आर्मीनिया-अजरबैजान के बीच दशकों पुराना विवाद खत्म, ट्रंप की मौजूदगी में शांति समझौते पर हस्ताक्षर

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वॉशिंगटन, (वेब वार्ता)। अमेरिका की मध्यस्थता में शुक्रवार को लंबे समय से चले आ रहे प्रतिद्वंद्वी देशों — अजरबैजान और आर्मीनिया — ने ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस महत्वपूर्ण मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान व्हाइट हाउस में मौजूद थे।


विवाद और समझौते का सार

अजरबैजान और आर्मीनिया के बीच यह विवाद नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र को लेकर दशकों से चला आ रहा था। यह क्षेत्र भले ही आधिकारिक तौर पर अजरबैजान का हिस्सा है, लेकिन जातीय रूप से यह आर्मेनियाई आबादी वाला इलाका रहा है। 1980 के दशक के अंत में नागोर्नो-काराबाख ने आर्मेनिया के समर्थन से अलगाव की घोषणा कर दी थी।

2023 में अजरबैजान ने इस क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण वापस हासिल कर लिया, जिससे लगभग एक लाख जातीय आर्मेनियाई लोग आर्मेनिया की ओर पलायन कर गए।


ट्रंप का शांति समझौते पर बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अवसर पर कहा, “दोनों देश लगभग 35 वर्षों तक संघर्ष करते रहे हैं, लेकिन अब वे लंबे समय तक दोस्त बने रहेंगे। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने लड़ाई बंद करने, यात्रा, व्यापार और राजनयिक संबंधों को बहाल करने का संकल्प लिया है।”

ट्रंप ने इसे वैश्विक शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता के लिए वरदान साबित होगा।


दोनों देशों के नेताओं की प्रतिक्रिया

अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तारीफ करते हुए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप की मध्यस्थता ने इस जटिल संघर्ष को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दोनों नेताओं ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने का आश्वासन भी दिया, ताकि उनकी इस उपलब्धि को विश्व स्तर पर सम्मानित किया जा सके।


भविष्य की राह

इस शांति समझौते से दोनों देशों के बीच दशकों से चली आ रही शत्रुता को समाप्त करने की उम्मीद है। इसके साथ ही, दोनों राष्ट्र यात्रा, व्यापार और कूटनीतिक संबंधों को फिर से स्थापित कर क्षेत्रीय विकास और समृद्धि की दिशा में कदम बढ़ाएंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता दक्षिण काकेशस क्षेत्र में स्थिरता लाने में एक मील का पत्थर साबित होगा और दोनों देशों के नागरिकों के लिए बेहतर जीवन की संभावनाएं खोलेगा।

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