UP: विधान परिषद चुनाव में BJP का यह दांव, क्या बदेलगी सियासी तस्वीर?

Webvarta Desk: विधान परिषद चुनाव (Uttar Pradesh Legislative Council) के लिए प्रत्याशी चयन में यूपी बीजेपी (UP BJP) ने संगठन के साथ जातीय समीकरणों को भी पूरी तरजीह दी है। बीजेपी ने दलित, पिछड़े वर्ग के साथ-साथ ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य वर्ग को भी प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। लेकिन पार्टी का सबसे ज्यादा जोर पुराने कार्यकर्ताओं को ‘एडजस्ट’ करने का है।

पार्टी (UP BJP) ने दस सीटों पर ही प्रत्याशियों की घोषणा करके यह भी बता दिया है कि फिलहाल वह 11वें प्रत्याशी को लेकर किसी भी तरह के विवाद में नहीं पड़ना चाहती है।

सभापति की कुर्सी पर नजर

बीजेपी ने सूची में क्षत्रिय बिरादरी से आने वाले झांसी के कुंवर मानवेंद्र सिंह को जगह दी है। मानवेंद्र विधान परिषद में कार्यकारी सभापति और पूर्व विधायक रह चुके हैं। 30 जनवरी को विधानपरिषद के मौजूदा सभापति रमेश यादव का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है।

संख्या बल में कमजोर है बोजेपी

विधान परिषद (Uttar Pradesh Legislative Council) में सदस्यों की संख्या के हिसाब से फिलहाल बीजेपी का पलड़ा काफी कमजोर है और वह सीधे सभापति नहीं बना सकती है। सूत्रों का कहना है कि सदस्य बनने के बाद कुंवर मानवेंद्र को कार्यकारी सभापति बनाने के लिए राज्यपाल को प्रस्ताव भेजा जा सकता है। बीजेपी पूर्णकालिक सभापति के चयन से पूर्व इस प्रक्रिया को अपना सकती है।

पूरा किया वादा, हर वर्ग को मौका

सूची में बीजेपी ने दलित वर्ग से सुरेंद्र चौधरी को प्रत्याशी बनाया है। सुरेंद्र 2017 के चुनाव में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। लेकिन अचानक यह सीट अपना दल के कोटे में चली गई और अपना दल ने जमुना प्रसाद सरोज को टिकट दे दिया। ऐसे में सुरेंद्र चौधरी को चुनाव के बीच से ही हटना पड़ा।

ऐसा कहा जाता है कि खुद तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सुरेंद्र को आश्वासन दिया था कि उन्हें भविष्य में मौका दिया जाएगा पर कहीं बात नहीं बन सकी। इस बार विधानपरिषद की सीटें खाली हुईं तो संगठन ने अपना वादा पूरा किया।

बीजेपी ने डॉ. धर्मवीर प्रजापति को दिया मौका

इसके साथ ही बीजेपी ने माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. धर्मवीर प्रजापति को मौका दिया है। पिछड़ा वर्ग के धर्मवीर भी पुराने कार्यकर्ता हैं। इसके साथ ही पार्टी ने अपने महामंत्रियों गोविंद नारायण शुक्ल, अश्वनी त्यागी के साथ प्रदेश उपाध्यक्ष सलिल विश्नोई को भी प्रत्याशी बनाकर संगठन के कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने के फॉर्म्युले को आगे बढ़ाया है।

सूची पर विवाद, पिछड़ा वर्ग सदस्य का इस्तीफा

बीजेपी के प्रत्याशियों की शनिवार को जारी सूची के बाद संगठन में उथल-पुथल मच गई। गाजीपुर के पूर्व जिलाध्यक्ष और पिछड़ा वर्ग के सदस्य प्रभु नाथ चौहान ने पार्टी पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए प्रदेश अध्यक्ष को इस्तीफा भेज दिया। चौहान ने फिलहाल सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।

प्रभु नाथ चौहान ने कहा कि उनसे पार्टी के बड़े नेताओं ने वादा किया था कि राज्यसभा या विधानपरिषद में उन्हें जगह दी जाएगी। लेकिन कोई वादा पूरा नहीं किया गया। इसे लेकर वह आज रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से भी मिले थे। लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

कायस्थों में भी नाराजगी

वाराणसी में एसपी एमएलसी आशुतोष सिन्हा की जीत के बाद कयास लगाया जा रहा है कि एमएलसी चुनाव में कायस्थ समाज से किसी को प्रतिनिधित्व मिल सकता है। लेकिन ये सिर्फ कयास ही रहा। इस बात से कायस्थों में भी नाराजगी है।