वाराणसी में बाढ़ राहत: एनडीआरएफ की टीमें सतर्क, समाजसेवी संगठनों ने बढ़ाया हाथ

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वाराणसी, (वेब वार्ता)। गंगा नदी के जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि ने वाराणसी के निचले इलाकों — नक्की घाट, कोनिया, शास्त्री ब्रिज, और डोमरी — को बुरी तरह प्रभावित किया है। इन क्षेत्रों में जलभराव से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सड़कें डूबी हुई हैं, बिजली और पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी है, वहीं संचार और परिवहन सेवाओं पर भी गहरा असर पड़ा है।

एनडीआरएफ का सक्रिय मोर्चा

बाढ़ की इस चुनौती से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 11वीं वाहिनी, वाराणसी, पूरी तत्परता और समर्पण के साथ राहत कार्यों में जुटी है। उप महानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के नेतृत्व में टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में सक्रिय हैं।

एनडीआरएफ ने स्थानीय प्रशासन और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ मिलकर समन्वित रूप से राहत अभियान को अंजाम देना शुरू कर दिया है। इन अभियानों के दौरान, प्रभावित परिवारों को भोजन, पेयजल, कपड़े, और अन्य आवश्यक वस्तुएं मुहैया कराई जा रही हैं।

🧺 सामाजिक संगठनों की भागीदारी

इस आपदा की घड़ी में समाजसेवी संगठनों की भागीदारी उल्लेखनीय रही है।

  • रोटरी क्लब वाराणसी रॉयल्स और

  • सेंट जॉन्स महरौली एलुमनाई एसोसिएशन

ने बाढ़ राहत कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई है। रोटरी क्लब के अध्यक्ष वरुण मुद्रा और रोटेरियन पुष्प अग्रवाल ने खुद राहत सामग्री वितरण में भाग लेकर सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश की।

📢 एनडीआरएफ का संकल्प

मनोज कुमार शर्मा, उप महानिरीक्षक, एनडीआरएफ ने कहा:

“हमारा मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में नागरिकों को त्वरित राहत और सुरक्षा देना है। हमारी टीमें पूरी तरह सतर्क हैं। यदि आवश्यकता पड़ी, तो अतिरिक्त संसाधनों की तैनाती के लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं।”

🌊 स्थिति की निरंतर निगरानी

स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें मिलकर जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने, आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं देने, और बच्चों-बुजुर्गों की विशेष देखरेख सुनिश्चित करने जैसे कार्यों पर जोर दिया जा रहा है।

🙌 उम्मीद की किरण

बाढ़ की विभीषिका में एनडीआरएफ की तत्परता और सामाजिक संगठनों की भागीदारी आम जन के लिए राहत और विश्वास का प्रतीक बनी है। राहत कार्यों में दिन-रात जुटे कर्मियों और संगठनों की यह मुहिम प्रभावित परिवारों के लिए आशा की नई किरण लेकर आई है।

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