राम मंदिर से दूर रहें मुसलमान, करीब आए तो तोड़ देंगे टांग: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

New Delhi: Swami Avimukteshwaranand on Ram Mandir Bhumi Pujan: अयोध्या में श्री राम मंदिर के शि
3+लान्यास के तय मुहूर्त को लेकर वाराणसी का संत समाज सवाल खड़े करने लगा है। 5 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में श्री राम मंदिर का भूमि पूजन कर मंदिर निर्माण की आधारशिला रखेंगे।

अयोध्या में श्री राम मंदिर के शिलान्यास के लिए जगह-जगह से मिट्टी जा रही है, वहीं भगवान राम के ननिहाल यानी उनकी माता कौशल्या की जन्मस्थली से भी मिट्टी आयोध्या के लिए भेजी जा चुकी है।

दक्षिण कौशल जो इस समय छत्तीसगढ़ के नाम से जाना जाता है। वहां के चंद्रखुरी गांव की प्रसिद्ध कौशल्या माता मंदिर की मिट्टी लेकर रायपुर निवासी मोहम्मद फैज खान पैदल निकल चुके हैं। इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Swami Avimukteshwaranand on Ram Mandir Bhumi Pujan) ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मंदिर से मुसलमान दूर रहें, नहीं तो टांग तोड़ देंगे।

दी आंदोलन की चेतावनी

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, ‘संघ के प्रमुख नेता इंद्रेश कुमार से प्रेरणा लेकर मुसलमान मोहम्मद फैज खान नाम का व्यक्ति मिट्टी लेकर अयोध्या आ रहा है। हम यह बिलकुल स्वीकार नहीं कर सकते। हां, अगर उसकी राम और हिंदू धर्म में आस्था है, तो पहले वह हिंदू धर्म अपनाए और प्रायश्चित करे कि गलत जगह चले गए थे फिर मौका दिया जा सकता है। संघ ने अगर मुसलमान से मिट्टी रखवाई तो हम लोग आंदोलन करेंगे।’

‘5 अगस्त का अंधविश्वास’

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, ‘राम मंदिर शिलान्यास के मुहूर्त पर लगता है कि सरकार में बैठे लोगों को 05 अगस्त पर अंधविश्वास हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 5 अगस्त को कई फैसले लिए गए हैं, योगी आदित्यनाथ जब मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने पहला निर्णय लिया था कि मुगलसराय का नाम 5 अगस्त को ही बदलेंगे और 5 अगस्त को ही बदला था।

अमित शाह जब गृहमंत्री बने तो धारा 370 के विभिन्न प्रावधान 5 अगस्त को ही खत्म किए गए। इनके मन में कोई अंधविश्वास बैठ गया है कि 5 अगस्त को शिलान्यास करेंगे तो अच्छा होगा।’

‘धोखे में रखे जा रहे पीएम?’

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, ‘राम मंदिर का जो सरकारी ट्रस्ट बना है, उसमें संघ और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लोग हैं। उनके सचिव चंपत राय की ओर से बताया गया कि मंदिर का शिलान्यास तो पहले ही कर लिया गया है, यह तो सिर्फ कार्यक्रम हो रहा है। इसमें प्रधानमंत्री आ रहे हैं।’

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का कहना है, ‘अगर उन्होंने पहले शिलान्यास कर लिया है तो फिर इस नाटक करने की क्या जरूरत है। अगर गुपचुप तरीके से किसी विशेष शुभ मुहूर्त में शिलान्यास कर लिया गया है, तो ये और आपत्तिजनक बात है कि प्रधानमंत्री को धोखे में रखा जा रहा है।’

‘मंदिर का है चुनाव कनेक्शन’

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, ‘शंकराचार्य को ही नहीं सिंहगेरी और पुरी के शंकराचार्य को भी, वैष्णवाचार्य, रामानंद, रामानुज, इन सबको अलग रखा गया है, क्योकि ये लोग दिव्य, भव्य और विश्व का अद्वितीय मंदिर बनाएंगे।

धर्माचारियों को मौका दिया गया तो चुनाव के पहले मंदिर नहीं बन पाएगा, और बीजेपी वाले यूपी चुनाव के पहले मंदिर बनाना चाहते हैं। उनकी कोशिश है कि बिहार चुनाव तक शिलान्यास कर दिया जाए। इसी वजह से शंकराचार्य, अखाड़ा और वैष्णवाचार्य को दूर रखा गया है। रामालय ट्रस्ट ने सरकार को कई बार लिखा लेकिन केंद्र सरकार ने जवाब देना जरूरी नहीं समझा।’

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