वृद्ध आश्रम में हुआ विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन

Legal literacy camp organized in old age ashram

गोंडा, 19 जुलाई (आशीष श्रीवास्तव)। उ.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ व माननीय जनपद न्यायाधीश मयंक कुमार जैन के निर्देश के अनुपालन में रविवार को वृद्ध आश्रम, गोण्डा में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कृष्ण प्रताप सिंह द्वारा कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन करते हुए किया गया।

विधिक साक्षरता शिविर में सचिव द्वारा वृद्ध आश्रम में निवास कर रहे वरिष्ठ नागरिकों के विधिक अधिकार के सम्बन्ध में विस्तृत रूप से जानकारी देते हुए बताया गया कि भारत एक ऐसा देश है, जहां वृद्धजनों के पैर छूकर उन्हें सम्मान दिया जाता है तथा भगवान के समतुल्य माना जाता है। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में वृद्धावस्था के चरण से गुजरना पड़ता है।

परिवार में वृद्धजनों की उपस्थिति एवं मार्गदर्शन परिवार एवं समाज दोनों के लिए कल्याणकारी होती है, परन्तु कुछ परिवार में आज भी बुजुर्गों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जाता है। भारत में वृद्धजनों के विधिक अधिकार के सम्बन्ध में सचिव द्वारा संवैधानिक उपबन्धों पर विशिष्ट रूप से जानकारी देते हुए दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 पर विशेष बल देते हुए बताया गया कि यदि पर्याप्त साधनों वाला कोई व्यक्ति अपने पिता या माता का, जो अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है, भरण पोषण करने में उपेक्षा करता है या भरण पोषण करने से इन्कार करता है, तो प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट, ऐसी उपेक्षा साबित हो जाने पर ऐसे व्यक्ति को अपने पिता या माता का भरण पोषण करने के लिए मासिक भत्ता देने के सम्बन्ध में निर्देश दे सकते हैं।

उत्तराधिकार एवं भरण पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 20, वृद्धजनों को अपने बच्चों से भरण-पोषण प्राप्त करने का प्रावधान करती है। धारा 23 में न्यायालय के द्वारा भरण पोषण की धनराशि निर्धारित करने के सम्बन्ध में उपबन्ध दिये गये हैं। वर्तमान में न केवल पुत्र बल्कि पुत्रियों पर भी अपने माता-पिता के भरण-पोषण का दायित्व दिया गया है। यहां तक कि न केवल नैसर्गिक माता-पिता बल्कि दत्तक माता-पिता भी भरण-पोषण प्राप्त कर सकते हैं।

आगे यह भी बताया गया कि जो वृद्ध अपने उत्तराधिकारी या रिश्तेदार को उपहार स्वरूप या फिर उनका हक मानते हुए अपनी सम्पत्ति उन्हें अन्तरित कर देते हैं तत्पश्चात उन्हें भरण पोषण एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी आवश्यकताओं की प्राप्ति नही होती है, तो वह विधि अनुसार अपनी सम्पत्ति वापस प्राप्त कर सकते हैं और सम्पत्ति का अन्तरण रद्द करवा सकते हैं। इसके अतिरिक्त सचिव द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय एवं माननीय उच्च न्यायालय के विधि-व्यवस्था, सरकारी नीतियों एवं निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने की विस्तृत जानकारी दी गयी।

वृद्ध आश्रम में प्रवास कर रहे वरिष्ठ नागरिकों के आश्रय एवं भण्डार/पाक गृह का निरीक्षण कर साफ-सफाई हेतु आवश्यक निर्देश देते हुए कोविड-19 प्रोटोकाल का कड़ाई से अनुपालन करने हेतु बताया गया। इस अवसर पर वृद्ध आश्रम के प्रभारी प्रबन्धक जितेन्द्र विक्रम सिंह, सेवाकर्ता ओंकार सिंह, विभा श्रीवास्तव, पंकज, दीपांकर व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गोण्डा के लिपिक मुकेश कुमार वर्मा व अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।