एटा, सुनील यादव (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के एटा जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-91 (एनएच-91) पर लगे दिशा सूचक बोर्ड अब अपनी मूल पहचान खो चुके हैं। ये बोर्ड, जो शहर की खूबसूरती और यात्रियों की सुविधा के लिए लगाए गए थे, अब अवैध होर्डिंग्स और विज्ञापनों का अड्डा बन गए हैं। जीटी रोड, रेलवे रोड, आगरा रोड, शिकोहाबाद रोड, और कासगंज मार्ग पर लगे ये बोर्ड अब दिशा दिखाने के बजाय पान मसाला, स्कूल-कॉलेज, और प्राइवेट कंपनियों के विज्ञापन प्रदर्शित कर रहे हैं। सवाल यह है कि यह अवैध धंधा किसकी शह पर चल रहा है, और जिम्मेदार अधिकारी इस पर खामोशी क्यों बनाए हुए हैं?
एटा में NH-91 के दिशा सूचक बोर्ड पर अवैध होर्डिंग्स क्यों? पान मसाला एवं अन्य विज्ञापनों से हादसों का खतरा, प्रशासन कब लेगा एक्शन? #EtahNews #NH91Hoardings #RoadSafety #UPNews #NHAI pic.twitter.com/C3BBseRHQO
— Webvarta News Agency (@webvarta) September 8, 2025
अवैध होर्डिंग्स: प्रशासन की चुप्पी, जनता परेशान
नगर पालिका परिषद और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की जिम्मेदारी है कि ये दिशा सूचक बोर्ड साफ-सुथरे और कार्यशील रहें। लेकिन, हकीकत यह है कि दोनों विभागों की नाकामी साफ नजर आ रही है। लाखों की कमाई करने वाले ये अवैध होर्डिंग्स मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर लग ही नहीं सकते। जिम्मेदार अधिकारियों की हूटर लगी गाड़ियां इन होर्डिंग्स के नीचे से गुजरती हैं, लेकिन उनकी नजरें इन पर नहीं पड़तीं।
स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा:
“ये दिशा सूचक बोर्ड अब विज्ञापन बोर्ड बन गए हैं। बाहर से आने वाले यात्री रास्ता भटक जाते हैं, और हादसों का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन की चुप्पी समझ से परे है।”
हादसों का खतरा और शहर की बदनामी
इन अवैध होर्डिंग्स ने न केवल यात्रियों को गुमराह करना शुरू कर दिया है, बल्कि ये सड़क हादसों का कारण भी बन रहे हैं। वाहन चालक रास्ता ढूंढने के बजाय विज्ञापनों में उलझ जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ गया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 1995 में ही साफ निर्देश दिए थे कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर होर्डिंग्स आंखों की किरकरी और ट्रैफिक खतरा हैं, फिर भी एटा में स्थिति अनियंत्रित है।
सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य विकास शर्मा ने कहा:
“ये होर्डिंग्स न केवल शहर की साख को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि यात्रियों की जान से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।”
किसकी जेब में जा रही है कमाई?
सवाल उठता है कि इन अवैध होर्डिंग्स से होने वाली लाखों की कमाई आखिर किसकी जेब में जा रही है? क्या यह विज्ञापन माफिया और कुछ अधिकारियों की सांठगांठ का नतीजा है? नगर पालिका और एनएचएआई की चुप्पी इस शक को और गहरा करती है। कासगंज मार्ग पर एक स्थानीय व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:
“इन होर्डिंग्स को लगाने के लिए मोटी रकम दी जाती है। बिना ऊपरी संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर यह धंधा नहीं चल सकता।”
प्रशासन की नाकामी और जनता की मांग
जिला प्रशासन की चुप्पी और लापरवाही ने न केवल एटा की छवि को धूमिल किया है, बल्कि जनता में असंतोष को भी जन्म दिया है। आम जनता अब सवाल उठा रही है कि क्या प्रशासन नेताओं के इशारे पर काम कर रहा है, या शहर को विज्ञापन माफिया के हवाले कर दिया गया है? स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि इन अवैध होर्डिंग्स को तत्काल हटाया जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
2018 में पुणे में एक अवैध होर्डिंग के गिरने से चार लोगों की मौत हो गई थी, और 2023 में मुंबई में एक विशाल होर्डिंग के ढहने से 16 लोग मारे गए थे। ऐसे में, एटा में बढ़ते अवैध होर्डिंग्स को नजरअंदाज करना और हादसों को न्योता दे सकता है।
कानूनी स्थिति और आवश्यक कार्रवाई
नगर निगम नियमों और एनएचएआई नीतियों के अनुसार, कोई भी होर्डिंग बिना अनुमति के नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए साइट प्लान, स्ट्रक्चरल इंजीनियर की मंजूरी, और ट्रैफिक पुलिस से एनओसी जरूरी है। लेकिन, एटा में इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिला प्रशासन को चाहिए कि:
तत्काल सर्वे: सभी अवैध होर्डिंग्स की पहचान के लिए सर्वे किया जाए।
कड़ी कार्रवाई: दोषी विज्ञापन एजेंसियों और संपत्ति मालिकों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो।
नियमित निगरानी: भविष्य में अतिक्रमण रोकने के लिए नियमित निरीक्षण और सख्ती।
जनता की पुकार: एटा को बचाएं
एटा की जनता अब प्रशासन से जवाब मांग रही है। शहर की साख, यात्रियों की सुरक्षा, और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने की जरूरत है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ये अवैध होर्डिंग्स न केवल शहर की सुंदरता को नष्ट करेंगे, बल्कि जानलेवा साबित हो सकते हैं।








