Sunday, February 1, 2026
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कुशीनगर: म्यांमार मंदिर परिसर में बन रहा ज्ञानेश्वर स्तूप, पर्यटकों का नया आकर्षण बनेगा – म्यांमार स्थापत्य कला की झलक

कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली के निकट एक नया आकर्षण तैयार हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटक केंद्र स्थित म्यांमार बुद्ध मंदिर परिसर में दिवंगत भिक्षु एबी ज्ञानेश्वर के सम्मान में ज्ञानेश्वर स्तूप का निर्माण हो रहा है। यह स्तूप म्यांमार की पारंपरिक स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना होगा, जिसे म्यांमार के वास्तुकारों ने डिजाइन किया है और कारीगरों द्वारा बनाया जाएगा। स्तूप का शिलान्यास म्यांमार के संघराजा भिक्षु डॉ. नैनीसारा ने 24 दिसंबर को किया। यह परियोजना कुशीनगर के बौद्ध पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, जिससे विश्वभर से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक लाभान्वित होंगे। योगी सरकार के कुशल नेतृत्व में कुशीनगर का विकास तेजी से हो रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

स्तूप का महत्व: ज्ञानेश्वर महाराज की स्मृति में श्रद्धांजलि
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ज्ञानेश्वर स्तूप कुशीनगर भिक्षु संघ के पूर्व अध्यक्ष एबी ज्ञानेश्वर (भदंत ज्ञानेश्वर) की स्मृति में बनाया जा रहा है। उनका निधन 31 अक्टूबर 2025 को लखनऊ में हुआ था और अंतिम संस्कार 11 नवंबर को म्यांमार बुद्ध मंदिर परिसर में ही किया गया, जैसा कि उन्होंने अपनी इच्छा व्यक्त की थी। म्यांमार सरकार ने दो वर्ष पूर्व उन्हें प्रतिष्ठित धार्मिक उपाधि ‘अभिधजा महारथा गुरु’ प्रदान की थी। विश्व के लगभग सभी बौद्ध देशों में उनके अनुयायी हैं, जो कुशीनगर आकर इस स्तूप का दर्शन, पूजन और वंदन करेंगे।

म्यांमार बुद्ध मंदिर के प्रभारी भिक्षु नंदका ने बताया कि स्तूप की डिजाइन म्यांमार के आर्किटेक्ट्स द्वारा तैयार की गई है और निर्माण कार्य भी म्यांमार के कारीगरों द्वारा किया जाएगा। निर्माण में व्यय होने वाली राशि म्यांमार सरकार और विश्वभर के श्रद्धालुओं के सहयोग से जुटाई जाएगी। यह स्तूप म्यांमार स्थापत्य कला की सुंदरता को प्रदर्शित करेगा, जो पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।

कुशीनगर का पर्यटन: नई ऊंचाइयों की ओर

कुशीनगर पहले से ही महापरिनिर्वाण मंदिर और विभिन्न देशों के बौद्ध मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। म्यांमार मंदिर परिसर में यह नया स्तूप पर्यटकों को और आकर्षित करेगा। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के संचालन और बेहतर कनेक्टिविटी से कुशीनगर में पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। यह स्तूप बौद्ध अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक महत्व का केंद्र बनेगा और सामान्य पर्यटकों को म्यांमार की वास्तुकला की झलक प्रदान करेगा।

सरकार के प्रयास: बौद्ध पर्यटन को बढ़ावा

योगी आदित्यनाथ सरकार कुशीनगर को विश्वस्तरीय बौद्ध पर्यटन स्थल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हाल के वर्षों में एयरपोर्ट, स्मार्ट टाउनशिप और अन्य परियोजनाएं इस दिशा में बड़े कदम हैं। ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह परियोजना जनता के हित में है और कुशीनगर की वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगी।

प्रमुख तथ्य एक नजर में

विवरणजानकारी
स्तूप का नामज्ञानेश्वर स्तूप
स्थानम्यांमार बुद्ध मंदिर परिसर, कुशीनगर
डिजाइन और निर्माणम्यांमार के वास्तुकार और कारीगर
शिलान्यास24 दिसंबर (संघराजा भिक्षु डॉ. नैनीसारा द्वारा)
सम्मानित व्यक्तिएबी ज्ञानेश्वर (निधन: 31 अक्टूबर 2025)
सहयोगम्यांमार सरकार और विश्वभर के श्रद्धालु
लाभपर्यटन बढ़ावा, आध्यात्मिक महत्व

कुशीनगर की समृद्धि में नया अध्याय

ज्ञानेश्वर स्तूप का निर्माण कुशीनगर के बौद्ध पर्यटन को नई गति प्रदान करेगा। म्यांमार की स्थापत्य कला से सजा यह स्तूप न केवल एबी ज्ञानेश्वर के अनुयायियों के लिए श्रद्धा का केंद्र बनेगा, बल्कि विश्वभर के पर्यटकों को आकर्षित करेगा। योगी सरकार के प्रयासों से कुशीनगर विकास और आध्यात्मिकता का अनुपम संगम बन रहा है, जो जनता के लिए गर्व का विषय है। यह परियोजना कुशीनगर को वैश्विक बौद्ध पर्यटन के मानचित्र पर और मजबूत स्थिति देगी, जिससे स्थानीय लोगों को आर्थिक और सांस्कृतिक लाभ मिलेगा।

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