Thursday, March 4, 2021
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West Bengal: शिवसेना की एंट्री से बंगाल में कितने बदलेंगे समीकरण? जाने किसे नुकसान.. किसे फायदा

Webvarta Desk: असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की AIMIM के बाद अब शिवसेना (Shivsena) ने भी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election) में उतरने का ऐलान कर दिया है। इसी के साथ पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर खलबली मच गई है।

कुछ का मानना है कि हिंदूवादी छवि के कारण शिवसेना (Shivsena) बंगाल में बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकती है तो वहीं बीजेपी का कहना है कि राज्य में शिवसेना की मौजूदगी न के बराबर है इसलिए उसे कोई चिंता नहीं है। ऐसे में सवाल है कि एनडीए की पूर्व सहयोगी की बंगाल चुनाव (West Bengal Assembly Election) में एंट्री से क्या वाकई बंगाल की राजनीति के समीकरण बदलेंगे या फिर ऐन वक्त पर चुनाव में उतरने का दांव खुद शिवसेना के लिए ही उलटा न पड़ जाए।

दरअसल रविवार को शिवसेना सांसद संजय (Shivsena MP Sanjay Raut) राउत ट्वीट करते हुए ऐलान किया कि पार्टी चीफ उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के साथ चर्चा के बाद, शिवसेना ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election) लड़ने का फैसला किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘हम जल्द ही कोलकाता पहुंच रहे हैं।’ शिवसेना कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन कहा जा रहा है कि बंगाल की 294 सीटों में से शिवसेना कम से कम 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है।

काफी समय से थी अटकलें

शिवसेना के बंगाल चुनाव में एंट्री के काफी समय से अटकलें लगाई जा रही थीं। शिवसेना ने खुद ही बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के बाद बंगाल का रुख करने का संकेत दिया था। शिवसेना का यह बयान इसलिए भी मायने रखता है कि क्योंकि एनडीए से अलग होने के बाद वह बंगाल चुनाव में उतरने जा रही है। वहीं दूसरी ओर शिवसेना महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन की सरकार चला रही है। वही कांग्रेस बंगाल में सीपीआई (एम) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने जा रही है और दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर समझौता होना बाकी है।

2019 और 2016 में क्या हुआ था शिवसेना का हाल?

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब शिवसेना बंगाल में चुनाव लड़ने जा रही है। इससे पहले पार्टी ने 2019 लोकसभा चुनाव और 2016 विधानसभा चुनाव में भी कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। 2019 लोकसभा चुनाव में शिवसेना ने 15 सीटों- तमलुक, कोंटई, मिदनापुर, उत्तर कोलकाता, पुरुलिया, बैरकपुर, बांकुरा, बारासात, बिश्नुपुर, उत्तर मालदा, जादवपुर वगैरह पर चुनाव लड़ा था। 2016 चुनाव में शिवसेना ने 18 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन किसी में भी जीत दर्ज नहीं कर सकी।

शिवसेना की एंट्री से बीजेपी को होगा घाटा?

जहां एक ओर असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री बंगाल में बीजेपी के लिए फायदेमंद हो सकती है तो वहीं शिवसेना के चुनाव में उतरने से बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। एआईएमआईएम ममता और बीजेपी विरोधी दलों के कुछ वोटों में सेंधमारी करके अपनी ओर खींच सकती है तो हिंदूवादी पार्टी की छवि होने के नाते शिवसेना बीजेपी के वोट बांटकर घाटा करा सकती है जिससे ममता को मुनाफा हो सकता है। इस बार चुनाव में वोटों का ध्रुवीकरण तय है लेकिन शिवसेना की एंट्री किस पर भारी पड़ने वाली है, इसका अंदाजा चुनाव के रिजल्ट में हो सकेगा।

बिहार में नोटा से भी कम वोट मिले थे

शिवसेना ने इससे पहले पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में भी अपने उम्मीदवार उतारे थे लेकिन उसे नोटा से कम वोट मिले थे। दरअसल शिवसेना ने बिहार की 22 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे जिनमें से 21 को नोटा से भी कम वोट मिले थे। 21 उम्मीदवारों को कुल 20195 वोट मिले जो कुल वोटों का 0.05 फीसदी ही था।

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