प्रौद्योगिकी में हो रहे बदलावों को मौजूदा परियोजनाओं में शामिल करें वैज्ञानिक: राजनाथ

नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों से समर्पण और ईमानदारी के साथ काम करने और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों को मौजूदा परियोजनाओं में शामिल करने का आह्वान किया है।

श्री सिंह ने शुक्रवार को हैदराबाद में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों के डिजाइन और विकास के लिए प्रमुख केंद्र डॉ एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल परिसर का दौरा किया।

रक्षा मंत्री ने वैज्ञानिकों से बातचीत करते हुए देश की रक्षा क्षमताओं में उनके अद्वितीय योगदान के लिए उनकी सराहना की और विश्वास जताया कि ठोस प्रयासों से भारत 2027 तक शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में आ जायेगा। उन्होंने वैज्ञानिकों से समर्पण और ईमानदारी के साथ काम करते हुए अपनी परियोजनाओं में तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी परिवर्तन को शामिल करने का आह्वान किया। उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को भी श्रद्धांजलि दी।

श्री सिंह को अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई) द्वारा किए जा रहे मिसाइल प्रौद्योगिकियों और संबंधित कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी गई। इस अवसर पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव डॉ समीर वी कामत और आरसीआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी मौजूद थे।

रक्षा मंत्री ने लंबी दूरी की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल परियोजना की टीम को भी सम्मानित किया, जिसका सफल उड़ान परीक्षण पिछले वर्ष नवंबर में हुआ था। सफल परीक्षण ने भारत को हाइपरसोनिक मिसाइल क्षमताओं वाले चुनिंदा देशों के समूह में स्थान दिलाया। उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से मिसाइल विकास में पूर्व राष्ट्रपति के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। डा कामत ने महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के विकास और भारत को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने के साथ-साथ प्रौद्योगिकी में अग्रणी बनाने के लिए संगठन की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा , “डीआरडीओ प्रधानमंत्री के इस दृष्टिकोण को साकार करने का प्रयास करेगा कि रक्षा प्रणालियाँ भारत में बनाई जाएँ और दुनिया के लिए बनाई जाएँ।”

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