गुरुग्राम: सामाजिक इंटर्नशिप कार्यक्रम में बालिकाओं को मासिक धर्म पर किया जागरुक

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गुरुग्राम, (वेब वार्ता)। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवाएं के चेयरमैन सुभाष महला के मार्गदर्शन में बुधवार को स्कूल ऑफ बिजनेस सुशांत विश्वविद्यालय के प्रथम वर्ष के दूसरे सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने 14 दिवसीय सामाजिक इंटर्नशिप कार्यक्रम के दौरान डीएलएसए की ओर से चलाए गये अभियान स्वस्थ सखी-मासिक धर्म स्वच्छता के लिए बाधाओं को तोडऩा के अंतर्गत बालिकाओं को मासिक धर्म से संबंधित जानकारी दी गई।

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण गुरुग्राम के सचिव रमेश चंद्र ने बताया कि विद्यार्थियों ने बालिकाओं को बताया कि किस तरह से वो इस समय खुद को स्वस्थ रख सकती हैं। किस तरह से उनका आहार होना चाहिए। इन सब बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। इस अभियान में डीन प्रोफेसर विजय आनंद दुबे, डॉ. गीतू सिंगल और कुलपति डॉ. राकेश रंजन के नेतृत्व में छात्रों ने इंफॉर्मेटिव पोस्टर बनाकर बालिकाओं को इस महत्वपूर्ण मुद्दे के बारे में बड़ी ही सरलता से समझाया। बालिकाओं ने भी इस चर्चा में भाग लिया। अपने संदेह छात्रों से सांझा किए, जिनका छात्रों ने जवाब दिया। उन्हें समझाया कि मासिक धर्म के बारे में जानकारी की कमी के परिणामस्वरूप अस्वच्छ और अस्वास्थ्यकर मासिक धर्म प्रथाएं होती हैं। गलत धारणाएं और नकारात्मक दृष्टिकोण पैदा होते हैं, जो दूसरों के बीच, शर्मिंदगी, धमकाने और यहां तक कि लिंग आधारित हिंसा को प्रेरित करते हैं। लड़कियों और महिलाओं की पीढिय़ों के लिए, खराब मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को बढ़ा रही है, जिससे उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और मानव विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसके साथ उन्होंने बताया कि डिस्पोजेबल सेनिटरी उत्पाद बड़ी मात्रा में वैश्विक कचरे में योगदान करते हैं। महिलाओं और लड़कियों को टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों तक पहुंच सुनिश्चित करना और मासिक धर्म उत्पादों के निपटान के प्रबंधन में सुधार करना, पर्यावरण में बड़ा बदलाव ला सकता है।

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