Rajasthan: किसान महापंचायतों में सचिन पायलट खेमे का जलवा, होगा बड़ा फायदा?

Webvarta Desk: Sachin Pilot in Maha Panchayat: राजस्थान (Rajasthan News) में जहां एक ओर राजनीतिक नियुक्तियों और मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expension) को फिलहाल के लिए टाला जा चुका है। वहीं इन दिनों पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) राज्य में किसान रैलियों में छाए हुए हैं। सचिन पायलट लगातार अब किसानों (Farmers) के मुद्दे पर प्रदेश में पूरी तरह मुखर नजर आ रहे हैं।

लगातार सचिन पायलट (Sachin Pilot) और उनके समर्थक विधायक लगातार किसानों की बीच जा रहे हैं। साथ ही किसानों की रैलियों में हिस्सा ले रहे हैं। इधर जानकारों का कहना है कि सचिन पायलट की ओर से जहां किसान रैलियां और महापंचायतों (Maha Panchayat) में हिस्सा लेने की वजह किसानों के बीच अपनी पैठ को बढ़ाना है।

वहीं इसके पीछे पार्टी आलाकमान को भी संदेश भी देना है कि वह अभी भी भारी भीड़ को खींचने का सामर्थ रखते हैं। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को पायलट (Sachin Pilot) ने भरतपुर के बयाना में किसानों के लिए एक विशाल रैली को संबोधित किया। उनकी तीन रैलियों में से दूसरी रैली थी। इससे पहले पांच फरवरी को दौसा में और अब तीसरी रैली 17 फरवरी को जयपुर के चाकसू में होना तय है।

पायलट, विश्वेन्द्र सिंह और रमेश मीणा को फिर मिल सकती है जगह

जानकारों की मानें तो पिछले साल पायलट के विद्रोह के बाद कांग्रेस पार्टी की ओर से जुलाई 2020 विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को मंत्रियों के पद से हटाने के अलावा पायलट को भी मंत्री पद पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के पद से बर्खास्त कर दिया था।

साथ ही राज्य कार्यकारिणी से लेकर जिला तथा ब्लॉक समितियों तक को भंग कर दिया गया था। लेकिन पार्टी में बिना पद के भी सचिन पायलट और उनका खेमा लगातार सक्रियता दिखा रहा है। लिहाजा पार्टी में उनका वर्चस्व एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि विश्वेन्द्र सिंह और रमेश मीणा को दोबारा सरकार में शामिल किया जा सकता है।

गहलोत कैंप हो सकता है नाराज

हालांकि सियासी संकट के बाद से यह कहा जा रहा है कि पार्टी में सब कुछ ठीक है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी सबकुछ भूला देने की बात कर चुके हैं। लेकिन यह माना जा रहा है कि अशोक गहलोत कैंप के कुछ लोग दोबारा पायलट खेमे को दोबारा पार्टी में शामिल नहीं करने को लेकर खुश नहीं है।

ऐसा इसलिए कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठकों में कांग्रेस विधायकों ने विद्रोहियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था। साथ ही कुछ वफादारी के लिए उपयुक्त रूप से पुरस्कृत किए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब दोबारा पायलट खेमे के मजबूत होने के साथ अब ये बात हवा- हवा होती दिखाई दे रही है।

पायलट सुनिश्चित कर रहे हैं राजस्थान की आवाज दिल्ली तक पहुंचे

आपको बता दें कि पायलट यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उनकी रैलियों में शामिल होने वाले लोगों की आवाज दिल्ली – संसद और एआईसीसी मुख्यालय तक पहुंचाई जाए। दिलचस्प बात यह है कि पायलट ने रैलियों के लिए अपने विश्वासपात्र विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों को चुना है। दौसा में विधायक मुरारी लाल हैं।

बयाना के विधायक अमर सिंह हैं और चाकसू के विधायक वेद प्रकाश सोलंकी हैं , ये सभी उनके विद्रोह के समय पायलट के साथ थे। पायलट जगह-जगह लोगों का फीडबैक लेकर अब उनकी बात को दिल्ली तक पहुंचाने में लगे हैं।