Sunday, February 15, 2026
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नोएडा में युवक की मृत मां के खाते में आए करीब 1 अरब 13 लाख 56 हजार करोड़ रुपए, आयकर विभाग ने अकाउंट किया फ्रीज़

उत्तर प्रदेश के नोएडा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 20 वर्षीय युवक के मृत मां के बैंक खाते में 37 अंकों की भारी-भरकम रकम क्रेडिट हो गई। यह रकम किसी की भी सोच से परे है- ₹10,01,35,60,00,00,00,00,00,01,00,23,56,00,00,00,00,299। यानी लगभग एक अनडेसिलियन रुपये। अनडेसिलियन उस संख्या को कहते हैं, जिसमें 1 बाद 36 शून्य होते हैं

नोएडा, 05 अगस्त (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के नोएडा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 20 वर्षीय युवक को उस समय झटका लगा जब उसे पता चला कि उसकी मृत मां के कोटक महिंद्रा बैंक खाते में ₹10,01,35,60,00,00,00,00,00,00,01,00,23,56,00,00,00,00,299 (करीब 10 विगिंटल रुपये) की धनराशि स्थानांतरित हुई है। यह राशि न सिर्फ अविश्वसनीय है, बल्कि भारत ही नहीं, दुनिया के कुल GDP से भी कहीं अधिक है।

इस घटना ने बैंकिंग सिस्टम, डेटा इंटिग्रिटी और फाइनेंशियल मॉनिटरिंग को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की जानकारी मिलते ही आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हरकत में आ गए और त्वरित कार्रवाई करते हुए खाते को फ्रीज़ कर दिया है।


कैसे हुआ खुलासा?

नोएडा निवासी अर्पित (बदला हुआ नाम) नामक युवक की मां का निधन लगभग एक वर्ष पहले हुआ था। मां के निधन के बाद उनका कोटक महिंद्रा बैंक में चालू बचत खाता निष्क्रिय पड़ा था। हाल ही में जब युवक ने कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में बैंक से संपर्क कर अकाउंट ट्रांसफर या क्लोज करने की प्रक्रिया शुरू की, तब उसे पता चला कि खाते में असाधारण रकम दर्ज हो चुकी है।

बैंक स्टेटमेंट में दर्ज रकम देख युवक हैरान और भयभीत हो गया। इस राशि को देख बैंक अधिकारियों ने तुरंत मामले की रिपोर्ट संबंधित एजेंसियों को दी।


बैंक और आयकर विभाग की त्वरित कार्रवाई

कोटक महिंद्रा बैंक के प्रवक्ता ने पुष्टि करते हुए कहा,

“यह तकनीकी या सिस्टम जनरेटेड गलती हो सकती है। बैंक किसी भी प्रकार की अवैध या संदिग्ध राशि को लेकर पूरी तरह सतर्क है। हमने संबंधित खाता फ्रीज़ कर दिया है और इसकी सूचना आयकर विभाग एवं वित्तीय खुफिया इकाइयों को दे दी है।”

आयकर विभाग की टीम ने यह मामला अपने कब्जे में लेते हुए जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक अनुमान है कि यह किसी बग या साइबर गड़बड़ी का मामला हो सकता है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि किसी भी मनी लॉन्ड्रिंग या फर्जी ट्रांजैक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


कानूनी दृष्टिकोण से क्या है स्थिति?

वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की “असंभव राशि” तकनीकी त्रुटि के अलावा और कुछ नहीं हो सकती। किसी भी सामान्य या कॉर्पोरेट खाते में इतनी बड़ी धनराशि का स्थानांतरण न तो मौजूदा फाइनेंशियल सिस्टम में संभव है और न ही किसी एक लेन-देन में।

सीए अजय अग्रवाल ने बताया कि,

“यह राशि भारतीय रिज़र्व बैंक की कुल आपूर्ति से भी कई लाख गुणा अधिक है। यह संभवतः डेटाबेस करप्शन या बैकएंड कोडिंग एरर का नतीजा है।”


क्या कहता है युवक?

20 वर्षीय युवक ने मीडिया से बात करते हुए कहा,

“पहले तो मुझे लगा किसी ने मेरे साथ फ्रॉड किया है, फिर समझ नहीं आया इतना पैसा आया कहां से। मैंने तुरंत बैंक और पुलिस को इसकी जानकारी दी।”

वह इस मामले में खुद को पूरी तरह निर्दोष और अनजान बता रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे भी प्रोटेक्शन और जांच में सहयोग देने को कहा गया है।


क्या है आगे की कार्रवाई?

  • बैंक की साइबर और आईटी टीम डेटा लॉग और ट्रांजैक्शन रूट की जांच कर रही है।

  • आयकर विभाग और ईडी द्वारा फॉरेंसिक ऑडिट शुरू किया जा चुका है।

  • मनी ट्रेल, ट्रांजैक्शन ID और स्रोत की पड़ताल की जा रही है।

  • युवक और उसके परिवार की वित्तीय पृष्ठभूमि की जांच भी की जा रही है।


बड़े सवाल जो इस घटना ने खड़े किए:

  1. क्या यह एक साइबर हैकिंग प्रयास था जो सिस्टम में नहीं दिख सका?

  2. क्या किसी ने जानबूझकर डमी अमाउंट डालकर पैसे की वैधता की जांच की कोशिश की?

  3. क्या मौजूदा बैंकिंग सिस्टम इतने विनाशकारी बग्स से ग्रस्त हो सकते हैं?

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