गोरखपुर में 30 मार्च से शुरू हो रहा है तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय आयुर्वेद एवं बायोमेडिकल विज्ञान में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग विषय मंथन

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गोरखपुर, ममता तिवारी (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के तहत संचालित संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संकाय के तत्वावधान में सोसाइटी फॉर बायोटेक्नोलॉजिस्ट इंडिया (एसबीटीआई) के सहयोग से 30 मार्च से 1 अप्रैल तक संयोजित तीन दिवसीय अंतराष्ट्रीय सम्मेलन में आयुर्वेद एवं बायोमेडिकल विज्ञान में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग विषय पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अन्वेषकीय दृष्टि से मंथन करेंगे।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की जानकारी साझा करते हुए संयोजक और अधिष्ठाता संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संकाय प्रो (डॉ) सुनील कुमार सिंह ने बताया कि 30 मार्च को उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो बलराम भार्गव होंगे।सम्मेलन की अध्यक्षता यूपी के मुख्यमंत्री के शिक्षा सलाहकार और यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो (डॉ) धीरेंद्र पाल सिंह करेंगे। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलपति प्रो (डॉ) सुरिंदर सिंह का भी पाथेय प्राप्त होगा।
तीन दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं जो आयुर्वेद एवं बायोमेडिकल विज्ञान में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग विषय पर नवीनतम अनुसंधान और प्रगति पर चर्चा करेंगे।
विभिन्न तकनीकी सत्रों में देश विदेश के ख्यातिलब्ध वैज्ञानिकों के समक्ष शोधार्थी और युवा वैज्ञानिको को शोध प्रस्तुति, युवा वैज्ञानिक पुरस्कार प्रस्तुति, मौखिक प्रस्तुति एपोस्टर प्रस्तुति में अन्वेषकीय ज्ञानार्जन के साथ विज्ञान और आयुर्वेद के बहुमूल्य योगदान और समृद्ध शैक्षणिक आदान-प्रदान से सम्मेलन समृद्ध होगा।
आयोजन समिति के सचिव डॉ अमित दुबे और डॉ अनुपमा ओझा ने बताया कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर में देश-विदेश के ख्यातिलब्ध वैज्ञानिकों को आध्यात्म, आयुर्वेद और विज्ञान के अद्भुत संयोग से युवा शोधार्थियों और विद्यार्थियों को आपस में साक्षात्कार करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कुल 210 शोध आलेख प्राप्त हुए हैं जिन्हें शोध प्रकाशन समिति ने अन्वेषकीय वैज्ञानिक दृष्टि से समृद्ध आलेखों का गहनता से अध्ययन कर शोध ग्रन्थ का स्वरूप दे दिया है। इसका उद्घाटन सत्र में सम्मानित अतिथियों के कर कमलों से लोकार्पण कराया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के विविध राज्यों के विशेषज्ञों के साथ इजरायल, नेपाल, श्रीलंका, कोरिया, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी आदि से भी विषय विशेषज्ञ प्रतिभाग कर रहे हैं।

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