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Saturday, October 1, 2022

Sultanpur News : एसके. प्रेसीडेंसी सी. सेकेंडरी स्कूल में ‘अखंड भारत दिवस संपन्न’

                     – कुमार मुकेश – 

सुल्तानपुर(वेबवार्ता)- आज विद्यालय के छात्रों तथा शिक्षकों ने भारत के विभाजन दिवस को ‘अखंड भारत दिवस’ के रूप में मनाया| आज से 75 वर्ष पूर्व इसी दिन देश को अप्राकृतिक रूप से बाँट कर तीन भाग कर दिए गए थे| इस कार्य में तत्कालीन सत्तालोभी नेताओं ने अपनी महत्वाकांक्षा पूर्ति का साधन देखा| शेष मणि मिश्र, प्रधानाचार्य ने बताया की सन 1905 में अंग्रेज सरकार ने बंगाल प्रान्त को दो भागो में बाँटा| यह बंटवारा हिन्दू व मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र को देखकर किया गया था| पूर्वी बंगाल मुस्लिम बाहुल्य तथा पश्चिमी बंगाल हिन्दू बाहुल्य था| इस बँटवारे का विरोध प्रत्येक राष्ट्रवादी नागरिक ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक किया| हिन्दू व मुसलमान धार्मिक विरोधी नहीं, एक ही माँ के पुत्र की तरह है, यह अपने कार्यों तथा आन्दोलन से उन्होंने अनेको बार सिद्ध किया|

अंग्रेज सरकार को बंगभंग कानून वापस लेना पड़ा| संगठित जनता को विजय श्री मिली| परन्तु अंग्रेजो ने इसे भुलाया नहीं| वह लगातार इस प्रयास में लगे रहे की कट्टरपंथी दकियानूस विचारो वाले नेताओं को खोजकर बढाया जाय तथा वे इसके लिए पूरा प्रयास करने लगे| उसी के कुछ दिन बाद सन 1921 में तुर्की के खलीफा को पद से हटा दिया गया| इस घटना का भारत से कोई सम्बन्ध नहीं था| परन्तु यहाँ पर कट्टरपंथी शक्तियां तुर्की की इस घटना पर लगातार आन्दोलन करने लगे| गाँधी जी ने इसे अपना समर्थन देकर कट्टरपंथियों का दिल जितने का असफल प्रयास किया| परंतु अंग्रेज तो शासक थे| उन्होंने दूरी बढाने का भरपूर प्रयास किया| इसी बीच केरल का ‘मोपला कांड’ केरल में हुआ| इसका भारत के सदभाव पर बुरा असर हुआ| अंततः जनता की भावनाओ का बिना ध्यान दिए मुस्लिम लीग तथा कांग्रेस दोनों राजनैतिक दलों ने देश विभाजन को अपनी स्वीकृत दे दी| दोनों दल भारत माँ को बाँटकर सत्ता के मोहपाश में फँस गये|

अतः 14 अगस्त 1947 को रात में देश बँट गया| भारत माँ के आँचल पर लकीरे खींच दी गई| इस त्रासदी की देश की जागरूक जनता विगत 75 वर्षो से इस दिन याद करती है| जागरूक जनता आज भी तत्कालीन 1947 वाले भारत को पुनः एक करने का संकल्प लेती है| आज भी हम सभी उस त्रासद दिन को याद करते हैं|

प्रधानाचार्य जी ने विद्यार्थियों व शिक्षकों को भारत को एक करने का संकल्प दिलाया|

दिन दूर नहीं खंडित भारत को पुनः अखंड बनायेंगे,

गिलगित से गारो पर्वत तक आज़ादी पर्व मनाएंगे|

उस स्वर्ण दिवस के लिए, उठो और अब कमर कसो बलिदान करो,

जो पाया उसमें खो न जाय, जो खोया उसको याद करें|

तत्पश्चात आज़ादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर संपन्न होने वाले कार्यक्रमों का रिहर्शल शुरू हुआ|

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