देवरिया, ममता तिवारी (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के देवरिया से भाजपा सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा है कि संस्कृत न केवल सभी भाषाओं की जननी है, बल्कि यह एक वैज्ञानिक भाषा भी है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे संस्कृत, संस्कृति और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के उत्थान के लिए आगे आएं।
रविवार को आयोजित संस्कृत विकास परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए श्री त्रिपाठी ने कहा कि भारत के वैभवशाली सनातन धर्म, सांस्कृतिक परंपराएं और संस्कृत भाषा मिलकर एक विकसित राष्ट्र की नींव रख सकते हैं। इसके लिए युवा पीढ़ी और बुद्धिजीवी वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
संस्कृत: वैज्ञानिक भाषा भी
सांसद शशांक मणि ने कहा कि संस्कृत भाषा का उपयोग विज्ञान और गणनाओं में भी किया जाता रहा है। इसकी शुद्धता और व्याकरणिक सटीकता इसे वैज्ञानिक भाषा बनाती है। उन्होंने कहा कि
“संस्कृत का दायरा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, इसे आधुनिक संदर्भों से जोड़ना होगा।”
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का आह्वान
उन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को केवल एक वैचारिक अवधारणा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि अगर लोक परंपराओं का संरक्षण और प्रचार-प्रसार सही ढंग से किया गया, तो यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त करेगा।