मुंबई कबूतरखाना विवाद : कबूतरों को दाना खिलाने पर लगी रोक बरकरार
मुंबई/नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। मुंबई में कबूतरखानों में कबूतरों को दाना खिलाने पर लगी रोक को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता आदेश में संशोधन के लिए हाईकोर्ट जा सकता है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) को निर्देश दिया था कि शहर में कबूतरों को दाना डालने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए, क्योंकि यह मुद्दा जन स्वास्थ्य और गंभीर संभावित स्वास्थ्य खतरे से जुड़ा हुआ है। हालांकि, अदालत ने विरासत कबूतरखानों को तोड़े जाने से रोक दिया था, लेकिन पक्षियों को दाना डालने की अनुमति नहीं दी थी।
जैन मुनि का अनशन का ऐलान
जैन मुनि निलेशचंद्र विजय ने इस रोक का विरोध करते हुए 13 अगस्त से अनिश्चितकालीन अनशन करने की घोषणा की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि फैसला धार्मिक आस्थाओं के खिलाफ गया तो समुदाय अदालत के आदेश का पालन नहीं करेगा। मुनि ने कहा — “जैन समाज शांतिप्रिय है, लेकिन जरूरत पड़ी तो धर्म के लिए हथियार भी उठाएगा”।
उनका दावा है कि इस आंदोलन में देशभर से 10 लाख से अधिक जैन समुदाय के लोग शामिल होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह रोक चुनावी राजनीति से प्रेरित है और जैन परंपराओं को निशाना बनाती है।
बीएमसी ने फिर ढका कबूतरखाना
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दादर के कबूतरखाने पर लगाए गए तिरपाल को प्रदर्शनकारियों ने हटा दिया था। इसके बाद बीएमसी ने कबूतरखाने को फिर से प्लास्टिक शीट से ढक दिया। प्रशासन ने इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और दाना खिलाने पर रोक लागू रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है।