शराबबंदी के बहाने प्रदेश की सियासत में वापसी को आतुर उमा भारती

uma bharti
ग्वालियर, 25 फरवरी (मुकेश शर्मा)। कभी मध्यप्रदेश भाजपा की फायर ब्रांड नेता रही उमा भारती मध्यप्रदेश की सियासत से डेढ़ दशक से अलग थलग है। भाजपा ने उन्हें हिंदुत्व की स्टार प्रचारक से एक वर्ग विशेष की नेता बनाकर छोड़ दिया है। भाजपा विगत कुछ वर्षों से उमा की सभा या दौरे वहीं करवाती है, जहां जाति या वर्ग विशेष के वोटों पर प्रभाव डालना हो। लंबे अरसे से सूबे की सियासत से सन्यास भोग रही सियासी सन्यासिन उमा लगातार प्रदेश में वापसी के मौके ढूंढती रहती है।  

इस बार उमाश्री ने शराबबंदी की मांग बुलन्द कर न सिर्फ अपने चिरप्रतिद्वंद्वी शिवराज सिंह की मुश्किलें बढ़ायी बल्कि जनता और मीडिया का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है। इस समय जब प्रदेश की सरकार कर्ज लेकर और सम्पत्तियों को बेच कर खाली खजाना भरने का प्रयास कर रही है, उस समय प्रदेश में राजस्व का बड़ा स्रोत आबकारी (शराब) से आता है। उस पर रोक लगाने की मांग करके उमा भारती ने शिवराज सरकार को धर्मसंकट में डाल दिया है।

हालांकि यह पहला मामला नहीं है, जब शराबबंदी की मांग उठी हो इससे पूर्व भी कई सामाजिक संगठनों द्वारा नशाबन्दी व शराबबंदी की मांग उठाई जाती रही है। किंतु अपने चितपरिचित जिद्दी स्वभाव और अड़ियल राजनीतिक व्यवहार के लिये जाने जानी बाली उमा भारती ने सड़क पर उतरकर अभियान चलाने की घोषणा की है जिससे शिवराज सरकार सांसत में है।

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने शराबबंदी को लेकर अभियान चलाने का ऐलान किया तो सरकार बैकफुट पर आ गई। उमा भारती सड़क पर उतरे, उससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसको लेकर रतलाम में जनजागरण अभियान शुरू कर दिया।

शिवराज सरकार शराब दुकानों की संख्या बढ़ाने पर हां-ना करती रह गई, लेकिन बीजेपी की फायर ब्रांड नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। वह 8 मार्च से एमपी में शराबबंदी के लिए अभियान का आगाज करेंगी। उनके ऐलान से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान घिरते नजर आ रहे हैं।

यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने भी 4 फरवरी को रतलाम में नशाबंदी के खिलाफ अभियान चलाने की शुरुआत कर दी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मुट्‌ठी बंधवाई और दोनों हाथ उठवाकर नशाबंदी के लिए संकल्प दिलाया। जानकारों का मानना है कि नगरीय निकाय चुनाव से पहले उमा भारती के अभियान का असर बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकता है।

उमा भारती शराबबंदी अभियान को बड़े आंदोलन की शक्ल देने की तैयारी में हैं। वह इसकी शुरुआत टीकमगढ़ से करने जा रही हैं। उन्होंने सबसे पहले अपने गृह ग्राम डूंडा की शराब दुकान को बंद कराने की रणनीति बनाई है। 500 की आबादी वाले इस गांव में शराब दुकान खोले जाने का महिलाएं विरोध कर चुकी हैं।

उमा भारती कह चुकी हैं कि परिवार के मुखिया की शराबखोरी की आदत के कारण महिलाएं ज्यादा परेशान रहती हैं और शराब दुकानें बंद कराने में मुझे उन सबका सहयोग मिलेगा। इस तैयारी की जानकारी इंटेलिजेंस के माध्यम से सरकार तक पहुंच गई है। उमा भारती ने हाल ही में कहा था कि अगले कुछ दिनों में अभियान का रोडमैप सार्वजनिक करेंगी। अब सरकार सांसत में है क्योंकि उमा भारती ठान लेती हैं, वह करके रहती हैं।

उमा भारती के तेवर के बाद कांग्रेस के साथ बीजेपी के अंदर भी नई चर्चा छिड़ गई है। आर्थिक संकट से जूझ रही राज्य सरकार आय बढ़ाने के लिए शराब दुकानों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही थी, लेकिन राजनीतिक बखेड़ा खड़ा होने के कारण उसे बैकफुट पर जाना पड़ा। कोरोना के बहाने सरकार दुकानें बढ़ाने वाली थीं, लेकिन अब बैकफुट पर है।

दरअसल, मध्य प्रदेश में उमा भारती अकेली राजनेता नहीं हैं, जिन्होंने शराबबंदी की मांग की है। यदा-कदा इसे लेकर आवाजें उठती रही हैं। कभी सामाजिक संगठनों की तरफ से मांग उठती है तो कभी राजनीतिक दलों के भीतर ही बातें होती रही हैं। शराब बंदी की मांग के बीच सरकार आज तक इस सवाल का जवाब नहीं खोज पाई कि यदि शराब को पूरे प्रदेश में प्रतिबंधित कर दिया तो इससे मिलने वाले राजस्व की भरपाई कहां से होगी?

ऐसा पहली बार नहीं है कि भाजपा द्वारा प्रदेश में शराबबंदी को लेकर अभियान शुरू किया जा रहा है। इससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने तीसरे कार्यकाल में वर्ष 2017 में जनजागण अभियान चलाया था। पहले फेस में नर्मदा के तट से 5 किलोमीटर तक करीब 58 शराब दुकानें बंद कराई गई थीं। तब शिवराज ने कहा था कि प्रदेश सरकार पूर्ण शराबबंदी की दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ेगी।

उस समय नई आबकारी नीति के तहत नशा करके ड्राइविंग करने पर प्रथम बार 6 माह तथा दूसरी बार 2 वर्ष हेतु ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने का प्रावधान भी किया गया था। गौरतलब है फिर भी प्रदेश में शराब की न सिर्फ दुकान बढ़ गईं है बल्कि सरकार की कमाई उससे होने बाली आय भी बढ़ी है वर्ष 2019-20 में 8 हजार 521 करोड़ रुपए तथा वर्ष 2020-21 में 10 हजार 318 करोड़ रुपए की कमाई सरकार ने शराब से की है वहीं प्रदेश में एक दशक पुर्व 2770 शराब की दुकानें थी अब उनकी संख्या बढ़ कर 3605 हो गई है।