Sunday, February 1, 2026
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जीएसटी दरों में बढ़ोतरी: कोल्ड ड्रिंक 22 सितंबर से होंगे महंगे, नई दिल्ली समाचार

नई दिल्ली, (वेब वार्ता) जीएसटी परिषद ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था में व्यापक बदलावों को मंजूरी दे दी है, जिसके परिणामस्वरूप कोका-कोला, पेप्सी जैसे लोकप्रिय शीतल पेय और अन्य गैर-अल्कोहल पेय पदार्थ अब महंगे हो जाएंगे। परिषद ने कार्बोनेटेड पेय पदार्थों पर जीएसटी की दर को 28% से बढ़ाकर 40% करने का फैसला किया है। यह नई दरें 22 सितंबर 2025, यानी नवरात्रि के पहले दिन से लागू होंगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी।

जीएसटी में व्यापक सुधार

निर्मला सीतारमण ने बताया कि जीएसटी परिषद ने दो-स्लैब संरचना को अपनाते हुए मौजूदा चार स्लैब (5%, 12%, 18%, और 28%) को घटाकर केवल 5% और 18% कर दिया है। हालांकि, पाप और विलासिता की वस्तुओं, जैसे पान मसाला, तंबाकू, सिगरेट, और कार्बोनेटेड पेय, के लिए एक विशेष 40% जीएसटी स्लैब बनाया गया है।

“जीएसटी सुधारों का उद्देश्य आम आदमी के लिए आवश्यक वस्तुओं को सस्ता करना और अस्वास्थ्यकर या विलासिता की वस्तुओं पर कर बढ़ाकर राजस्व संतुलन बनाए रखना है,” – निर्मला सीतारमण।

इसके तहत, फलों के रस वाले कार्बोनेटेड पेय और अतिरिक्त चीनी या स्वाद वाले पेय पर भी जीएसटी दर को 28% से बढ़ाकर 40% कर दिया गया है। इससे कोल्ड ड्रिंक और कैफीनयुक्त पेय जैसे उत्पादों की कीमतों में वृद्धि होगी।

कुछ पेय पदार्थों पर राहत

हालांकि, सभी पेय पदार्थों पर कर में वृद्धि नहीं हुई है। फलों के गूदे या फलों के रस आधारित पेय (कार्बोनेटेड पेय को छोड़कर) पर जीएसटी दर को 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इसके अलावा, 20 लीटर की पैकेज्ड पेयजल बोतलें और कॉफी पर भी जीएसटी को 18% से घटाकर 5% किया गया है, जिससे ये उत्पाद सस्ते होंगे।

“कॉफी और पैकेज्ड पेयजल पर कर कम करने से घरेलू उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों को राहत मिलेगी,” – जीएसटी परिषद।

क्यों बढ़ाई गई कोल्ड ड्रिंक पर जीएसटी?

जीएसटी परिषद ने बताया कि कार्बोनेटेड और चीनी युक्त पेय को पाप वस्तुओं (sin goods) की श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि इनका अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। 2025 में किए गए एक मेटा-विश्लेषण और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार, चीनी युक्त पेय का नियमित सेवन टाइप-2 मधुमेह के जोखिम को बढ़ाता है। इसीलिए, इन पेय पदार्थों पर उच्च कर लगाकर उपभोग को हतोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, पहले इन पेय पदार्थों पर 28% जीएसटी के साथ 12% कंपनसेशन सेस लगता था, जिसे अब हटाकर कुल कर को 40% जीएसटी में समाहित कर दिया गया है। इससे कर ढांचा सरल हुआ है और वर्गीकरण संबंधी विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।

उपभोक्ताओं और उद्योग पर प्रभाव

कोल्ड ड्रिंक की कीमतों में वृद्धि से उपभोक्ताओं को अधिक खर्च करना पड़ सकता है, खासकर गर्मियों के मौसम में जब इन पेय पदार्थों की मांग बढ़ती है। एफएमसीजी कंपनियां, जैसे कोका-कोला और पेप्सीको, को बिक्री में कमी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, कॉफी और पैकेज्ड पेयजल जैसे उत्पादों पर कर में कमी से कुछ उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों को राहत मिलेगी।

इंडियन बेवरेज एसोसिएशन (आईबीए) ने फल आधारित कार्बोनेटेड पेय को पाप वस्तु की श्रेणी से हटाने की मांग की थी, लेकिन जीएसटी परिषद ने इस मांग को खारिज कर दिया।

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