गृहमंत्री के क्षेत्र में रेत माफिया ने खोली सरकारी दावों की पोल!

Sand mafia

-दतिया पीतांबरा पीठ के सामने ट्र्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर से धराशायी हुई बारादरी

-एमपीआरडीसी ने आठ साल पहले करवाया था निर्माण, अब जांच के नाम पर होगा बंदरबांट

-मुकेश शर्मा-

ग्वालियर, 25 मई (वेबवार्ता)। मध्य प्रदेश सरकार के गृहमंत्री सरकार के प्रवक्ता एवं ग्वालियर अंचल के कद्दावर भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा के क्षेत्र में रेत माफियाओं के तांडव का परिणाम सामने आ रहा है। रेत माफिया ने सरकारी दावों की पोल खोल कर रखदी, मां पीतांबरा माता शक्तिपीठ दतिया में शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए स्टेट हाइवे 19 पर मध्यप्रदेश सडक़ विकास निगम द्वारा आठ साल पहले पीतांबरा पीठ मंदिर के सामने बनवाई बारादरी (बारहद्वारी) रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली की टक्कर से ध्वस्त हो गई। लॉकडाउन न होता तो दर्जनों लोग इसकी चपेट में आ सकते थे। हालांकि जिला प्रशासन की अधिकारियों ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय दल गठित कर दिया है और मामले में जांच बैठा दी गई है। दतिया एमपीआरडीसी के अधिकारी गेट गिरने की जांच करेंगे।

बीते रोज करोना कफ्र्यू के दौरान पुलिस गश्त कर रही थी तभी अचानक यहां से रेत से भरी ओवरलोड ट्रैक्टर ट्रॉली निकली। ट्रैक्टर चालक ने लापरवाही से चलाते हुए वाहन को बैक करना चाहा कि ट्रॉली की टक्कर पितांबरा पीठ मंदिर के मुख्य द्वार के सामने बनी बारहद्वारी में लगी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बारहद्वारी भरभरा कर धराशाई हो गई। हादसे में यहां पुलिसकर्मियों की रखी कुछ बाइ चपेट में आ गई। बताया जा रहा है कि यह बारहद्वारी 8 साल पहले करीब 2013 में मध्यप्रदेश सडक़ विकास निगम द्वारा बनवाई गई थी। निर्माण में किस तरह की घटिया सामग्री इस्तेमाल की गई कि एक ट्रैक्टर की टक्कर से गिर गई?

अगर इमानदारी से जांच हुई तो अवैध रूप से रेत खनन एवं परिवहन करने वाले माफियाओं के साथ साथ ठेकेदार, इंजीनियर, प्रोजेक्ट मैनेजर, प्रशासनिक अधिकारी, निरीक्षण अधिकारी, सभी जांच के दायरे में आएंगे परंतु ऐसा होगा नहीं क्योंकि जांच के नाम पर राशि आवंटित होगी और उस राशि का बंदरबांट होकर किसी छोटे कर्मचारी को बलि का बकरा बना दिया जाएगा। बारहद्वारी के गिरने की सूचना मिलने पर कलेक्टर संकुमार सहित प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया।

बड़ा सवाल यह उठता है कि पीतांबरा पीठ मंदिर के पास स्टेट हाइवे पर बनी पर दो बारहद्वारी बनवाई गई थी। एक बाराद्वारी मुख्य द्वार के बिल्कुल सामने है तो दूसरी करीब 100 मीटर की दूरी पर है। इनमें घटिया सामग्री इस्तेमाल किसके संरक्षण में की गई? गृह मंत्री के क्षेत्र में रेत माफियाओं को संरक्षण कौन दे रहा है?क्योंकि अभी कुछ दिन पहले भाजपा नेता एवं रेत माफिया केपी सिंह भदौरिया के गुर्गों ने दतिया जिले के गोराघाट थाना क्षेत्र में वन विभाग के एक अधिकारी की छाती पर बंदूक लगाकर रेत से भरे वाहनों को जबरन छुड़ालेगये घटना से दुखी वन विभाग के अधिकारी ने नोकरी से स्तीफा देदिया।

ताजा मामला ये है कि सुप्रसिद्ध पीतांबरा पीठ के सामने सड़क पर सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से बनाई गई लाल पत्थरों की बारादरी बीते रोज रेत से भरी ट्रैक्टर की ट्राली की टक्कर लगने से गिरकर ध्वस्त हो गई इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई है। बारादरी के नीचे खड़ी कुछ मोटर साइकिले इस हादसे में क्षतिग्रस्त हो गई है। पुलिस ने इस मामले ट्रैक्टर चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। जिला प्रशासन ने इस हादसे की जांच के लिए एडीएम की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय इंजीनियरों की एक जांच कमेटी बनाई है। यह जांच समिति घटना की छानबीन कर कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपेगी।

बताया जाता है कि राजगढ़ चौराहे से कोतवाली थाने की ओर जाने वाली रोड पर यह रेत से भरी ट्रैक्टर ट्राली इतनी तेज से गुजरी की डिवाइडर पर बने बारादरी के खंभों से सीधे टकरा गई। इसके चलते मंदिर तरफ की बारादरी वाला भाग नीचे गिर गया। बता दें कि यह बारादरी नगर पालिका द्वारा पीतांबरा मंदिर पीठ पर सौंदर्यीकरण के तहत बनाई गई थी इसे मंदिर नुमा बनाया गया था। जो काफी भव्य दिखाई देता है। इस हादसे के बाद नगर पालिका के निर्माण कार्य और मध्य प्रदेश शासन के गृहमंत्री के क्षेत्र में अवैध रेत खनन, परिवहन, संरक्षण, कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं?

अब होगी जांच की नौटंकी

कलेक्टर संजय कुमार ने इस हादसे की जांच के लिए एडीएम ए.के. चांदिल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है, जो एक सप्ताह में इस हादसे की रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपेंगी। इस समिति में लोक निर्माण विभाग के दो इंजीनियर तथा राजघाट सिंचाई परियोजना के कार्यपालन इंजीनियर को लिया गया है। यह समिति यह भी देखेगी कि नगर पालिका का जो निर्माण कार्य है, उसमें गुणवत्ता कितनी थी?

यदि यह हादसा आम दिनों में कभी हो जाता तो बड़ी संख्या में लोगों की जानें जा सकती थी लेकिन यह सवाल कोन करे कि लोक डाउन होने के बावजूद भी अवैध रेत खनन एवं परिवहन किसके संरक्षण में चल रहा है? इस घटिया निर्माण के लिए असल जिम्मेदार कौन है? ठेकेदार, इंजीनियर, निरीक्षण अधिकारी, जिला प्रशासन, या कमीशन खोर बेशक जांच कमेटी बिठाकर नौटंकी की करें लेकिन यह तय है कि एक आम कर्मचारी को बलि का बकरा बना कर जांच की रकम का भी बंदरबांट कर लिया जाएगा?