर आकर गाली-गलौज करते थे। वे पत्थर फेंकते और कांच के बल्ब तोड़कर डराते थे। इस उत्पीड़न से नीलम का परिवार दहशत में जी रहा था। उन्होंने पांच बार कोतवाली में शिकायत की, लेकिन पुलिस ने हमेशा समझौते का दबाव डाला। इस बीच, कल्याणमन चौकी में तैनात उपनिरीक्षक रामबली सिंह ने नीलम सहित पांच लोगों का चालान कर दिया, जिससे पीड़िता का भरोसा टूट गया।
9 जुलाई 2025 को देवर-देवरानी ने एक अन्य महिला फूलकली से भी विवाद किया। इस घटना ने नीलम को फिर से आवाज उठाने के लिए मजबूर किया। 5 अगस्त को उन्होंने एसपी नीरज जादौन से मिलकर पूरी घटना बताई।
एसपी के आदेश पर FIR: 41 दिनों का इंतजार
एसपी नीरज जादौन ने मामले को गंभीरता से लिया और सीओ हरियावा अजीत चौहान से जांच कराई। जांच में नीलम के आरोप सही पाए गए। एसपी ने बेनीगंज कोतवाल ओमप्रकाश सरोज को मोनू तिवारी और शिवांशी तिवारी के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। 15 सितंबर 2025 को मु.अ.सं. 515/2025 के तहत आईपीसी धारा 323 (मारपीट) और 506 (धमकी) के तहत FIR दर्ज हुई।
नीलम ने कहा, “41 दिनों तक इंसाफ के लिए दर-दर भटकना पड़ा। एसपी साहब के हस्तक्षेप से अब न्याय मिला।” एसपी जादौन ने कहा, “पीड़ितों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सुलह-समझौते के नाम पर न्याय नहीं रोका जाएगा।”
पृष्ठभूमि: लगातार शिकायतें और पुलिस की लापरवाही
नीलम की पहली शिकायत दिसंबर 2022 में हुई, जब देवर-देवरानी ने शराब के नशे में घर पर हंगामा किया। उसके बाद अप्रैल, जून, जुलाई, और अगस्त 2025 में चार और शिकायतें हुईं। हर बार कोतवाली ने सुलह का प्रयास किया, लेकिन आरोपी नहीं माने। उपनिरीक्षक रामबली सिंह के चालान ने नीलम को और परेशान किया। स्थानीय लोगों ने बताया कि शराबी दंपति का उत्पीड़न पूरे गांव के लिए समस्या था।
निष्कर्ष: न्याय की जीत
41 दिनों की जद्दोजहद के बाद नीलम को न्याय मिला, जो ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाता है। एसपी नीरज जादौन की कार्रवाई से पीड़ितों में विश्वास बढ़ा है। प्रशासन से अपेक्षा है कि ऐसी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई हो ताकि न्याय में देरी न हो।




