Wednesday, January 14, 2026
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उत्तर प्रदेश विधानसभा में फतेहपुर मकबरा तोड़फोड़ मामला, सपा सदस्यों ने वेल में नारेबाजी की

लखनऊ, (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश विधानसभा मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को समाजवादी पार्टी (सपा) ने फतेहपुर में मकबरा में हुई तोड़फोड़ के मामले को लेकर सदन में हंगामा किया। सपा सदस्यों ने आरोप लगाया कि इस घटना में सरकार का हाथ है और इस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन की कार्यवाही में अस्थिरता आई और सपा सदस्य वेल में आकर नारेबाजी करने लगे।

सवालकाल के बाद नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि फतेहपुर में कुछ लोगों ने मकबरे पर कब्जा करने और उसे तोड़ने की योजना बनाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी, लेकिन पुलिस बल अपर्याप्त था। पांडेय ने कहा, “सरकार प्रदेश का माहौल बिगाड़ना चाहती है और आपसी सौहार्द को नुकसान पहुंचा रही है।”

इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार की इस मामले में कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने बताया कि इस मामले में 10 नामजद और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। खन्ना ने कहा, “सरकार पूरी तरह से इस मामले की जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”

इसके बाद सपा के सदस्य वेल में आकर सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अपील पर लगभग 55 मिनट बाद सपा सदस्य अपनी सीट पर वापस लौटे और कार्यवाही फिर से शुरू हुई।

अन्य प्रश्नकाल की झलकियां:

  • सपा विधायक त्रिभुवन दत्त ने मनरेगा मजदूरी में वृद्धि पर सवाल उठाया, जिसके जवाब में राज्य मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने बताया कि यूपी में मजदूरी ₹252 प्रति दिन है, और इसे केंद्र द्वारा तय किया जाता है।

  • सपा सदस्य राकेश कुमार वर्मा ने सिपाहियों के स्थानांतरण और सुविधाओं पर सवाल उठाए, जिसका जवाब संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने दिया।

  • पत्रकारों की सुरक्षा और जलशक्ति से जुड़े सवालों पर भी चर्चा हुई। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने अधूरे कार्यों के पूर्ण होने का आश्वासन दिया।

  • कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले सपा सदस्य पंकज मालिक को खन्ना ने बताया कि सरकार ने 100 दिनों के अंदर सजा दिलाने के मामले में रिकॉर्ड बनाया है।

  • सदन ने कैप्टन शुभांशु शुक्ला और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित को पद्मश्री पुरस्कार मिलने पर बधाई दी।

इस प्रकार, फतेहपुर विवाद ने सदन में राजनीतिक उठापटक को बढ़ा दिया, लेकिन सदन की कार्यवाही अध्यक्ष के संयम से फिर से सुचारू हुई।

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