नई दिल्ली/काठमांडू, (वेब वार्ता)। नेपाल की नवनिर्वाचित अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने सोमवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए तीन नए मंत्रियों की नियुक्ति की, जिससे उनकी सरकार का मूल ढांचा और मजबूत हुआ। इसके साथ ही, एक ऐतिहासिक कदम में वरिष्ठ अधिवक्ता सबिता भंडारी को नेपाल की पहली महिला अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया। यह नियुक्तियां नेपाल में चल रहे राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तनों के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
मंत्रिमंडल विस्तार: तीन नए मंत्री नियुक्त
सुशीला कार्की ने सोमवार को तीन नए मंत्रियों को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया। इनकी नियुक्ति और शपथ ग्रहण समारोह उसी दिन काठमांडू में शीतल निवास (राष्ट्रपति भवन) में आयोजित हुआ। नियुक्त मंत्रियों की सूची इस प्रकार है:
कुलमान घिसिंग: ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री
कुलमान घिसिंग को नेपाल विद्युत प्राधिकरण (NEA) के पूर्व प्रबंध निदेशक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने नेपाल में वर्षों तक चली बिजली कटौती (लोडशेडिंग) को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने भारत-नेपाल ऊर्जा व्यापार समझौते में भी योगदान दिया, जिसका लक्ष्य अगले दशक में 10,000 मेगावाट बिजली का आदान-प्रदान करना है। घिसिंग को भौतिक अवसंरचना और परिवहन तथा शहरी विकास मंत्रालयों का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।ओम प्रकाश आर्याल: गृह, कानून, न्याय और संसदीय कार्य मंत्री
ओम प्रकाश आर्याल एक मानवाधिकार वकील और काठमांडू के मेयर के सलाहकार हैं। उन्होंने सार्वजनिक हित से जुड़े कई कानूनी मामलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी नियुक्ति को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।रमेश्वर खनाल: वित्त मंत्री
रमेश्वर खनाल एक सम्मानित पूर्व वित्त सचिव हैं, जिन्होंने हाल ही में प्रमुख आर्थिक सुधारों की सिफारिश की थी। उनकी नियुक्ति से नेपाल में आर्थिक स्थिरता और निवेशक विश्वास को बढ़ाने की उम्मीद है, खासकर तब जब देश में 15-24 आयु वर्ग के एक-चौथाई युवा बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं।
ऐतिहासिक नियुक्ति: सबिता भंडारी बनीं पहली महिला अटॉर्नी जनरल
प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की सिफारिश पर वरिष्ठ अधिवक्ता सबिता भंडारी को नेपाल की अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 157(2) के तहत की गई और यह नेपाल के इतिहास में पहली बार है जब कोई महिला इस पद पर नियुक्त हुई है। भंडारी की नियुक्ति को लैंगिक समानता और कानूनी क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका के रूप में देखा जा रहा है।
पृष्ठभूमि: सुशीला कार्की और अंतरिम सरकार
सुशीला कार्की, जो नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं, को 12 सितंबर 2025 को जेन जेड आंदोलन की सिफारिश पर अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद हुई, जो भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों और सोशल मीडिया प्रतिबंध के कारण भारी दबाव में थे। इन प्रदर्शनों में 72 लोगों की मौत हुई थी, और संसद भवन सहित कई सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया था।
कार्की की सरकार का मुख्य लक्ष्य 5 मार्च 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों तक देश में स्थिरता और सुशासन सुनिश्चित करना है। उनके मंत्रिमंडल को भ्रष्टाचार विरोधी छवि और सुधारवादी दृष्टिकोण के लिए चुना गया है, जो युवा प्रदर्शनकारियों की मांगों के अनुरूप है।
मंत्रिमंडल की चुनौतियां
नए मंत्रिमंडल के सामने कई चुनौतियां हैं:
कानून-व्यवस्था की बहाली: प्रदर्शनों के बाद काठमांडू में स्थिति सामान्य हो रही है, लेकिन सेना अभी भी सड़कों पर गश्त कर रही है।
संसद भवन और सरकारी इमारतों का पुनर्निर्माण: प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, और अन्य सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाया था।
भ्रष्टाचार की जांच: जेन जेड प्रदर्शनकारी पूर्व प्रधानमंत्री ओली और उनके मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच की मांग कर रहे हैं।
आर्थिक सुधार: खनाल के नेतृत्व में वित्त मंत्रालय को बेरोजगारी और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों से निपटना होगा।
चुनाव की तैयारी: मार्च 2026 में निष्पक्ष और समयबद्ध चुनाव सुनिश्चित करना कार्की सरकार की प्राथमिकता है।
निष्कर्ष: सुशासन और सुधार की दिशा
सुशीला कार्की का मंत्रिमंडल विस्तार और सबिता भंडारी की अटॉर्नी जनरल के रूप में नियुक्ति नेपाल के लिए एक नई शुरुआत का संकेत देती है। भ्रष्टाचार विरोधी छवि वाले मंत्रियों और ऐतिहासिक लैंगिक समानता के कदम के साथ, यह सरकार जेन जेड आंदोलन की मांगों को पूरा करने और देश को स्थिरता की ओर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।
नेपाल: सबिता भंडारी बनीं पहली महिला अटॉर्नी जनरल, पीएम कार्की की सिफारिश पर नियुक्ति








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