काकोरी केस का फेयर ट्रायल नहीं हुआ, क्रांतिकारियों को मिली कठोर सजा – न्यायमूर्ति अनिल वर्मा

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काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी समारोह में इतिहास, सिनेमा और संवेदना का अद्भुत संगम के साथ समापन

लखनऊ, (वेब वार्ता)। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग और महुआ डाबर संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी समारोह का समापन ऐतिहासिक और भावनात्मक माहौल में हुआ। इस आयोजन ने न केवल 100 साल पुराने स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली क्षणों को फिर से जीवंत किया, बल्कि युवाओं को अपने अतीत से जुड़ने और देशभक्ति की प्रेरणा लेने का अवसर भी दिया।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति अनिल वर्मा ने कहा कि “काकोरी केस का फेयर ट्रायल नहीं हुआ और क्रांतिकारियों को कठोर सजा दी गई”। उन्होंने अपने स्वतंत्रता सेनानी दादा स्व. मोतीलाल वर्मा को याद करते हुए कहा कि काकोरी कांड जैसे प्रसंग केवल इतिहास की किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि नई पीढ़ी के दिलों में हमेशा जीवित रहें।


विशेषांक और प्रदर्शनी में इतिहास का सजीव रूप

समारोह के दौरान “जनमानस काकोरी शताब्दी वर्ष विशेषांक” का विमोचन किया गया, जिसमें काकोरी केस से जुड़े दस्तावेज, क्रांतिकारियों की जीवनी, गिरफ़्तारियां, मुकदमे की कार्यवाहियां और सज़ाओं का विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है।
इसके अलावा, एक विशेष प्रदर्शनी में दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेज, चित्र, पोस्टर, किताबें और अख़बारों की कटिंग्स प्रदर्शित की गईं, जिसने लोगों को आज़ादी के लिए दी गई कुर्बानियों का प्रत्यक्ष अनुभव कराया।


अयोध्या फिल्म महोत्सव का सांस्कृतिक रंग

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शताब्दी समारोह के अंतर्गत आयोजित 19वें अयोध्या फिल्म महोत्सव में देश-विदेश की चुनिंदा फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई।
मुख्य विजेता फ़िल्मों में शामिल थीं –

  • सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म: The Fifth Age

  • सर्वश्रेष्ठ भारतीय फीचर फिल्म: Oka Manchi Prema Katha

  • सर्वश्रेष्ठ महिला सशक्तिकरण फिल्म: Ladegi Meghaa

  • सर्वश्रेष्ठ शॉर्ट फिल्म: Knot

  • सर्वश्रेष्ठ सामाजिक संदेश वाली फिल्म: Ansuni Cheekhein

  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री: सीमा बिस्वास

  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता: यशपाल शर्मा

  • सर्वश्रेष्ठ निर्देशक (जूरी): राम कमल मुखर्जी


कार्यक्रम में शामिल प्रमुख हस्तियां

पूर्व सूचना आयुक्त किरणबाला चौधरी, शचीन्द्र नाथ बक्शी की पौत्रि मीता बक्शी, प्रो. एस. विक्टर बाबू, प्रो. वी.एम. रवि कुमार, डॉ. शाह आलम राना, प्रो. मोहनदास, डॉ. सुदर्शन चक्रधारी, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. आनंद सिंह, डॉ. सिद्धार्थ शंकर राय, अरविन्द सिंह राणा, शाह अयाज़ सिद्दीकी, एस. मजूमदार, जी.पी. सिन्हा, प्रखर श्रीवास्तव सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।


समारोह की विशेषता

यह आयोजन केवल एक स्मरणोत्सव नहीं रहा, बल्कि इतिहास, सिनेमा, संवाद, शिक्षा और संवेदना का ऐसा मंच बन गया जिसने काकोरी कांड के शताब्दी वर्ष को नई पीढ़ी के लिए एक प्रेरक अध्याय बना दिया।

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