Monday, February 16, 2026
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थाइलैंड ने कंबोडिया में कुछ ठिकानों पर बमबारी की

बैंकॉक, (वेब वार्ता)। थाईलैंड और कंबोडिया के बॉर्डर पर गुरुवार सुबह शुरू हुई झड़पों के बाद दोनों देशों में जंग जैसे हालात बनते जा रहे हैं। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर गोलीबारी का आरोप लगाया है। सीमा पर सैनिकों की गोलीबारी के बाद थाईलैंड ने फाइटर जेट एफ-16 की तैनाती कर दी है और हवाई हमले भी किए हैं। थाईलैंड की बमबारी से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इससे भारत के पड़ोस में एक भीषण जंग छिड़ने का अंदेशा पैदा हो गया है। दोनों देशों में इस लड़ाई की वजह दशकों पुराना सीमा विवाद है।

कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि थाईलैंड ने उसके क्षेत्र में हवाई हमले किए हैं। कंबोडिया ने बताया है कि थाईलैंड की सेना ने एफ-16 लड़ाकू विमानों से वाट काऊ किरी स्वरक पैगोडा की ओर जाने वाली सड़क पर बम गिराए गए हैं। थाईलैंड ने छह एफ-16 विमान लड़ाई में उतारने और कंबोडिया के दो क्षेत्रीय सैन्य मुख्यालयों को नष्ट करने का दावा किया है। इससे भड़के कंबोडिया ने कहा है कि वह इन हमलों का जवाब देगा।

दोनों देश कैसे बने दुश्मन

कंबोडिया और थाईलैंड पड़ोसी हैं लेकिन आज ये दक्षिण-पूर्व एशियाई पड़ोसी देश जंग के मुहाने पर हैं। मौजूदा तनाव की शुरुआत 28 मई को हुई, जब झड़प में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत हो गई। यह घटना एमराल्ड ट्रायंगल नामक क्षेत्र में हुई, जो थाईलैंड, कंबोडिया और लाओस की साझा सीमा है। यह क्षेत्र लगातार विवादित बना हुआ है क्योंकि थाईलैंड और कंबोडिया दोनों क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर अपना दावा करते हैं। 29 मई के बाद से दोनों देश एक दूसरे पर हमलावर हैं।

कंबोडिया और थाईलैंड 817 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। फ्रांस का 1863 से 1953 तक कंबोडिया पर कब्जा रहा। ऐसे में फ्रांस ने ज्यादातर बॉर्डर तय किया। इसका आधार 1907 के थाईलैंड और कंबोडिया के प्राकृतिक जलविभाजक रेखा (वाटरशेड लाइन) के समझौते पर आधारित था। थाईलैंड ने बाद के वर्षों में इस नक्शे पर यह कहते हुए एतराज जताया कि डांगरेक पर्वत पर स्थित 11वीं शताब्दी के प्रीह विहियर मंदिर को कंबोडिया में रखा गया है। नक्शे पर मतभेदों के चलते सीमा के आसपास के क्षेत्र ऐसे बन गए, जिन पर दोनों देश अपना दावा करते हैं।

इंटरनेशल कोर्ट में मुकदमा

कंबोडिया ने 1959 में मंदिर विवाद को लेकर थाईलैंड को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में घसीटा और 1962 में न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रीह विहियर कंबोडियाई क्षेत्र में आता है। थाईलैंड ने उस समय इसे स्वीकार किया लेकिन तर्क दिया कि आसपास की सीमाएं विवादित हैं। इससे सीमा रेखाएं और जटिल हो गईं। ये तनाव 2008 में बढ़ा, जब कंबोडिया ने प्रीह विहियर मंदिर के लिए यूनेस्को विश्व-धरोहर का दर्जा मांगा। जुलाई में मंदिर को मान्यता मिलने के बाद सीमा क्षेत्र के पास कंबोडियाई और थाई सैनिकों के बीच सैन्य झड़पें शुरू हो गईं।

ये झड़पें लगातार चलती रहीं और 2011 में चरम पर पहुंच गईं। इस साल 36,000 लोग विस्थापित हुए। दोनों देशों में सैन्य संघर्ष रुका लेकिन अंदर-अंदर एक तनाव चलता रहा। थाईलैंड ने सीमा विवादों को सुलझाने में मदद के लिए एक संयुक्त सीमा आयोग (जेबीसी) की स्थापना भी की लेकिन इसकी बैठकों से कोई महत्वपूर्ण नतीजा नहीं निकला है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के मुकदमों और कई झड़पों के बाद भी चीजें जस की तस हैं। हालिया हफ्तों में इन्होंने काफी खराब रूप से लिया है।

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