गजेन्द्र सिंह शेखावत की बढ़ी मुश्किलें! जानें संजीवनी सोसाइटी घोटाला और केंद्रीय मंत्री का कनेक्शन

New Delhi: राजस्थान की सरकार गिराने के आरोप के बाद केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत (Gajendra Singh Shekhawat) एक और मुसीबत में पड़ते नजर आ रही है।

दरअसल शेखावत (Gajendra Singh Shekhawat) पर अब राजस्थान के बहुचर्चित संजीवनी को-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाले में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं, जिसे लेकर जयपुर की एडीजे कोर्ट ने उनके खिलाफ जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं। वहीं राजस्थान में विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में ऑडियो टेप सामने आने के बाद से कांग्रेस और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार गजेन्द्र सिंह शेखावत पर सरकार गिराने का आरोप लगा रहे हैं।

कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि जो आवाज ऑडियो टेप में सुनाई दे रहा है, उसमें केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत (Gajendra Singh Shekhawat) की ही आवाज है, वहीं इसे लेकर शेखावत को एसओजी की ओर से नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है, लेकिन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए शेखावत ऑडियो की प्रमाणिकता पर ही सवाल उठा रहे हैं।

क्या है संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाला

आपको बता दें कि राजस्थान में कुछ को-ऑपरेटिव सोसायटी के घोटाले की बात लगातार सामने आ रही थी, जिसमें आदर्श, नवजीवन के अलावा संजीवनी को-ऑपरेटिव सोसायटी की ओर से भी घोटाले की बात सामने आई थी। सोसायटी के खिलाफ निवेशकों से उनकी जमा पूंजी पर अधिक ब्याज, मोटे मुनाफे का लालच देकर ठगी करने का आरोप लगाया गया था।

आपको बता दें कि बाड़मेर में पहली क्रेडिट सोसायटी के रूप में संजीवनी वर्ष 2007 में शुरू हुई थी। दरअसल इसी दौर में बाड़मेर जिले में तेल-गैस, लिग्नाइट जैसे खनिज और ईधन क्षेत्रों में बड़ा व्यापारिक बूम आया था। यहां तेल-गैस कंपनियों के बाड़मेर में निवेश और भूमि अवाप्ति से गरीब किसानों के पास भी करोड़ों रुपए आए थे।

इस दौरान सोसायटी ने लोगों को लुभावने वादों के साथ झांसे में लिया और कम समय में दुगुनी-तिगुनी राशि करने का झांसा देकर हजारों निवेशकों के करोड़ों रुपए की पूंजी जमा कर ली। निवेशकों की पूंजी पर आलीशान दफ्तर, गाडियां और फ्लैट खरीद लिए गए। ऐश-मौज की जिंदगी के साथ ही जोधपुर में तीन मंजिला प्रधान कार्यालय खोल दिया।

एसओजी ने किया था सरगना को गिरफ्तार

इस मामले के संज्ञान में आने के बाद राजस्थान की एसओजी की ओर से इस मामले में सरगना को 23 अगस्त 2019 में एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। सीएमडी विक्रम सिंह इंद्रोई और चार अन्य आरोपी की गिरफ्तार के बाद से लगातार इस मामले को लेकर जांच की जा रही है। साथ ही मामले की सुनवाई भी कोर्ट में चल रही है।

आपको बता दें कि मामले का खुलासा निवेशकों की ओर से शिकायत करने के बाद हुआ, जिसके बाद जब कंपनी की बैलेंस शीट खंगाली गई, तो उसमें एक हजार करोड़ जमा कर 11 सौ करोड़ के बोगस ऋण दिखाए गए। साथ ही बैलेंस शीट जीरो दिखाई गई। देश में 1.46 लाख निवेशकों के एक हजार करोड़ रुपए हड़पने और वित्तीय अनियमित्ताओं से जुड़ा यह बड़ा मामला राजस्थान में इस रूप में सामने आया है।

एसओजी की दोनों केसों में भूमिका

आपको बता दें कि राजस्थान की एसओजी दोनों ही मामले में तफ्तीश कर रही है। जहां विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले की शिकायत सामने आने के बाद एसओजी की टीम लगातार अपनी सक्रियता दिखाते हुए बागी विधायकों से पूछताछ करने के लिए उनकी तलाश में जुटी है। वहीं को- ऑपरेटिव सोसाइटी के घोटाले में भी एसओजी की टीम ने कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं।

क्यों आ रहा है केन्द्रीय मंत्री शेखावत का नाम

दरअसल को- ऑपरेटिव सोसाइटी की ओर से इतने बड़े घोटाले की बात सामने आने के बाद कोर्ट में इसे लेकर प्रार्थना पत्र भी लगाया गया है, जिसमें शिकायतकर्ता बाड़मेर के गुमान सिंह और लाबू सिंह ने इस मामले में कोर्ट में अनुरोध किया था कि वो इस मामले में केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह, उनकी पत्नी और उनके साथियों से पूछताछ करने के लिए जांच के आदेश दें।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार उन्होंने लाखों रुपये का जमा करवाए थे। सोसाइटी ने पैसे जमा होने के बाद यह सारा निवेश गजेन्द्र सिंह और उनके सहयोगी के कंपनियों से करवाया था। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कंपनी और गजेन्द्र सिंह के काफी नजदीकी ताल्लुकात है।

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