बिलासपुर/रायपुर, (वेब वार्ता)। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने शनिवार को एक बहुचर्चित प्रकरण में केरल की दो कैथोलिक ननों और एक अन्य व्यक्ति को सशर्त जमानत दे दी। तीनों को मानव तस्करी और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में 25 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था।
👩🦰 कौन हैं आरोपी?
प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस, केरल के अलप्पुझा जिले की निवासी हैं और सिरो-मालाबार चर्च के अंतर्गत असीसी सिस्टर्स ऑफ मैरी इमैक्युलेट संस्था से जुड़ी हुई हैं।
तीसरे व्यक्ति का नाम सुखमन मंडावी है, जो छत्तीसगढ़ का रहने वाला है।
तीनों को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वे नारायणपुर जिले की तीन आदिवासी लड़कियों को उत्तर प्रदेश के आगरा ले जा रहे थे। स्थानीय बजरंग दल के पदाधिकारी की शिकायत पर जीआरपी ने यह कार्रवाई की थी।
⚖️ कोर्ट का आदेश: सशर्त जमानत
शुक्रवार को सुनवाई पूरी होने के बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी की अदालत ने शनिवार को फैसला सुनाया।
तीनों को ₹50,000 के निजी मुचलके पर रिहा किया गया।
साथ ही, पासपोर्ट जमा करने और जांच में सहयोग देने का निर्देश दिया गया है।
इससे पहले सेशन कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र के अभाव में याचिका खारिज कर दी थी। बाद में मामला एनआईए कोर्ट में पहुंचा जहाँ से राहत मिली।
🧑⚖️ अभियोजन बनाम बचाव
बचाव पक्ष के वकील अमृतो दास ने बताया कि अभियोजन ने हिरासत की मांग नहीं की थी, और तीनों लड़कियों को उनके घर भेज दिया गया था।
यह तर्क जमानत के पक्ष में निर्णायक रहा।
🗨️ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बयान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस मामले को “राजनीतिक रंग देने की कोशिश” बताकर निंदा की और कहा:
“यह मामला अदालत में विचाराधीन है। कानून अपना काम करेगा। यह महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है, जिसे कुछ लोग राजनीतिक रूप देने में लगे हैं।”
सीएम के मुताबिक लड़कियों को नर्सिंग ट्रेनिंग और नौकरी का लालच दिया गया था।
🔥 विपक्ष ने साधा निशाना
यह मामला केरल से लेकर संसद तक गूंजा:
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा:
“अब भाजपा, आरएसएस और बजरंग दल का असली चेहरा सामने आ गया है। यह एक झूठा और विभाजनकारी एजेंडा था।”
कांग्रेस विधायक रोजी जॉन ने कहा:
“दोनों नन निर्दोष थीं। नौ दिन बाद उन्हें न्याय मिला।”
वृंदा करात (सीपीआई-एम) भी जेल जाकर ननों से मिलीं और गिरफ्तारी को “असंवैधानिक और असंवेदनशील” बताया।
🏥 पृष्ठभूमि: आगरा की ओर यात्रा
गिरफ्तार नन आगरा के एक अस्पताल में कार्यरत थीं। उनका दावा है कि वे लड़कियों को नर्सिंग प्रशिक्षण और रोज़गार के लिए ले जा रही थीं, जबकि बजरंग दल का आरोप है कि यह धर्मांतरण और मानव तस्करी का मामला है।
🔚 निष्कर्ष
एनआईए कोर्ट के फैसले ने दोनों पक्षों को राहत और चिंता दोनों दी है। जहां अभियुक्तों को अस्थायी राहत मिली, वहीं जांच और सुनवाई अभी जारी है।
यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, राजनीतिक ध्रुवीकरण और कानूनी पारदर्शिता के सवालों को फिर सतह पर ले आया है।







