Wednesday, February 11, 2026
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सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने ‘टेककृति-2025’ का किया उद्घाटन

नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने भविष्य के युद्धों की उभरती चुनौतियों, विशेष रूप से साइबर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम और संज्ञानात्मक क्षेत्रों में तैयारी पर अपने दृष्टिकोण साझा किए। वह आईआईटी कानपुर में आयोजित एक तकनीक संबंधी कार्यक्रम में बोल रहे थे।

जनरल अनिल चौहान ने अपने संबोधन में भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीकी प्रगति, रणनीतिक सोच और अनुकूलनशीलता को अपनाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने अनुशासन और उदारता, साहस और बलिदान के मूल्यों का उल्‍लेख करते हुए विद्वानों, छात्रों और एनसीसी कैडेट्स सहित युवा दर्शकों को प्रेरित किया।

आईआईटी कानपुर में एशिया के सबसे बड़े अंतर-महाविद्यालय तकनीकी और उद्यमिता महोत्सव ‘टेककृति – 2025’ का आयोजन किया गया है। इसका उद्घाटन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने किया। यहां फायरसाइड चैट में सीडीएस ने भारतीय सशस्त्र बलों में उन्नति और आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर जानकारी देते हुए भविष्य के युद्धों की उभरती चुनौतियों, विशेष रूप से साइबर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम और संज्ञानात्मक क्षेत्रों में तैयारी पर अपना दृष्टिकोण बताया।

‘टेककृति – 2025’ में सीडीएस के उत्साहवर्धक शब्दों ने छात्रों को रक्षा और प्रौद्योगिकी में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। उद्घाटन समारोह में एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, एओसी-इन-सी, सेंट्रल एयर कमांड और प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल, निदेशक आईआईटी कानपुर सहित कई विशिष्ट अतिथि शामिल हुए।

इस वर्ष का विषय ‘पंता रेई’ (सबकुछ बहता है), प्रौद्योगिकी और नवाचार के निरंतर विकास का उल्‍लेख करता है। ‘टेककृति – 2025’ प्रौद्योगिकी, उद्यमशीलता और सहयोग का एक उल्लेखनीय उत्सव होने की वचनबद्धता निभाते हुए खोज और नवाचार की सीमाओं को आगे बढ़ाता है।

‘टेककृति – 2025’ की एक प्रमुख विशेषता रक्षा प्रदर्शनी में अत्याधुनिक रक्षा तकनीक को प्रदर्शित करना था। इसके लिए यहां एक विशेष खंड ‘रक्षाकृति’ था। सशस्त्र बलों, शिक्षाविदों और रक्षा उद्योग के बीच सामंजस्‍य को और आगे बढ़ाते हुए जनरल अनिल चौहान ने उभरते प्रौद्योगिकीविदों से वार्तालाप किया।

इस कार्यक्रम ने शोधकर्ताओं को उद्योग जगत के प्रमुखों से जोड़ने के लिए एक शानदार मंच प्रदान किया, जिससे स्वायत्त ड्रोन जैसी उन्नत तकनीकों के विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और आयात निर्भरता को कम करने में सहायता मिली।

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