रोहतक में किशोरावस्था सेमिनार: तनाव प्रबंधन और आत्मसम्मान पर जोर, बाल कल्याण परिषद का आयोजन

रोहतक, रजनीकांत चौधरी (वेब वार्ता)। किशोरावस्था को मानव जीवन का बसंत काल बताते हुए हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा स्थापित पठानिया स्कूल में 83वें बाल सलाह, परामर्श व कल्याण केंद्र के तहत आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने तनाव प्रबंधन और आत्मसम्मान के निर्माण पर जोर दिया। मुख्य वक्ता मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी रोहतक एवं राज्य नोडल अधिकारी अनिल मलिक ने कहा कि किशोरावस्था में शारीरिक विकास के साथ-साथ हार्मोनल बदलाव, नए विचार, और सामाजिक रिश्तों का निर्माण होता है, लेकिन तनाव और दबाव से बचाव के लिए सही समझ और निर्णय क्षमता जरूरी है।

किशोरावस्था: बसंत ऋतु की तरह परिवर्तन का समय

सेमिनार का विषय “किशोरावस्था को समझना: तनाव प्रबंधन, आत्मसम्मान का निर्माण” था। अनिल मलिक ने कहा कि बसंत में पेड़-पौधे नए पत्ते और फल देते हैं, उसी तरह किशोरावस्था में मानसिक और भावनात्मक विकास तेज होता है। हार्मोनल बदलाव के कारण भावनाएं उत्तेजित हो सकती हैं, इसलिए सहनशीलता, निर्णयशक्ति, और सही-गलत की समझ विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने किशोरों को सलाह दी कि अपनी उम्र की जरूरतों, सामाजिक परिवेश, और मौजूदा हालात को समझें। यदि तनाव उत्पन्न हो, तो प्रबंधन के तरीके अपनाएं, जैसे:

  • नियमित शारीरिक अभ्यास और संतुलित आहार
  • पर्याप्त नींद और माइंडफुलनेस
  • रुचिकर गतिविधियां जैसे रचनात्मक कार्यों में भागीदारी।
  • खुद पर भरोसा रखना।

मलिक ने जोर दिया कि सलाह देने वाले कई हो सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय विवेक से लें, ताकि आत्मसम्मान कायम रहे। कमजोरियों को स्वीकार कर नैतिक मूल्यों पर आधारित आत्म-जागरूकता विकसित करें। शारीरिक, मानसिक, और भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान दें, सामाजिक मूल्यों का सम्मान करें, और स्पष्ट सीमाएं निर्धारित करें। “ना” कहना भी सीखें।

बाल शोषण से जागरूकता: निरंतर संवाद जरूरी

परामर्शदाता नीरज कुमार ने कहा कि निरंतर संवाद, आपसी भरोसा, प्रेरणा, और प्रोत्साहन किशोरों के लिए महत्वपूर्ण हैं। बाल शोषण से बचने के लिए जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि किशोरों को अपनी समस्याएं खुलकर बताने के लिए प्रोत्साहित करें।

कार्यक्रम की संयुक्त अध्यक्षता करते हुए जिला बाल कल्याण अधिकारी सोमदत्त खुंडिया और प्राचार्या तन्वी पठानिया ने कहा कि मनोवैज्ञानिक परामर्श का महत्व है, लेकिन किशोरों को खुद अपनी समस्या व्यक्त करनी होगी। उन्होंने किशोरों को आत्मविश्वास बढ़ाने और तनाव मुक्ति के लिए सक्रिय रहने की सलाह दी।

कार्यक्रम में उपस्थिति और आयोजन का महत्व

कार्यक्रम में विशेष रूप से कार्यक्रम अधिकारी अनिता हुड्डा, राज्य बाल कल्याण परिषद के आजीवन सदस्य नीरज कुमार, समन्वयक कनिका, आलोक हुड्डा, हिना जावा, इजहार, अनिल आदि शिक्षक उपस्थित रहे। यह सेमिनार किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य और विकास पर केंद्रित था, जो हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की नियमित गतिविधियों का हिस्सा है। ऐसे आयोजन किशोरों को तनाव से निपटने और आत्मसम्मान विकसित करने में मदद करते हैं।

निष्कर्ष: किशोरावस्था में सकारात्मक विकास

यह सेमिनार किशोरों को उनके जीवन के इस महत्वपूर्ण चरण में सही दिशा देने का प्रयास था। विशेषज्ञों की सलाह से किशोर तनाव प्रबंधन और आत्मसम्मान के महत्व को समझ सकेंगे। बाल कल्याण परिषद ने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का आश्वासन दिया, ताकि युवा पीढ़ी स्वस्थ और आत्मविश्वासी बने।

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